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श्रावण माह पर CM योगी का संदेश: लोकमंगल, श्रम-सम्मान और जल संरक्षण का लें संकल्प

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श्रावण माह पर CM योगी का संदेश: लोकमंगल, श्रम-सम्मान और जल संरक्षण का लें संकल्प

सारांश

श्रावण माह की शुरुआत पर CM योगी आदित्यनाथ ने 'योगी की पाती' के ज़रिए प्रदेशवासियों को जल संरक्षण, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता का संकल्प लेने का आह्वान किया। प्रदेश में 20 हजार अमृत सरोवर और लखनऊ की 50 हजार लीटर जल पुनर्भरण पहल इस संदेश को ज़मीनी आधार देती है।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 3 जुलाई को 'योगी की पाती' शीर्षक से श्रावण माह पर प्रदेशवासियों के नाम विशेष संदेश जारी किया।
श्रावण को लोकमंगल, श्रम-सम्मान एवं सामूहिकता का पावन पर्व बताया गया।
उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं।
लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी ने आरओ व एसी के प्रतिदिन 50 हजार लीटर जल को भूजल पुनर्भरण में उपयोग करने की पहल की।
मुख्यमंत्री ने सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को श्रावण माह का केंद्रीय संकल्प बनाने का आह्वान किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 जुलाई को श्रावण माह के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम 'योगी की पाती' शीर्षक से एक विशेष संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने इस पावन माह को लोकमंगल, श्रम-सम्मान एवं सामूहिकता का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का संकल्प लेने का आह्वान किया।

सनातन संस्कृति और प्रकृति का संदेश

अपने संदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि श्रावण माह में प्रकृति नवसृजन का संदेश देती है और अन्नदाता का परिश्रम हरित समृद्धि के रूप में फलीभूत होने लगता है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में प्रकृति का यह नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन को संयम, सेवा और समरसता का मार्ग दिखाता है।

मुख्यमंत्री ने भगवान शिव के प्रतीकों की व्याख्या करते हुए कहा कि उनकी जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ का सर्प और नंदी जी — ये सभी प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का संदेश देते हैं। समुद्र-मंथन के समय भगवान शिव द्वारा हलाहल का पान सृष्टि की रक्षा हेतु किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है, और उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा उसी त्याग एवं कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

श्रावण और ग्रामीण सामूहिकता

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि ज्येष्ठ और आषाढ़ के ताप के पश्चात जब श्रावण की रिमझिम धरती को स्पर्श करती है, तो माटी की सोंधी सुगंध के साथ चारों ओर हरियाली छा जाती है। नदियाँ अपने पूर्ण सौष्ठव के साथ प्रवाहित होती हैं और यही उमंग गांवों से लेकर नगरों तक जीवन में नई ऊर्जा के रूप में झलकती है।

उन्होंने कहा कि श्रावण में ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के पश्चात सामूहिक श्रम से जुड़े लोगों का सहभोज साझा संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। गांवों से लेकर नगरों तक शिवालयों में उमड़ती श्रद्धालुओं की आस्था, सेवा, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत वातावरण निर्मित करती है।

जल संरक्षण पर विशेष बल

मुख्यमंत्री योगी ने जल को पंचतत्वों में जीवन का मूल आधार बताते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं। उन्होंने लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी की प्रेरक पहल का उल्लेख किया, जिसने आरओ और एयर कंडीशनर से निकलने वाले प्रतिदिन लगभग 50 हजार लीटर जल को रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली से जोड़कर भूजल पुनर्भरण में उपयोग करना शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं अत्यधिक दोहन के कारण आज वैश्विक स्तर पर जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी अनिवार्य हो गई है। 'प्रकृति से जितना लें, उतना ही उसे लौटाने का संकल्प भी होना चाहिए' — यह उनके संदेश का केंद्रीय भाव रहा।

मुख्यमंत्री का आह्वान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से विशेष रूप से आग्रह किया कि श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का माह बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा, 'प्रत्येक बूंद का सम्मान तथा प्रत्येक पौधे का संरक्षण करें — यही श्रावण का वास्तविक संदेश है और समृद्ध, सुरक्षित तथा विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला भी।' यह संदेश राज्य सरकार की पर्यावरण-सचेत नीतियों के व्यापक ढाँचे में एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें 20 हजार अमृत सरोवर और लखनऊ की जल पुनर्भरण पहल जैसे ठोस आँकड़े जोड़कर इसे नीतिगत उपलब्धि के साथ जोड़ने की कोशिश स्पष्ट है। सवाल यह है कि क्या ये सरोवर वास्तव में भूजल स्तर सुधारने में कारगर रहे हैं — इसका स्वतंत्र मूल्यांकन अभी सार्वजनिक नहीं है। धर्म और पर्यावरण को एक साथ जोड़ने की यह शैली योगी सरकार की पहचान बन चुकी है, जो मतदाताओं तक सांस्कृतिक और प्रशासनिक दोनों धरातलों पर एक साथ पहुँचती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'योगी की पाती' क्या है?
'योगी की पाती' उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेशवासियों के नाम जारी किया जाने वाला एक व्यक्तिगत संदेश है, जिसमें वे किसी विशेष अवसर या माह के महत्व को साझा करते हैं। 3 जुलाई को जारी इस संदेश में श्रावण माह को लोकमंगल और जल संरक्षण का पर्व बताया गया।
CM योगी ने श्रावण माह में जल संरक्षण पर क्यों जोर दिया?
मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक जल दोहन को वैश्विक संकट बताते हुए जनभागीदारी को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि पंचतत्वों में जल जीवन का मूल आधार है और प्रकृति से जितना लें, उतना लौटाने का संकल्प भी होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में अमृत सरोवर योजना की स्थिति क्या है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार प्रदेश में अब तक लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं। यह योजना जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
लखनऊ की आवासीय सोसाइटी की जल पुनर्भरण पहल क्या है?
लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी ने आरओ और एयर कंडीशनर से निकलने वाले प्रतिदिन लगभग 50 हजार लीटर जल को रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली से जोड़कर भूजल पुनर्भरण में उपयोग करने की पहल की है। CM योगी ने इसे प्रेरक उदाहरण के रूप में अपने संदेश में उद्धृत किया।
श्रावण माह में CM योगी ने प्रदेशवासियों से क्या संकल्प लेने को कहा?
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का माह बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूंद का सम्मान और प्रत्येक पौधे का संरक्षण ही श्रावण का वास्तविक संदेश है।
राष्ट्र प्रेस
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