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मोदी-शी बैठक पर कांग्रेस के चार तीखे सवाल: लद्दाख, अरुणाचल, व्यापार घाटा और ऑपरेशन सिंदूर

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मोदी-शी बैठक पर कांग्रेस के चार तीखे सवाल: लद्दाख, अरुणाचल, व्यापार घाटा और ऑपरेशन सिंदूर

सारांश

मोदी-शी मुलाकात के ठीक बाद कांग्रेस ने चार मोर्चों पर सरकार को घेरा — गलवान का वह विवादास्पद बयान, अरुणाचल में चीनी विस्तार, ऑपरेशन सिंदूर में चीन की कथित भूमिका पर पलटी मारता आधिकारिक रुख, और रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर का व्यापार घाटा। सरकार ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया।

मुख्य बातें

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 13 सितंबर 2026 को PM मोदी से शी जिनपिंग के साथ बैठक को लेकर चार तीखे सवाल पूछे।
रमेश ने दावा किया कि भारत ने पूर्वी लद्दाख में पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार चीन को सौंप दिए हैं।
अरुणाचल प्रदेश में चीन के 60,000 मेगावाट के मेडोग मेगा-डैम को लेकर जल सुरक्षा पर चिंता जताई गई।
2025-26 में भारत-चीन व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर पर पहुँचा, जिससे एमएसएमई क्षेत्र पर गहरा असर पड़ा।
4 जुलाई 2025 को सेना के उप प्रमुख और 25 अगस्त 2026 को पूर्व CDS के बीच 'ऑपरेशन सिंदूर' में चीन की भूमिका पर परस्पर विरोधी बयानों पर सवाल उठाए गए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 13 सितंबर 2026 को एक विस्तृत प्रेस नोट जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक को लेकर चार सीधे सवाल पूछे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार की 'कथनी और करनी' में गहरा अंतर है और भारत-चीन संबंधों पर सरकार का रुख अस्पष्ट बना हुआ है।

गलवान और 2020 का बयान: क्या बातचीत की स्थिति कमज़ोर हुई?

रमेश ने 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री के उस बयान की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'भारतीय क्षेत्र में कोई नहीं घुसा।' उनका सवाल था कि क्या इस बयान ने गलवान घाटी की झड़पों के बाद भारत की बातचीत की स्थिति को कमज़ोर किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार चीन को सौंप दिए हैं — हालाँकि सरकार ने इस दावे को अब तक स्वीकार नहीं किया है।

अरुणाचल प्रदेश में चीनी विस्तार की चिंता

रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में चीन के कथित विस्तारवाद पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'अरुणाचल प्रदेश में चीन के अतिक्रमण की खबरें आई हैं, जिसमें भारत की गश्त बिंदुओं तक पहुँच का नुकसान और नए गतिरोध शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश पर चीन का रुख और सख्त हो गया है, जिसमें कस्बों के नाम बदलना, जिसे वह 'दक्षिण तिब्बत' कहता है, उस पर अपना दावा फिर से जताना, और ब्रह्मपुत्र के 'ग्रेट बेंड' पर अपने 60,000 मेगावाट के मेडोग मेगा-डैम प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना शामिल है।' उन्होंने चेतावनी दी कि यह परियोजना पूरे पूर्वोत्तर भारत की जल सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर और चीन की कथित भूमिका पर सरकार की 'नरमी'

रमेश ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को चीन के कथित समर्थन को लेकर सरकार के बदलते रुख पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 4 जुलाई 2025 को सेना के तत्कालीन उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से चीन की 'गहरी और अहम भूमिका' स्वीकार की थी, लेकिन 25 अगस्त 2026 को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने एक व्याख्यान में बिल्कुल अलग रुख अपनाया। कांग्रेस ने पूछा कि क्या यह बदलाव शी जिनपिंग की मेजबानी से पहले माहौल बनाने की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा था।

रिकॉर्ड व्यापार घाटा: ₹9.4 लाख करोड़ से अधिक का बोझ

कांग्रेस ने भारत-चीन व्यापार संबंधों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। रमेश ने कहा, '2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जिससे हमारे उद्योग का एक बड़ा हिस्सा, खासकर एमएसएमई, बर्बाद हो गया।' उन्होंने यह भी चेताया कि जरूरी कच्चे माल, मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स और इंटरमीडिएट्स के लिए चीन पर निर्भरता 'खतरनाक स्तर' तक पहुँच गई है और सरकार से इस स्थिति को बदलने का रोडमैप माँगा।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बैठक में कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का 'महत्वपूर्ण हिस्सा' है — और कांग्रेस के ये सवाल उसी बयान के ठीक एक दिन बाद आए हैं। सरकार की ओर से अब तक इन चारों सवालों का आधिकारिक जवाब नहीं आया है। भारत-चीन संबंध इस समय एक नाज़ुक मोड़ पर हैं, जहाँ कूटनीतिक जुड़ाव और सीमा पर अनसुलझे सवाल एक साथ चल रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लद्दाख में गश्त अधिकारों की वास्तविक स्थिति, और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर सेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों के परस्पर विरोधी सार्वजनिक बयान — ये तीनों मुद्दे सत्यापन योग्य हैं और जवाब माँगते हैं। 112.6 अरब डॉलर के व्यापार घाटे का आँकड़ा भी चिंताजनक है, खासकर तब जब सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' का नारा देती है। असली सवाल यह है कि क्या भारत की चीन नीति रणनीतिक स्पष्टता पर टिकी है, या कूटनीतिक अवसरवाद पर।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने मोदी-शी बैठक पर क्या सवाल उठाए हैं?
कांग्रेस ने चार मुख्य सवाल उठाए हैं — पूर्वी लद्दाख में गश्त अधिकारों का नुकसान, अरुणाचल में चीनी विस्तार, ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका पर सरकार के बदलते रुख, और रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर के व्यापार घाटे पर सरकार का रोडमैप।
2020 के गलवान बयान पर कांग्रेस की आपत्ति क्या है?
कांग्रेस का आरोप है कि 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री के 'भारतीय क्षेत्र में कोई नहीं घुसा' वाले बयान ने गलवान झड़पों के बाद भारत की बातचीत की स्थिति को कमज़ोर किया। पार्टी का कहना है कि इस बयान के कारण भारत पूर्वी लद्दाख में पारंपरिक गश्त अधिकार पुनः प्राप्त करने में पिछड़ गया।
मेडोग मेगा-डैम से भारत को क्या खतरा है?
चीन ब्रह्मपुत्र के 'ग्रेट बेंड' पर 60,000 मेगावाट का मेडोग मेगा-डैम बना रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह परियोजना चीन को पूरे पूर्वोत्तर भारत की जल सुरक्षा पर नियंत्रण दे सकती है, क्योंकि ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से होकर भारत में प्रवेश करती है।
ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका को लेकर विवाद क्यों है?
4 जुलाई 2025 को सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद में चीन की 'गहरी और अहम भूमिका' सार्वजनिक रूप से स्वीकार की थी। लेकिन 25 अगस्त 2026 को पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने एक अलग रुख अपनाया, जिस पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
भारत-चीन व्यापार घाटा 2025-26 में कितना रहा?
2025-26 में भारत-चीन व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर पर पहुँच गया। कांग्रेस का आरोप है कि इससे एमएसएमई क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है और जरूरी कच्चे माल, मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स के लिए चीन पर निर्भरता 'खतरनाक स्तर' तक पहुँच गई है।
राष्ट्र प्रेस
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