योगी की पाती: श्रावण मास को सेवा, स्वच्छता और जल संरक्षण का जनअभियान बनाएं — CM योगी का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 अगस्त 2025 को अपनी मासिक अपील 'योगी की पाती' जारी करते हुए प्रदेशवासियों से श्रावण मास को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक समरसता के जनआंदोलन में बदलने का आग्रह किया। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब वर्षा ऋतु अपने चरम पर है और राज्य में जल प्रबंधन की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं।
श्रावण का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश
मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में स्पष्ट किया कि श्रावण केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, लोकमंगल और सामूहिक सहभागिता का भी संदेश देता है। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव द्वारा हलाहल विष का पान सृष्टि की रक्षा के लिए किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। शिव को जल अर्पित करने की परंपरा त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण की भावना को मूर्त रूप देती है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान शिव का स्वरूप प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देता है और श्रावण का यह महीना इसी भाव को आत्मसात करने का सुअवसर है।
ग्रामीण परंपरा और सामूहिक श्रम
मुख्यमंत्री ने वर्षा ऋतु के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस मौसम में धरती हरियाली से आच्छादित होती है और ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के दौरान सामूहिक श्रम तथा सहयोग भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिवालयों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की आस्था समाज में सेवा, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता की भावना को और मजबूत करती है।
जल संरक्षण: 20 हजार अमृत सरोवर की उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि पंचतत्वों में जल ही जीवन का मूल आधार है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं, जो जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामूहिक पहल है।
उन्होंने राजधानी लखनऊ की एक आवासीय सोसायटी का विशेष उल्लेख किया, जो प्रतिदिन हजारों लीटर जल का रेन वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से भूजल पुनर्भरण में उपयोग कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस पहल को अनुकरणीय बताते हुए प्रदेशवासियों से ऐसे प्रयासों को अपनाने की अपील की।
प्रकृति को लौटाने का संकल्प
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते दोहन के इस दौर में प्रकृति से जितना लिया जाए, उतना उसे लौटाने का संकल्प भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से प्रत्येक बूंद जल और प्रत्येक पौधे के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
जनसहभागिता से विकसित उत्तर प्रदेश का संकल्प
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता ही एक समृद्ध, सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बनेगी। गौरतलब है कि 'योगी की पाती' मुख्यमंत्री की वह मासिक अपील है जिसके माध्यम से वे सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों पर सीधे प्रदेशवासियों से संवाद करते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि श्रावण मास के दौरान राज्य में इस जनअभियान को किस स्तर पर व्यावहारिक रूप दिया जाता है।