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सीएम योगी आदित्यनाथ की अपील: गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल ले जाएं, प्रकृति से जोड़ें

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सीएम योगी आदित्यनाथ की अपील: गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल ले जाएं, प्रकृति से जोड़ें

सारांश

सीएम योगी आदित्यनाथ की पाती सिर्फ छुट्टियों की सलाह नहीं — यह संस्कार, पर्यावरण और पारिवारिक जुड़ाव का आह्वान है। ननिहाल-ददिहाल से लेकर दुधवा जंगल तक, और प्लास्टिक मुक्त पिकनिक तक — मुख्यमंत्री चाहते हैं कि बच्चों की गर्मी की छुट्टियाँ स्क्रीन से हटकर जड़ों की ओर लौटें।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 मई 2026 को बच्चों और अभिभावकों के नाम विशेष पाती लिखी।
अभिभावकों से अपील — गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल अवश्य ले जाएं, संस्कारों से जोड़ें।
बच्चों को दुधवा राष्ट्रीय उद्यान , चूका बीच और कतर्निया घाट वन्यजीव विहार जैसे प्राकृतिक स्थलों पर ले जाने की सिफारिश।
पौधे लगाने, उनकी देखभाल और प्लास्टिक मुक्त यात्रा का संकल्प लेने की अपील।
किशोरों के लिए सुझाव — नई भाषा, कौशल, फोटोग्राफी, संगीत और बागवानी जैसी रुचियाँ विकसित करें।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 मई 2026 को बच्चों और उनके अभिभावकों के नाम एक विशेष पाती (पत्र) लिखी है, जिसमें उन्होंने ग्रीष्मावकाश को सार्थक बनाने के लिए कई अपीलें की हैं। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से आग्रह किया कि इन छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल अवश्य ले जाएं और उन्हें प्रकृति से जोड़ने का प्रयास करें।

बच्चों के लिए संदेश

मुख्यमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए लिखा कि गर्मी की छुट्टियाँ आनंद, उत्साह और नए शोध का समय लेकर आती हैं। उन्होंने कहा, 'यही अवसर है, जब आप अपनी रुचियों को पहचानें, नई आदतें विकसित करें एवं जीवन के ऐसे अनुभव प्राप्त करें, जो आगे चलकर आपके सम्पूर्ण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक हों।' योगी आदित्यनाथ ने सुझाया कि किशोर एवं युवा इन छुट्टियों में नई भाषा या नया कौशल सीख सकते हैं। उन्होंने अच्छी पुस्तकों से मित्रता, फोटोग्राफी, चित्रकारी, पाक कला, संगीत और बागवानी जैसी रुचियों को विकसित करने पर भी बल दिया।

परिवार और संस्कारों से जुड़ाव

अभिभावकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि आज बच्चे दादा-दादी और नाना-नानी के अनुभवों से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा आपसे आग्रह है कि इन छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल अवश्य ले जाएं। उन्हें परिवार के साथ समय बिताने दें, ताकि वे अपने संस्कारों और परंपराओं को निकट से जान सकें।' यह अपील ऐसे समय में आई है जब शहरीकरण और डिजिटल जीवनशैली के कारण बच्चों का संयुक्त परिवार और ग्रामीण परिवेश से जुड़ाव तेज़ी से कम हो रहा है।

प्रकृति से जोड़ने की अपील

सीएम योगी ने अभिभावकों से अपील की कि ग्रीष्मावकाश में बच्चों के साथ पौधे लगाएं और उनकी देखभाल का दायित्व बच्चों को सौंपें। उन्होंने कहा कि जब बच्चे मिट्टी, वृक्ष और जल के महत्व को समझते हैं, तभी उनके अंदर पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। मुख्यमंत्री ने एक सटीक उपमा देते हुए लिखा, 'जिस वृक्ष की जड़ें मजबूत होती हैं, वही सबसे अधिक फलदायी एवं दीर्घजीवी होता है। हमारी संस्कृति और संस्कार भी वैसी ही जड़ें हैं।'

पर्यटन और जैव विविधता

मुख्यमंत्री ने बच्चों को प्रकृति एवं जैव विविधता का अनुभव कराने के लिए विशेष स्थलों का उल्लेख किया। उन्होंने दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, चूका बीच और कतर्निया घाट वन्यजीव विहार जैसे स्थलों की यात्रा की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि यदि इन छुट्टियों में बच्चों को प्रकृति, संस्कृति और स्वास्थ्य से जोड़ा जा सके, तो यह समय उनके जीवन की अमूल्य पूंजी बन जाएगा।

प्लास्टिक मुक्त छुट्टियों का संकल्प

पाती के अंत में योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय अपील की। उन्होंने लिखा कि इन छुट्टियों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लें — यात्रा हो या पिकनिक, कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग करें और बच्चों को स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दें। उनका मानना है कि 'छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य के बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं।' यह पाती उत्तर प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए ग्रीष्मावकाश को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कार और पर्यावरण-चेतना के अवसर के रूप में देखने का आह्वान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संस्कृति की भाषा में बोलती है। ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और बाल मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल हैं, केवल पाती लिखना पर्याप्त नहीं है। असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार ग्रामीण पर्यटन स्थलों तक पहुँच, सार्वजनिक परिवहन और सुविधाओं में निवेश करती है — ताकि दुधवा और कतर्निया घाट जैसी सिफारिशें केवल संपन्न परिवारों तक सीमित न रहें। पर्यावरण-चेतना का संदेश सराहनीय है, लेकिन प्लास्टिक मुक्त अभियान को जमीनी ढाँचे के बिना केवल नैतिक अपील तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गर्मी की छुट्टियों पर पाती क्यों लिखी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 मई 2026 को बच्चों और अभिभावकों को ग्रीष्मावकाश सार्थक बनाने के लिए पाती लिखी। इसमें उन्होंने परिवार, प्रकृति और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ाव पर बल दिया।
सीएम योगी ने बच्चों के लिए क्या-क्या सुझाव दिए हैं?
मुख्यमंत्री ने सुझाया कि बच्चे नई भाषा, कौशल, फोटोग्राफी, चित्रकारी, पाक कला, संगीत और बागवानी जैसी रुचियाँ विकसित करें। साथ ही अच्छी पुस्तकें पढ़ने और प्रकृति के बीच समय बिताने पर भी जोर दिया गया।
ननिहाल-ददिहाल ले जाने की अपील का क्या उद्देश्य है?
सीएम योगी का मानना है कि आज बच्चे दादा-दादी और नाना-नानी के अनुभवों से दूर होते जा रहे हैं। ननिहाल-ददिहाल जाने से बच्चे अपने संस्कारों और पारिवारिक परंपराओं को निकट से जान सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने किन पर्यटन स्थलों की सिफारिश की है?
योगी आदित्यनाथ ने दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, चूका बीच और कतर्निया घाट वन्यजीव विहार का उल्लेख किया। ये स्थल बच्चों को प्रकृति एवं जैव विविधता का प्रत्यक्ष अनुभव कराते हैं।
प्लास्टिक मुक्त छुट्टियों से सीएम योगी का क्या आशय है?
मुख्यमंत्री ने अपील की कि यात्रा या पिकनिक के दौरान कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग करें और प्लास्टिक कचरा न फैलाएं। उन्होंने इसे बच्चों में स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने के अवसर के रूप में देखा।
राष्ट्र प्रेस
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