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ट्रंप का दावा: ईरानी जलमार्गों पर जल्द होगा अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण, परमाणु हथियार कभी नहीं मिलेंगे

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ट्रंप का दावा: ईरानी जलमार्गों पर जल्द होगा अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण, परमाणु हथियार कभी नहीं मिलेंगे

सारांश

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान के रणनीतिक जलमार्गों पर 'लगभग नियंत्रण' में है और शीघ्र पूर्ण नियंत्रण होगा। बी-2 बॉम्बर हमले का बचाव करते हुए कहा — ईरान परमाणु हथियार से सिर्फ दो हफ्ते दूर था। अमेरिकियों को ऊर्जा कीमतें बढ़ने की चेतावनी भी दी।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान के रणनीतिक जलमार्गों पर 'लगभग नियंत्रण' में है और जल्द पूर्ण नियंत्रण होगा।
ट्रंप ने बी-2 बॉम्बर से ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमले का बचाव किया; दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार से सिर्फ दो हफ्ते दूर था।
ट्रंप के अनुसार ईरान की नौसेना, वायुसेना और नेतृत्व 'काफी कमजोर' हो चुके हैं; मिसाइल-ड्रोन निर्माण क्षमता में भारी गिरावट।
अमेरिकी उपभोक्ताओं को पेट्रोल और ऊर्जा की बढ़ी कीमतों की चेतावनी; ट्रंप ने इसे 'उचित कीमत' बताया।
इज़रायल, सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत और बहरीन को ईरानी परमाणु खतरे से बचाने का दावा।
इंटरव्यू 77 WABC रेडियो पर प्रसारित; पूर्व वकील माइकल कोहेन को दिया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 अगस्त को दावा किया कि अमेरिका ईरान से जुड़े रणनीतिक समुद्री जलमार्गों पर 'लगभग नियंत्रण' स्थापित कर चुका है और शीघ्र ही पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लेगा। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी।

इंटरव्यू में ट्रंप के प्रमुख बयान

77 WABC रेडियो पर प्रसारित एक इंटरव्यू में — जो उनके पूर्व निजी वकील माइकल कोहेन को दिया गया था — ट्रंप ने कहा, 'अब ईरान के मामले में, उनके पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा। हम इन जलमार्गों पर लगभग नियंत्रण रख रहे हैं और जल्द ही पूरी तरह नियंत्रण में होंगे। ईरान के मामले में हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।' उल्लेखनीय है कि उन्होंने किसी विशेष जलमार्ग का नाम नहीं लिया।

यह ऐसे समय में आया है जब माइकल कोहेन — जो कई वर्षों तक ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे और बाद में उनके प्रमुख आलोचक बन गए तथा उनके खिलाफ गवाही भी दी — के साथ यह साक्षात्कार आयोजित किया गया।

ईरान की सैन्य क्षमता पर दावे

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और नेतृत्व को 'काफी कमजोर' कर दिया गया है। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता 'पूरी तरह नष्ट' हो चुकी है और उसने मिसाइल तथा ड्रोन निर्माण की अपनी बड़ी क्षमता खो दी है। उन्होंने बी-2 बॉम्बर से ईरान की परमाणु सुविधाओं पर किए गए हमले का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान देर रात चलाया गया और 'हर बम अपने लक्ष्य पर सटीक तरीके से लगा।'

ट्रंप ने कहा, 'जब हमने बी-2 बॉम्बर से हमला किया, तब वे परमाणु हथियार हासिल करने से सिर्फ दो हफ्ते दूर थे। यही वजह थी कि मुझे यह कदम उठाना पड़ा क्योंकि आप उन्हें इस तरह का हथियार नहीं रखने दे सकते।'

नेतृत्व संकट और समझौते की कठिनाई

ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान में नेतृत्व की अनिश्चितता के कारण किसी समझौते तक पहुँचना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा, 'समस्या का एक हिस्सा यह है कि उनके कई नेता अब नहीं रहे। ऐसे में कोई समझौता करना आसान नहीं है। किसी को ठीक से पता ही नहीं है कि नेतृत्व कौन कर रहा है।' उन्होंने बढ़ती महंगाई, कमजोर होती मुद्रा और सैन्य कर्मियों को वेतन न मिलने को तेहरान पर बढ़ते दबाव के संकेत बताया।

अमेरिकी उपभोक्ताओं पर आर्थिक असर

ट्रंप ने माना कि इस सैन्य संघर्ष के कारण अमेरिकी नागरिकों को पेट्रोल और ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'मैं लोगों से कहता हूं कि आपकी ऊर्जा की लागत थोड़ी बढ़ सकती है, पेट्रोल भी थोड़ा महंगा हो सकता है। हमें मध्य पूर्व में कदम उठाने होंगे, क्योंकि हम ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते।' उनके अनुसार, यह कीमत चुकाना उचित है।

मध्य पूर्व और इज़रायल पर ट्रंप का दृष्टिकोण

ट्रंप ने दावा किया कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार आ जाते, तो वह इज़रायल और मध्य पूर्व के अन्य देशों — सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और बहरीन — पर हमला कर सकता था। उन्होंने कहा, 'अगर डोनाल्ड ट्रंप नहीं होते, तो इज़रायल भी नहीं होता।' इसके अलावा उन्होंने टैरिफ नीति का भी बचाव किया और ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, दवा तथा मेडिकल उपकरण उत्पादन के अमेरिका वापस लौटने को 'पुनर्जागरण' की संज्ञा दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन किसी विशेष जलमार्ग का नाम न लेना इस बयान की सटीकता पर सवाल खड़े करता है — होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में 'नियंत्रण' का दावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत गहरे निहितार्थ रखता है। ईरानी नेतृत्व के 'अनुपस्थित' होने की स्वीकारोक्ति एक विरोधाभास उजागर करती है — यदि वार्ता के लिए कोई नहीं बचा, तो 'जल्द समझौते' की उम्मीद किस आधार पर है? अमेरिकी उपभोक्ताओं को ऊर्जा कीमतें बढ़ने की चेतावनी घरेलू राजनीति में नई जटिलताएँ पैदा कर सकती है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरानी जलमार्गों पर नियंत्रण के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने 77 WABC रेडियो पर दिए इंटरव्यू में दावा किया कि अमेरिका ईरान से जुड़े रणनीतिक जलमार्गों पर 'लगभग नियंत्रण' रखे हुए है और जल्द ही पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लेगा। हालांकि उन्होंने किसी विशेष जलमार्ग का नाम नहीं लिया।
ट्रंप ने बी-2 बॉम्बर हमले का बचाव क्यों किया?
ट्रंप ने कहा कि हमले के समय ईरान परमाणु हथियार हासिल करने से केवल दो हफ्ते दूर था, इसलिए यह कदम अनिवार्य था। उनके अनुसार हर बम अपने लक्ष्य पर सटीक तरीके से लगा और अभियान देर रात चलाया गया था।
क्या अमेरिकियों को ऊर्जा की बढ़ी कीमतों का सामना करना पड़ेगा?
ट्रंप ने स्वयं माना कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के कारण अमेरिकी उपभोक्ताओं को पेट्रोल और ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतें चुकानी पड़ सकती हैं। उन्होंने इसे ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखने के लिए 'उचित कीमत' बताया।
ट्रंप के अनुसार ईरान की वर्तमान सैन्य स्थिति क्या है?
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और नेतृत्व को काफी कमजोर कर दिया गया है और सैन्य क्षमता 'पूरी तरह नष्ट' हो चुकी है। उनके अनुसार ईरान ने मिसाइल और ड्रोन बनाने की अपनी बड़ी क्षमता खो दी है और वहाँ बढ़ती महंगाई, कमजोर मुद्रा और सैन्य वेतन संकट जैसी समस्याएँ हैं।
माइकल कोहेन कौन हैं और ट्रंप से उनका क्या संबंध है?
माइकल कोहेन कई वर्षों तक ट्रंप के निजी वकील और करीबी सहयोगी रहे। बाद में दोनों के बीच सार्वजनिक रूप से गंभीर मतभेद हो गए और कोहेन ट्रंप के खिलाफ गवाह बने तथा उनके प्रमुख आलोचकों में शामिल हो गए।
राष्ट्र प्रेस
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