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भारत से आएगी वैश्विक ऊर्जा माँग की 25% वृद्धि अगले दो दशकों में: हरदीप पुरी

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भारत से आएगी वैश्विक ऊर्जा माँग की 25% वृद्धि अगले दो दशकों में: हरदीप पुरी

सारांश

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का दावा है कि अगले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा माँग वृद्धि का एक-चौथाई हिस्सा भारत से आएगा। तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता के रूप में भारत अब वैश्विक ऊर्जा नीति की धुरी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 सितंबर 2026 को कहा कि अगले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा माँग वृद्धि का 25 प्रतिशत भारत से आएगा।
भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता , तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर है।
यह बयान आईलीड ग्लोबल फाउंडेशन और कोनराड एडेनॉयर स्टिफ्टुंग के राइजिंग लीडर्स प्रोग्राम में करीब 70 युवा पेशेवरों के साथ बातचीत के दौरान दिया गया।
पुरी ने PM मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और निर्बाध ईंधन आपूर्ति की उपलब्धियों को रेखांकित किया।
मंत्री ने युवा शोधकर्ताओं और पेशेवरों को भारत के ऊर्जा एवं टिकाऊ विकास के भविष्य का निर्माता बताया।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 सितंबर 2026 को कहा कि आने वाले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा माँग में होने वाली कुल वृद्धि का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से आएगा, जो देश को वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य की धुरी के रूप में स्थापित करता है। यह बयान उन्होंने आईलीड ग्लोबल फाउंडेशन और इंडिया ऑफिस ऑफ कोनराड एडेनॉयर स्टिफ्टुंग द्वारा आयोजित राइजिंग लीडर्स प्रोग्राम के प्रतिभागियों के साथ बातचीत के दौरान दिया।

राइजिंग लीडर्स प्रोग्राम में क्या हुआ

मंत्री पुरी ने विभिन्न क्षेत्रों के करीब 70 युवा पेशेवरों और शोधकर्ताओं के साथ भारत के ऊर्जा परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक मामलों में देश के बढ़ते प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इस संवाद को भावी नीति-निर्माताओं के साथ विचार-साझेदारी का अवसर बताया।

पुरी ने कहा, 'राइजिंग लीडर्स प्रोग्राम के तहत विभिन्न विषयों के करीब 70 प्रतिभाशाली युवा पेशेवरों और शोधकर्ताओं के साथ बातचीत की।' उन्होंने युवा पीढ़ी को भारत के ऊर्जा भविष्य का निर्माता बताया।

वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में भारत की स्थिति

पुरी ने रेखांकित किया कि भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता, तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर है। उनके अनुसार, ये कारक भारत को भविष्य के वैश्विक ऊर्जा रुझानों और नीतियों को आकार देने में एक निर्णायक भागीदार बनाते हैं।

उन्होंने कहा, 'दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता, तीसरे सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक और चौथे सबसे बड़े रिफाइनर के रूप में भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को आकार देने वाली एक प्रमुख ताकत बनकर उभर रहा है। अगले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा माँग में होने वाली वृद्धि का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा भारत से आने की उम्मीद है।'

ऊर्जा सुरक्षा और विविधीकरण की उपलब्धियाँ

चर्चा के दौरान पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश ने अपने ऊर्जा स्रोतों में सफलतापूर्वक विविधता लाई है और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बनी हुई है। भारत ने इस दौर में अपने आपूर्ति स्रोतों को विविधीकृत करते हुए नागरिकों के लिए ऊर्जा को सुलभ, किफायती और टिकाऊ बनाए रखा।

युवा पेशेवरों की भूमिका पर जोर

पुरी ने विश्वास जताया कि देश के युवा पेशेवर और शोधकर्ता ऊर्जा एवं टिकाऊ विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम नीति, शोध और उद्योग के भावी नेताओं को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

विश्लेषकों के अनुसार, भारत की ऊर्जा माँग में यह वृद्धि न केवल घरेलू आर्थिक विस्तार का प्रतिबिंब है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा निवेश और नीति-निर्माण में भारत की बढ़ती मोलभाव की शक्ति को भी रेखांकित करती है। आने वाले वर्षों में यह देखना होगा कि भारत इस स्थिति का उपयोग ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों के बीच संतुलन साधने के लिए किस प्रकार करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में रखना ज़रूरी है — बड़ी माँग का अर्थ बड़ी जिम्मेदारी भी है, खासकर तब जब भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता के बीच का तनाव अभी भी हल नहीं हुआ है। भारत का 'तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता' का दर्जा वार्ताओं में मोलभाव की शक्ति देता है, लेकिन यह उत्सर्जन कटौती की अंतरराष्ट्रीय अपेक्षाओं को भी बढ़ाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि ऊर्जा विविधीकरण और निर्बाध आपूर्ति की उपलब्धियों के बावजूद, घरेलू ऊर्जा सब्सिडी और कोयले पर दीर्घकालिक निर्भरता भारत की 'हरित महाशक्ति' छवि के लिए असली परीक्षा बनी हुई है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरदीप पुरी ने भारत की वैश्विक ऊर्जा माँग में 25% हिस्सेदारी का दावा क्यों किया?
पुरी ने यह दावा इस आधार पर किया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और उसकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है। उनके अनुसार, अगले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा माँग में होने वाली वृद्धि का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा भारत से आएगा।
वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में भारत की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता, तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर है। ये तथ्य भारत को वैश्विक ऊर्जा नीतियों और रुझानों को प्रभावित करने में एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाते हैं।
राइजिंग लीडर्स प्रोग्राम क्या है और इसमें किसने भाग लिया?
यह कार्यक्रम आईलीड ग्लोबल फाउंडेशन और इंडिया ऑफिस ऑफ कोनराड एडेनॉयर स्टिफ्टुंग द्वारा आयोजित किया गया था। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के करीब 70 युवा पेशेवरों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया, जिन्होंने पुरी के साथ भारत के ऊर्जा परिवर्तन और वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की।
भारत ने वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच ऊर्जा सुरक्षा कैसे बनाए रखी?
पुरी के अनुसार, भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में सफलतापूर्वक विविधता लाई और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद नागरिकों के लिए ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की। ऊर्जा को सुलभ, किफायती और टिकाऊ बनाना सरकार की प्राथमिकता रही है।
भारत की बढ़ती ऊर्जा माँग का वैश्विक नीतियों पर क्या असर होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बड़ी ऊर्जा माँग उसे वैश्विक ऊर्जा वार्ताओं में अधिक मोलभाव की शक्ति देती है। साथ ही, यह भारत पर उत्सर्जन कटौती और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की अंतरराष्ट्रीय अपेक्षाओं को भी बढ़ाती है।
राष्ट्र प्रेस
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