ईरान परमाणु समझौते को मंजूरी में लग सकते हैं कुछ दिन, ट्रंप बोले — 'जल्दबाजी नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 25 मई 2025 को संकेत दिया कि ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता में समझौते को ईरानी नेतृत्व की औपचारिक मंजूरी मिलने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत अभी पूरी तरह अंतिम रूप नहीं ले पाई है और यह डील टूटने की संभावना भी बनी हुई है।
वार्ता की मौजूदा स्थिति
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस को उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालाँकि, अधिकारियों ने स्वीकार किया कि वार्ता अभी 'फाइनल' नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह संभावित समझौता दीर्घकालिक स्थायित्व वाला होगा या नहीं, और क्या इसमें अमेरिका की परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी माँगों का समाधान निकलेगा।
ट्रंप की चेतावनी — 'समय हमारे पक्ष में'
रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि वे 'जल्दबाजी में कोई समझौता न करें', यह कहते हुए कि 'समय हमारे पक्ष में है।' उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "दोनों पक्षों को समय लेना चाहिए और सही तरीके से फैसला करना चाहिए।" ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी पाबंदियाँ तब तक पूरी तरह लागू रहेंगी, जब तक कोई समझौता आधिकारिक रूप से तय होकर हस्ताक्षरित नहीं हो जाता।
ओबामा-युग के समझौते पर तीखी आलोचना
ट्रंप ने मौजूदा वार्ता का बचाव करते हुए 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए ईरान परमाणु समझौते की कड़ी आलोचना की। 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में उन्होंने उस समझौते को 'अमेरिकी इतिहास के सबसे खराब समझौतों में से एक' बताया और आरोप लगाया कि उसने ईरान को परमाणु हथियार बनाने की 'सीधी राह' दी। ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन जो समझौता कर रहा है, वह उस पुराने समझौते के 'बिल्कुल विपरीत' है।
क्षेत्रीय समझौते की रूपरेखा
ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान और कई मध्य-पूर्वी देशों के बीच एक बड़ा क्षेत्रीय समझौता लगभग तैयार हो चुका है। उन्होंने खुलासा किया कि इस मुद्दे पर उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं से बातचीत की है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं।
आगे क्या होगा
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, समझौते की अंतिम रूपरेखा और उस पर ईरानी नेतृत्व की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। विश्लेषकों का मानना है कि परमाणु कार्यक्रम पर ईरान की शर्तें और अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत की माँग इस वार्ता के सबसे जटिल बिंदु बने हुए हैं। यदि समझौता सफल होता है, तो यह मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।