सीएजी रिपोर्ट में हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप, ₹1,60,565 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित: बाबूलाल मरांडी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 13 अगस्त 2025 को भाजपा प्रदेश कार्यालय, रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और मनरेगा जैसी केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में उजागर हुई खामियाँ यह साबित करती हैं कि राज्य सरकार इन योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में विफल रही है।
जल जीवन मिशन में निविदा अनियमितताएँ
मरांडी ने दावा किया कि सीएजी ने जल जीवन मिशन की निविदा प्रक्रिया और कार्यों की प्रगति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ निविदाओं में प्रतिस्पर्धा बेहद सीमित रही और एक ऐसे संवेदक को अलग-अलग निविदाओं के माध्यम से करीब ₹148 करोड़ के कार्य आवंटित किए गए, जिसकी निविदा क्षमता नकारात्मक थी। रांची-पूर्वी और खूंटी प्रमंडल की कुछ निविदाओं में केवल दो बोलीदाता शामिल हुए, और सीएजी की जाँच में यह भी सामने आया कि दोनों बोलीदाताओं के डिमांड ड्राफ्ट एक-दूसरे द्वारा खरीदे गए थे — जो कथित तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
आवास योजना और मनरेगा में देरी
नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन में हुई देरी का उल्लेख करते हुए कहा कि लक्ष्य और लाभार्थियों को अंतिम रूप देने में विलंब के कारण 22.34 लाख पात्र परिवारों में से 6.32 लाख परिवार योजना के दायरे से बाहर रह गए। मनरेगा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि योजना की राशि 40 से 55 दिनों की देरी से जारी की गई, जबकि इस योजना का मूल उद्देश्य जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को समय पर रोज़गार सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सीएजी को ऐसे खर्च भी मिले जो योजना के तहत स्वीकार्य नहीं थे।
राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल
मरांडी ने राज्य की समग्र वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, 31 मार्च 2025 तक ₹1,60,565 करोड़ के खर्च से जुड़े उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे। इसके अलावा, वर्ष 2024-25 के ₹1,50,938.84 करोड़ के बजट में से ₹31,110 करोड़ खर्च ही नहीं हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि 13 केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए आवंटित ₹1,916.63 करोड़ में से ₹596.02 करोड़ अनुपयोगित रह गए।
सरकार से जवाबदेही की माँग
मरांडी ने स्पष्ट किया कि सीएजी के निष्कर्ष केवल कुछ योजनाओं की तकनीकी खामियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये राज्य सरकार की समग्र प्रशासनिक और वित्तीय कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार से माँग की कि वह रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से जवाब दे और दोषियों की जिम्मेदारी तय करे। यह देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर कब और किस रूप में अपना पक्ष रखती है।