'भारत भाग्य विधाता' में कसाब बनना था डरावना, जायद खान ने बताया — माँ भी थीं खिलाफ
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता जायद खान ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' में 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब का किरदार निभाया है। लेकिन यह भूमिका स्वीकार करना उनके लिए आसान नहीं था — शुरुआत में उन्होंने इसे अस्वीकार करने का मन बना लिया था, और उनकी माँ भी इस फैसले के सख्त खिलाफ थीं।
पहली प्रतिक्रिया थी 'ना'
जायद खान ने बताया, 'जब मुझे फिल्म में अजमल कसाब का किरदार निभाने का ऑफर मिला, तो मेरी पहली प्रतिक्रिया 'ना' कहने की थी। यह किरदार मेरे लिए सिर्फ अभिनय नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी था। कसाब देश के सबसे नफरत किए जाने वाले लोगों में से एक है और मैं खुद भी उससे नफरत करता हूँ।' उन्होंने कहा कि करियर की शुरुआत में इतनी नकारात्मक छवि वाले व्यक्ति को पर्दे पर उतारना उन्हें भीतर से डरा रहा था।
जायद ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें इस बात की चिंता सता रही थी कि दर्शक उन्हें हमेशा एक नकारात्मक अभिनेता के रूप में ही पहचानेंगे। उन्होंने कहा, 'मुझे इस बात की भी चिंता थी कि दर्शक मुझको इस भूमिका से जोड़कर देखने लगेंगे। उस समय मेरे मन में कई तरह के सवाल और डर थे, क्योंकि मेरे लिए मेरी छवि काफी मायने रखती है।'
मेंटर की सलाह ने बदला फैसला
इस उलझन से बाहर निकलने में जायद के मेंटर सत्य सभरवाल ने अहम भूमिका निभाई, जिनके साथ वह पहले एक ZEE5 प्रोजेक्ट में काम कर चुके हैं। जायद ने बताया, 'उन्होंने मुझे समझाया कि एक सच्चे अभिनेता का काम किसी किरदार को जज करना नहीं, बल्कि उसे पूरी ईमानदारी के साथ पर्दे पर निभाना होता है। अगर अभिनय अच्छा होगा तो लोग कलाकार की मेहनत और उसके काम को याद रखेंगे, न कि इस बात को कि उसने किस तरह का किरदार निभाया था।'
इस प्रेरणादायक बातचीत के बाद जायद ने भूमिका स्वीकार करने का फैसला किया। यह ऐसे समय में आया जब हिंदी सिनेमा में नए चेहरों के लिए पहली फिल्म की छवि करियर की दिशा तय करने में निर्णायक मानी जाती है।
माँ की आपत्ति और बेटे का भरोसा
जायद खान ने बताया कि उनकी माँ इस फैसले से बिल्कुल सहमत नहीं थीं। उनके शब्दों में, 'वह चाहती थीं कि उनका बेटा ऐसे किरदार निभाए जिन्हें देखकर लोग खुश हों और जिन्हें दर्शक सकारात्मक नजरिए से पसंद करें।' बावजूद इसके, जायद ने अपने अभिनय पर भरोसा रखा और तय किया कि वह इस किरदार को पूरी ईमानदारी और मेहनत से निभाएँगे, ताकि दर्शक उनके अभिनय को देखें — न कि केवल किरदार की नकारात्मकता को।
अभिनेता का नजरिया: किरदार और कलाकार अलग हैं
जायद ने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा, 'एक अभिनेता के लिए हर किरदार एक नई चुनौती लेकर आता है। कई बार कलाकार को ऐसे लोगों की भूमिका भी निभानी पड़ती है, जिनसे समाज नफरत करता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि अभिनेता उस व्यक्ति के विचारों या कामों का समर्थन करता है।' उनके अनुसार, कलाकार का उद्देश्य केवल कहानी को सच्चाई के साथ दर्शकों तक पहुँचाना है।
गौरतलब है कि 26/11 जैसी त्रासदी पर आधारित फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाना हमेशा से संवेदनशील रहा है, और जायद का यह कदम उनके अभिनय के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। आने वाले समय में दर्शकों की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि यह जोखिम उनके करियर के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है।