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हरदीप पुरी: भू-राजनीतिक संकटों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा अडिग, 41 देशों से हो रहा कच्चे तेल का आयात

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हरदीप पुरी: भू-राजनीतिक संकटों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा अडिग, 41 देशों से हो रहा कच्चे तेल का आयात

सारांश

भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में भारत ने ऊर्जा मोर्चे पर स्थिरता बनाए रखी — कच्चे तेल के आयात स्रोत 27 से बढ़कर 41 देश, रिफाइनिंग क्षमता 267 एमएमटीपीए और एलपीजी टर्मिनल दोगुने। पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने इसे एक दशक की रणनीतिक तैयारी का नतीजा बताया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत की ऊर्जा कूटनीति को सफल बताया।
कच्चे तेल के आयात स्रोत 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक किए गए; रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 5.33 मिलियन टन ।
रिफाइनिंग क्षमता 215 एमएमटीपीए से बढ़कर 267 एमएमटीपीए ; ईंधन आउटलेट्स एक लाख से अधिक ।
एलपीजी आयात टर्मिनल 11 से 22 हुए; पश्चिम बंगाल में ₹17,600 करोड़ की तेल-गैस परियोजनाएँ चल रही हैं।
ONGC की अशोकनगर खोज ने अगस्त 2026 में पहली कच्चे तेल की खेप हल्दिया भेजी — ₹1,000 करोड़ के निवेश के बाद।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आपूर्ति शृंखला में बार-बार आए व्यवधानों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सफलता हासिल की है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में अपनाई गई रणनीतिक ऊर्जा कूटनीति को दिया।

मुख्य घटनाक्रम

पुरी मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सदस्यों को 'भारत की ऊर्जा सुरक्षा: भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निपटना' विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज ऊर्जा सुरक्षा का अर्थ केवल ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि सशस्त्र संघर्षों, रणनीतिक समुद्री मार्गों में रुकावटों, मूल्य अस्थिरता और अप्रत्याशित व्यवधानों के बीच भी देश की अर्थव्यवस्था को निर्बाध गति से चलाए रखना है।

एक दशक की रणनीतिक तैयारी

पुरी ने विस्तृत आँकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक विस्तारित किया है। इसके साथ ही 5.33 मिलियन टन के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए गए हैं।

रिफाइनिंग क्षमता 215 एमएमटीपीए से बढ़कर 267 एमएमटीपीए हो गई है, जबकि देशभर में ईंधन आउटलेट्स की संख्या लगभग 52,000 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई है। एलपीजी आयात टर्मिनलों की संख्या 11 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा संकट के चलते खुदरा कीमतें आसमान छू रही थीं।

आम जनता पर असर

मंत्री ने रेखांकित किया कि इन तैयारियों का व्यावहारिक परिणाम यह रहा कि जब वैश्विक बाज़ारों में ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आया, तब भी भारत में पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति सामान्य बनी रही। रसोई गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बाधित नहीं हुई और खुदरा ईंधन कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखा जा सका — जो सीधे तौर पर लाखों घरों और छोटे व्यवसायों के लिए राहत का कारण बना।

पश्चिम बंगाल की ऊर्जा भूमिका

पुरी ने पश्चिम बंगाल की ऊर्जा क्षमता का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय ₹17,600 करोड़ की तेल एवं गैस परियोजनाओं पर काम चल रहा है। हल्दिया रिफाइनरी की क्षमता, जो 1975 में मात्र 2.5 एमएमटीपीए थी, अब 8 एमएमटीपीए तक पहुँच चुकी है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस रिफाइनरी ने 8.5 मिलियन टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया।

गौरतलब है कि अशोकनगर में 2018 में हुई तेल खोज अब व्यावसायिक उत्पादन के चरण में पहुँच चुकी है। ओएनजीसी (ONGC) द्वारा लगभग ₹1,000 करोड़ के निवेश के बाद उत्पादित पहली कच्चे तेल की खेप अगस्त 2026 में हल्दिया पहुँची — जिसे पुरी ने पश्चिम बंगाल की ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती भूमिका का प्रमाण बताया।

आगे की राह

पुरी ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता, रणनीतिक भंडारण, रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार और बुनियादी ढाँचे में निवेश — ये चार स्तंभ आगे भी भारत की ऊर्जा नीति की रीढ़ बने रहेंगे। उनके अनुसार यही रणनीति भविष्य में देश की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों और आर्थिक विकास की दीर्घकालिक माँगों को पूरा करने में सक्षम सिद्ध होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोगुने एलपीजी टर्मिनल, बढ़ी रिफाइनिंग क्षमता — लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह विविधीकरण वास्तव में कीमत-जोखिम को कम कर पाया या केवल आपूर्ति-निरंतरता को। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल पर भारत की बढ़ी निर्भरता ने सस्ती दरें दिलाईं, किंतु एकाग्रता-जोखिम भी पैदा किया — जो 'विविधीकरण' की कहानी से मेल नहीं खाता। खुदरा ईंधन कीमतों को 'नियंत्रित' बताना उन उपभोक्ताओं के लिए अधूरा सच है जिन्होंने 2022-23 में पेट्रोल-डीजल पर ऊँची दरें चुकाईं। ऊर्जा सुरक्षा की असली कसौटी तब होगी जब वैश्विक संकट गहरा हो और विकल्प सीमित — तब तक यह तैयारी उत्साहजनक है, पूर्ण नहीं।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरदीप पुरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के बारे में क्या कहा?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 28 सितंबर 2026 को कहा कि भू-राजनीतिक संकटों के बावजूद भारत ने ऊर्जा आपूर्ति स्थिर बनाए रखी है। उन्होंने इसे पिछले एक दशक की रणनीतिक तैयारियों और मोदी सरकार की ऊर्जा कूटनीति का परिणाम बताया।
भारत कितने देशों से कच्चे तेल का आयात करता है?
पुरी के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भारत ने कच्चे तेल के आयात स्रोत 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक विस्तारित किए हैं। यह विविधीकरण किसी एकल स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कितना है?
भारत ने 5.33 मिलियन टन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किया है। यह भंडार आपातकालीन स्थितियों या आपूर्ति व्यवधानों के दौरान देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रखा जाता है।
पश्चिम बंगाल में तेल-गैस क्षेत्र की क्या स्थिति है?
पश्चिम बंगाल में इस समय ₹17,600 करोड़ की तेल एवं गैस परियोजनाएँ चल रही हैं। हल्दिया रिफाइनरी की क्षमता 8 एमएमटीपीए हो चुकी है और ONGC की अशोकनगर खोज से पहली कच्चे तेल की खेप अगस्त 2026 में हल्दिया पहुँची।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता में कितनी वृद्धि हुई है?
पिछले एक दशक में भारत की रिफाइनिंग क्षमता 215 एमएमटीपीए से बढ़कर 267 एमएमटीपीए हो गई है। इसके साथ ही एलपीजी आयात टर्मिनलों की संख्या 11 से बढ़कर 22 और ईंधन आउटलेट्स 52,000 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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