ट्रंप का दावा: ईरानी जलमार्गों पर जल्द होगा अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण, परमाणु हथियार कभी नहीं मिलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 अगस्त को दावा किया कि अमेरिका ईरान से जुड़े रणनीतिक समुद्री जलमार्गों पर 'लगभग नियंत्रण' स्थापित कर चुका है और शीघ्र ही पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लेगा। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी।
इंटरव्यू में ट्रंप के प्रमुख बयान
77 WABC रेडियो पर प्रसारित एक इंटरव्यू में — जो उनके पूर्व निजी वकील माइकल कोहेन को दिया गया था — ट्रंप ने कहा, 'अब ईरान के मामले में, उनके पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा। हम इन जलमार्गों पर लगभग नियंत्रण रख रहे हैं और जल्द ही पूरी तरह नियंत्रण में होंगे। ईरान के मामले में हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।' उल्लेखनीय है कि उन्होंने किसी विशेष जलमार्ग का नाम नहीं लिया।
यह ऐसे समय में आया है जब माइकल कोहेन — जो कई वर्षों तक ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे और बाद में उनके प्रमुख आलोचक बन गए तथा उनके खिलाफ गवाही भी दी — के साथ यह साक्षात्कार आयोजित किया गया।
ईरान की सैन्य क्षमता पर दावे
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और नेतृत्व को 'काफी कमजोर' कर दिया गया है। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता 'पूरी तरह नष्ट' हो चुकी है और उसने मिसाइल तथा ड्रोन निर्माण की अपनी बड़ी क्षमता खो दी है। उन्होंने बी-2 बॉम्बर से ईरान की परमाणु सुविधाओं पर किए गए हमले का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान देर रात चलाया गया और 'हर बम अपने लक्ष्य पर सटीक तरीके से लगा।'
ट्रंप ने कहा, 'जब हमने बी-2 बॉम्बर से हमला किया, तब वे परमाणु हथियार हासिल करने से सिर्फ दो हफ्ते दूर थे। यही वजह थी कि मुझे यह कदम उठाना पड़ा क्योंकि आप उन्हें इस तरह का हथियार नहीं रखने दे सकते।'
नेतृत्व संकट और समझौते की कठिनाई
ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान में नेतृत्व की अनिश्चितता के कारण किसी समझौते तक पहुँचना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा, 'समस्या का एक हिस्सा यह है कि उनके कई नेता अब नहीं रहे। ऐसे में कोई समझौता करना आसान नहीं है। किसी को ठीक से पता ही नहीं है कि नेतृत्व कौन कर रहा है।' उन्होंने बढ़ती महंगाई, कमजोर होती मुद्रा और सैन्य कर्मियों को वेतन न मिलने को तेहरान पर बढ़ते दबाव के संकेत बताया।
अमेरिकी उपभोक्ताओं पर आर्थिक असर
ट्रंप ने माना कि इस सैन्य संघर्ष के कारण अमेरिकी नागरिकों को पेट्रोल और ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'मैं लोगों से कहता हूं कि आपकी ऊर्जा की लागत थोड़ी बढ़ सकती है, पेट्रोल भी थोड़ा महंगा हो सकता है। हमें मध्य पूर्व में कदम उठाने होंगे, क्योंकि हम ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते।' उनके अनुसार, यह कीमत चुकाना उचित है।
मध्य पूर्व और इज़रायल पर ट्रंप का दृष्टिकोण
ट्रंप ने दावा किया कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार आ जाते, तो वह इज़रायल और मध्य पूर्व के अन्य देशों — सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और बहरीन — पर हमला कर सकता था। उन्होंने कहा, 'अगर डोनाल्ड ट्रंप नहीं होते, तो इज़रायल भी नहीं होता।' इसके अलावा उन्होंने टैरिफ नीति का भी बचाव किया और ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, दवा तथा मेडिकल उपकरण उत्पादन के अमेरिका वापस लौटने को 'पुनर्जागरण' की संज्ञा दी।