ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता में नई अड़चन: ट्रंप चाहते हैं सख्त शर्तें, तेहरान भी ड्राफ्ट में बदलाव की तैयारी में
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता एक नए पेचीदे मोड़ पर पहुँच गई है। 1 जून 2026 को अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, व्हाइट हाउस मौजूदा समझौते के मसौदे में कई अहम संशोधन करना चाहता है, जबकि तेहरान भी अपनी ओर से नई शर्तें जोड़ने की तैयारी में है। इस दोतरफा संशोधन प्रक्रिया ने वार्ता को और लंबा खींचने के संकेत दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस फिलहाल ईरान की नई प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है और आशंका जताई जा रही है कि यह बातचीत फिर से शुरुआती और कठिन स्थिति में लौट सकती है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप 60 प्रतिशत तक समृद्ध किए गए यूरेनियम के भंडार को लेकर अधिक स्पष्ट और कड़े नियम चाहते हैं, जो अभी ईरान के पास हैं। इसके अलावा वह होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री व्यापार के लिए पुनः खोलने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करवाना चाहते हैं।
एक अधिकारी के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रंप वार्ता को तेज करने और दबाव बढ़ाकर समझौता जल्द से जल्द करने के इच्छुक हैं। हालाँकि, उन्हें ईरान की जटिल सत्ता संरचना से भी जूझना पड़ रहा है, जिसमें किसी भी अंतिम समझौते की मंजूरी सर्वोच्च नेता के पास होती है।
मौजूदा ड्राफ्ट में क्या है
वर्तमान मसौदे के अनुसार, ईरान यह स्वीकार करने को तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इसमें 60 दिनों की एक समय-सीमा भी निर्धारित है, जिसके भीतर दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संचित संवर्धित यूरेनियम के भविष्य पर बातचीत करेंगे। ट्रंप इस ड्राफ्ट में यह भी जोड़वाना चाहते हैं कि अमेरिका उस सामग्री को कब और किस तरह हासिल करेगा।
फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'मुझे बस यही गारंटी चाहिए कि परमाणु हथियार नहीं बनेंगे। उन्होंने यह मान लिया है।' उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में ईरान ने केवल परमाणु हथियार न बनाने की बात कही थी, लेकिन अब समझौते में यह भी शामिल किया गया है कि वे किसी भी तरह से परमाणु हथियार न तो बनाएंगे और न ही हासिल करेंगे। ट्रंप ने साथ ही कहा, 'उन लोगों से बातचीत करना बहुत मुश्किल है और इसमें समय लगता है, लेकिन मुझे जल्दी नहीं है।'
ईरान की अंदरूनी राजनीति और विभाजित स्वर
तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के नए प्रस्ताव के बाद ईरान भी समझौते के मसौदे में कुछ नए बदलाव जोड़ना चाहता है। यह ऐसे समय में आया है जब तेहरान में अलग-अलग नेताओं के बीच इस मुद्दे पर एकमत नहीं दिखती।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि अमेरिका के साथ 'बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान' अभी भी जारी है, लेकिन जब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तब तक कोई पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'इस समय जो भी बातें कही जा रही हैं, वे सिर्फ अटकलें हैं और उन्हें ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।'
अराघची के इस अपेक्षाकृत नरम रुख के विपरीत, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, 'जब तक हमें यह पूरी तरह भरोसा नहीं हो जाता कि ईरानी लोगों के अधिकार सुरक्षित हैं, हम किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देंगे।' गालिबाफ ने यह भी कहा कि कूटनीति से जुड़े लोग अमेरिका के वादों या बातों पर भरोसा नहीं करते।
राष्ट्रपति के इस्तीफे की अफवाह और सरकार का खंडन
इस बीच, लंदन स्थित ईरानी विपक्षी वेबसाइट 'ईरान इंटरनेशनल' से जुड़े एक सूत्र के हवाले से रिपोर्ट आई कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मोज्तबा खामेनेई को अपना इस्तीफा सौंपने का एक पत्र भेजा है। हालाँकि, ईरान सरकार ने इस खबर को तत्काल खारिज करते हुए इसे 'झूठी मीडिया रिपोर्ट' करार दिया। गौरतलब है कि इस अपुष्ट दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों के अनुसार, दोनों पक्षों की ओर से एक साथ संशोधन की कोशिश इस वार्ता को और जटिल बना सकती है। व्हाइट हाउस फिलहाल आशावादी बना हुआ है, लेकिन ईरान की आंतरिक सत्ता संरचना — जहाँ अंतिम निर्णय सर्वोच्च नेता का होता है — किसी भी त्वरित समाधान की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष 60 दिनों की निर्धारित समय-सीमा के भीतर किसी सहमति तक पहुँच पाते हैं।