अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा, MEA ने 27 स्थलों के नाम बदलने पर चीन को दिया करारा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार, 11 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। यह बयान तब आया जब भारत सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश की झीलों, बस्तियों और स्मारकों समेत 27 स्थलों के नाम बदले, जिसके बाद चीन ने तीखी प्रतिक्रिया जताई।
जायसवाल का स्पष्ट संदेश
किसी भी देश का नाम लिए बिना जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा, 'अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और यह एक स्वयंसिद्ध तथ्य है जिसे कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।' यह बयान अपने आप में भारत की दृढ़ कूटनीतिक स्थिति को रेखांकित करता है।
27 स्थलों के नाम बदलने का विवाद
भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम बदलकर उन्हें अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किया। इस कदम पर चीन ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए निंदा-बयान जारी किया। गौरतलब है कि चीन 2017 से ही अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने का हथकंडा अपनाता रहा है। इस बार जब भारत ने अपने ही क्षेत्र में यही कदम उठाया, तो चीन की प्रतिक्रिया तीखी रही।
चीन का दावा और भारत का खंडन
चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश 'दक्षिणी तिब्बत' का हिस्सा है — एक ऐसा दावा जिसे भारत ने हमेशा बेबुनियाद और अस्वीकार्य बताया है। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेतों के बीच भारत ने 'एकतरफा कदम' उठाए हैं, जिससे सीमा पर हालात बिगड़ सकते हैं। भारत सरकार ने इस तर्क को सिरे से नकार दिया है।
अप्रैल में भी दोहराया था रुख
यह ऐसे समय में आया है जब इससे पहले अप्रैल में भी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है और आगे भी रहेगा। मंत्रालय ने तब भी चीन के नाम बदलने के प्रयास को 'गैरकानूनी' करार दिया था। यह लगातार दूसरी बार है जब भारत ने इस मुद्दे पर अपना रुख सार्वजनिक रूप से दोहराया है।
आगे क्या
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह कदम सीमा-क्षेत्र में अपनी संप्रभुता को मानचित्रीय रूप से पुख्ता करने की रणनीति का हिस्सा है। भारत-चीन सीमा वार्ता की पृष्ठभूमि में इस तरह के कदम दोनों देशों के बीच तनाव के नए बिंदु बन सकते हैं, हालांकि भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह अपनी संप्रभुता के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी।