भुवन बम ने खोला यूट्यूब सफर का राज़: 'सबने मना किया, फिर भी किया'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता भुवन बम ने हाल ही में रिलीज़ हुई स्ट्रीमिंग सीरीज़ 'द रेवोल्यूशनरीज़' के प्रमोशन के दौरान मुंबई में अपने यूट्यूब सफर और जीवन में सही-गलत की समझ विकसित करने के अनुभव साझा किए। सीरीज़ में वे स्वतंत्रता सेनानी रास बिहारी बोस की भूमिका में नज़र आ रहे हैं।
यूट्यूब का वह पहला कदम
भुवन बम ने बताया कि जब उन्होंने यूट्यूब पर कंटेंट बनाना शुरू किया था, तब उनके आस-पास के लगभग सभी लोगों ने उन्हें इससे दूर रहने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा, 'जब मैंने यूट्यूब शुरू किया, तो मेरे आस-पास के सभी लोगों ने कहा — ऐसा मत करो, इसमें कोई भविष्य नहीं है। मैंने कहा, आप कभी उस तरफ गए ही नहीं, इसलिए आपको पता नहीं है।'
उन्होंने आगे जोड़ा कि उस दौर में उन्हें किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत थी जो कहे 'करो, हम तुम्हारे साथ हैं' — और इसी भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
दुनिया की राय से परे अपना रास्ता
प्रमोशन इवेंट में निर्देशक निखिल आडवाणी और कलाकारों प्रतिभा रांटा, रोहित सराफ एवं गुरफतेह पीरजादा के साथ मौजूद भुवन बम ने कहा कि दुनिया आपके बारे में जो कहती है, अगर उसमें उलझ गए तो उससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने अपनी रचनात्मकता का मूल उद्देश्य भी स्पष्ट किया — 'मैं जिंदगी में सभी का मनोरंजन करना चाहता हूं, सबके चेहरे पर मुस्कान लाना चाहता हूं, लोगों को रुलाना चाहता हूं, हंसाना चाहता हूं; मैं हर तरह की भावनाएं शेयर करना चाहता हूं जो एक इंसान महसूस कर सकता है।'
सही-गलत की समझ और जुनून का सबक
भुवन बम ने बताया कि यूट्यूब के सफर में उन्हें ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने उनका साथ नहीं दिया, लेकिन उन्हीं से उन्होंने सही-गलत का फर्क समझा। उनके शब्दों में, 'मेरे जुनून ने हमेशा इसमें मेरी मदद की। किसी ने भी मुझसे यह नहीं कहा कि तुम सही काम कर रहे हो। इसलिए, मैंने उनसे ही सही-गलत की समझ सीखी। कभी भी खुद को किसी और से बेहतर न समझें।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूट्यूब क्रिएटर्स की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और युवा पीढ़ी डिजिटल कंटेंट को पेशे के रूप में अपना रही है।
विनम्रता और भविष्य का नज़रिया
भुवन बम ने अपनी बात में एक गहरी विनम्रता भी दिखाई। उन्होंने कहा, 'इस सफ़र में हमेशा याद रखें कि आपको नहीं पता कि कल कौन आकर हालात बदल देगा। यह सोचना गलत है कि हमारे बिना काम नहीं चल सकता।'
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनमें कुछ कमियाँ हैं जिन्हें वे जीवन में आगे समझेंगे और सीखेंगे — यह स्वीकारोक्ति उनके व्यक्तित्व की एक परिपक्व झलक पेश करती है। 'द रेवोल्यूशनरीज़' में रास बिहारी बोस जैसे ऐतिहासिक किरदार के साथ भुवन बम का यह नया अध्याय उनके करियर को एक अलग आयाम देता नज़र आता है।