31 अगस्त 2026
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सद्गुरु का पाँच देशों का हिमालयन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव, नेपाल आपदा राहत कोष में ₹1 करोड़ देने का वादा

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सद्गुरु का पाँच देशों का हिमालयन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव, नेपाल आपदा राहत कोष में ₹1 करोड़ देने का वादा

सारांश

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सद्गुरु ने काठमांडू में राहत कोष में ₹1 करोड़ देने का वादा किया और पाँच हिमालयी देशों का साझा बोर्ड बनाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा — एक ऐसा विचार जो राजनीतिक सीमाओं को पार कर पर्वतीय पारिस्थितिकी की साझी रक्षा की माँग करता है।

मुख्य बातें

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने 31 अगस्त को काठमांडू में नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में ₹1 करोड़ देने की घोषणा की।
भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलाकर पाँच-देशीय हिमालयन बोर्ड गठित करने का प्रस्ताव रखा गया।
ईशा सेक्रेड वॉक्स कैलाश यात्रा के 77 प्रतिभागी और 3 ईशा स्वयंसेवक आपदा के बाद से लापता हैं।
सद्गुरु ने कहा कि ग्लेशियर का तीन-चौथाई हिस्सा चार हज़ार फीट नीचे गिरने से यह अभूतपूर्व आपदा आई।
कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र में 'काल भैरव कर्म' अनुष्ठान की घोषणा की गई।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने 31 अगस्त को काठमांडू में आयोजित 'इन सॉलिडैरिटी विद नेपाल' कार्यक्रम में नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के मद्देनज़र नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में ₹1 करोड़ का योगदान देने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलाकर एक पाँच-देशीय हिमालयन बोर्ड गठित करने का प्रस्ताव रखा, जो राजनीतिक सीमाओं से परे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सामूहिक रक्षा कर सके।

आपदा की भयावहता

इस त्रासदी में हज़ारों लोग लापता हैं और कई लोगों के मारे जाने की आशंका है। लापता लोगों में 'ईशा सेक्रेड वॉक्स कैलाश यात्रा' के 77 प्रतिभागी शामिल हैं, जो आपदा के समय चीन की ओर गियिरोंग इमिग्रेशन सेंटर पर थे। इसके अलावा नेपाल की तरफ तैनात तीन ईशा स्वयंसेवक भी लापता बताए जा रहे हैं।

सद्गुरु ने इस आपदा की अभूतपूर्व प्रकृति पर ज़ोर देते हुए कहा, 'किसी को उम्मीद नहीं थी कि ग्लेशियर की बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा — तीन चौथाई हिस्सा — पहाड़ की चोटी से चार हज़ार फीट नीचे गिर जाएगा। ऐसी घटना का कोई पहले से अंदाज़ा नहीं लगाता।'

पाँच देशों के हिमालयन बोर्ड का प्रस्ताव

सद्गुरु ने तर्क दिया कि हिमालय एक साझा प्राकृतिक विरासत है जिसे किसी एक देश की सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता। उन्होंने कहा, 'पहाड़ों को आपकी राजनीतिक संबद्धता का पता नहीं होता। पहाड़ों को यह नहीं पता कि आप क्या बकवास करते हैं या कौन सी भाषा बोलते हैं। भले ही आप इसे एक इकाई के रूप में संचालित न कर सकें, लेकिन कम से कम एक इकाई के रूप में परामर्श तो होना ही चाहिए।'

उन्होंने आगे कहा, 'जिन देशों में हिमालय की पर्वतमालाएँ फैली हैं, उन सभी को मिलाकर एक संस्था का गठन अभी होना चाहिए। अगर हम यही सोचते रहे कि यह नेपाल की समस्या है, उन्हें अपनी समस्या से निपटने दें, तो इसका कभी कोई समाधान नहीं निकलेगा।'

गौरतलब है कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक तनाव के कारण इस तरह के बहुपक्षीय ढाँचे की संभावना राजनीतिक रूप से जटिल मानी जाती है।

आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण

अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने सद्गुरु से पूछा कि लोग इस तबाही के अनुभव से क्या सीख सकते हैं। इस पर सद्गुरु ने कहा, 'एक इंसान के तौर पर हमें आपदाओं के होने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। हमें जीवन के हर पल यह पता होना चाहिए कि हम नश्वर हैं।'

उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि वे इस आपदा को 'दैवीय कारण' या 'रहस्यमयी संभावना' न मानें। उनके अनुसार, 'भौतिक घटनाएँ, भौतिक नियमों से चलती हैं। दर्शन या रहस्यमयी व्याख्याओं के ज़रिए इंसानी दुख को कम न आँकें।'

ईशा योग केंद्र में विशेष अनुष्ठान

सद्गुरु ने घोषणा की कि कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र में 'काल भैरव कर्म' अनुष्ठान किया जाएगा। यह एक पवित्र मृत्यु-अनुष्ठान है, जो प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों तरह की मौतों में दिवंगत आत्माओं को शांति दिलाने के लिए किया जाता है।

यह कार्यक्रम काठमांडू में उन सभी लोगों को एकजुट करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था जो इस आपदा से प्रभावित लोगों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करना चाहते थे। सद्गुरु ने स्पष्ट किया कि तत्काल राहत के साथ-साथ हिमालय के प्रति दीर्घकालिक सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी उतना ही ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक रूप से अत्यंत जटिल — भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव को देखते हुए इस तरह के किसी बहुपक्षीय ढाँचे की कल्पना भी कूटनीतिक चुनौती है। ₹1 करोड़ की राहत राशि तात्कालिक संवेदनशीलता दर्शाती है, लेकिन हिमालयी आपदाओं के बढ़ते पैमाने के सामने यह प्रतीकात्मक अधिक है। असली सवाल यह है कि क्या इस प्रस्ताव को राजनयिक मंचों पर ले जाने की कोई ठोस पहल होगी, या यह एक मार्मिक भाषण तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सद्गुरु ने नेपाल आपदा राहत के लिए क्या घोषणा की?
सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने 31 अगस्त को काठमांडू में नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में ₹1 करोड़ का योगदान देने की घोषणा की। यह घोषणा नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के संदर्भ में 'इन सॉलिडैरिटी विद नेपाल' कार्यक्रम में की गई।
सद्गुरु के हिमालयन बोर्ड प्रस्ताव में कौन-से देश शामिल हैं?
सद्गुरु ने भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान — इन पाँच देशों को मिलाकर एक हिमालयन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा। उनका तर्क है कि हिमालय की पर्वतमालाएँ इन सभी देशों में फैली हैं और इन्हें राजनीतिक सीमाओं से परे एक साझी जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
ईशा कैलाश यात्रा के कितने लोग इस आपदा में लापता हैं?
'ईशा सेक्रेड वॉक्स कैलाश यात्रा' के 77 प्रतिभागी आपदा के समय चीन की ओर गियिरोंग इमिग्रेशन सेंटर पर थे और तब से लापता हैं। इसके अलावा नेपाल की तरफ तैनात तीन ईशा स्वयंसेवक भी लापता बताए जा रहे हैं।
इस बाढ़ आपदा की वजह क्या बताई जा रही है?
सद्गुरु के अनुसार, ग्लेशियर का तीन-चौथाई हिस्सा पहाड़ की चोटी से लगभग चार हज़ार फीट नीचे गिरने से यह अभूतपूर्व आपदा आई। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं था।
ईशा योग केंद्र में 'काल भैरव कर्म' क्या है?
'काल भैरव कर्म' एक पवित्र मृत्यु-अनुष्ठान है जो कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र में किया जाएगा। सद्गुरु के अनुसार, यह अनुष्ठान प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों तरह की मौतों में दिवंगत आत्माओं को शांति और सुखद परिवर्तन दिलाने के उद्देश्य से किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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