जन्माष्टमी 2026: योगी आदित्यनाथ बोले — श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में छिपे हैं गहन आध्यात्मिक संदेश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (4 सितंबर, 2026) के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, धर्म, कर्म और लोकमंगल का अक्षय स्रोत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मन को आनंदित करने वाली कथाएं नहीं, बल्कि उनमें गहन आध्यात्मिक संदेश अंतर्निहित हैं। मुख्यमंत्री ने यह बात 31 अगस्त 2026 को जारी अपने शुभकामना संदेश-पत्र में कही।
बाल लीलाओं का आध्यात्मिक आयाम
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में मथुरा के कारागार में नंदलाला के प्राकट्य के साथ असत्य और अन्याय के अंधकार के बीच सत्य और धर्म का प्रकाश प्रकट हुआ। उन्होंने तीन बाल लीलाओं की विशेष व्याख्या की — माखन चोरी में सहजता और निश्चलता का संदेश, गोप-गोपियों के साथ आत्मीयता में प्रेम और समरसता का भाव, तथा कालिय नाग के दमन में अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक।
सामाजिक समरसता और सामूहिक सहकारिता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोवर्धन पर्वत धारण कर श्रीकृष्ण ने प्रकृति, पशुधन और कृषि-आधारित जीवन के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि श्रीकृष्ण कुलीनता के नहीं, समरसता के प्रतीक हैं — वे द्वारकाधीश हैं, तो सुदामा के आत्मीय मित्र भी। सांदीपनि ऋषि के आश्रम में ज्ञान अर्जन और सुदामा के साथ मित्रता यह सिखाती है कि सच्चे संबंध पद, प्रतिष्ठा और संपन्नता से नहीं, आत्मीयता से बनते हैं।
शासन और लोककल्याण की प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने योगेश्वर श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन को अपनी सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि अन्याय का प्रतिकार, धर्म की रक्षा, निर्बल का संरक्षण और लोकमंगल उनके शासन की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि गरीबी मुक्त उत्तर प्रदेश, प्रतिभासंपन्न युवाओं को रोज़गार, किसानों को सहारा और बेटियों को समान अवसर देना इसी भावना को धरातल पर उतारने का प्रयास है।
गीता का कालजयी संदेश
योगी ने कहा कि गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का जो मार्ग दिखाया, वह किसी एक युग तक सीमित नहीं है। निष्काम कर्म, सत्य के प्रति निष्ठा और लोकमंगल की भावना दैनिक जीवन की हर चुनौती में मार्गदर्शन करती है। उन्होंने मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव को सनातन सांस्कृतिक चेतना के जीवंत केंद्र बताते हुए प्रदेशवासियों से अपनी विरासत के संरक्षण और सामाजिक समरसता का संकल्प लेने का आह्वान किया।