27 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट में ECI का हलफनामा: तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत, CEC पर आरोप खारिज

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सुप्रीम कोर्ट में ECI का हलफनामा: तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत, CEC पर आरोप खारिज

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में साफ किया कि तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत थे और CEC पर एकतरफा फैसले के आरोप बेबुनियाद हैं। राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाओं के जवाब में दाखिल यह हलफनामा चुनावी संस्था की आंतरिक प्रक्रिया और पारदर्शिता की बहस को नई धार देता है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 26 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 के तीनों SIR आदेशों को सर्वसम्मत बताया।
CEC ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा निर्णय के आरोपों को आयोग ने गलत और निराधार करार दिया।
21 अक्टूबर 2026 से ऑनलाइन फॉर्म में फॉर्म 6 और SIR घोषणापत्र अलग-अलग दिखाए जाने लगे।
मैपिंग से छूटे मतदाताओं के लिए BLO घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे; व्यक्तिगत सुनवाई अनिवार्य नहीं।
IIT और IISc के विशेषज्ञों की समिति SIR नियम-अनुपालन की जाँच करेगी।
गोवा के 97 में से 88 मतदाता पहले से सूची में थे; 6 विदेश में , 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट ।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 26 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) आदेश आयोग के सर्वसम्मत निर्णय थे। यह हलफनामा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित 13 विपक्षी नेताओं की उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया, जिनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा निर्णय लेने के आरोप लगाए गए थे।

SIR आदेशों की सामूहिकता पर आयोग की दलील

हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया कि फाइल सिस्टम की प्रक्रिया के अनुसार, कोई भी फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और अंत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास जाती है। आयोग ने रेखांकित किया कि फाइल पर दर्ज नोट या प्रश्न अंतिम निर्णय नहीं होते — निर्णय तभी माने जाते हैं जब सभी आयुक्त सहमति दें।

आयोग ने 28 जुलाई के उस आदेश का भी उल्लेख किया जिसे अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा और 30 जुलाई को उनके संयुक्त निर्देश के बाद वह आदेश लागू नहीं हुआ — जो यह दर्शाता है कि आयोग के भीतर सामूहिक निर्णय प्रक्रिया कार्यशील है।

ऑनलाइन फॉर्म और SIR घोषणापत्र में बदलाव

आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन फॉर्म की बनावट देखकर यह भ्रम हो सकता था कि उसमें बदलाव किया गया है। इसे दूर करने के लिए 21 अक्टूबर 2026 से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म 6 और SIR घोषणापत्र को अलग-अलग दिखाया जाएगा — ठीक उसी तरह जैसा भौतिक फॉर्म में होता है। हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे केवल सरकार ही बदल सकती है।

मतदाता सूची और BLO की भूमिका

आयोग ने बताया कि जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं होगा। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) उनके घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे। सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में आयोजित होगी और जहाँ संभव होगा, ऑनलाइन कराई जाएगी।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ECI नेट पर किसी भी मतदाता का नाम निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश के बिना सूची में जोड़ा या हटाया नहीं जाता। नियमों के अनुपालन की जाँच के लिए IIT और IISc के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई है।

गोवा और पश्चिम बंगाल के विशेष मामले

गोवा के 97 मतदाताओं के संबंध में आयोग ने बताया कि उनमें से 88 पहले से मतदाता सूची में थे, 6 विदेश में निवास करते हैं और 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट हैं।

पश्चिम बंगाल की अपीलों के संदर्भ में आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के विरुद्ध जो अपीलें दायर की गई थीं, वे सीईओ, पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत दाखिल की थीं और ये मामले आयोग के समक्ष नहीं रखे गए थे।

याचिका की सुनवाई-योग्यता और आगे की राह

आयोग ने याचिका की सुनवाई-योग्यता पर भी सवाल उठाए। हलफनामे में कहा गया कि CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है, और याचिका मुख्यतः एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। आयोग ने यह भी कहा कि उसने किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया।

EVM को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आयोग ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार ऐसी याचिकाएँ खारिज कर चुका है। दशहरा अवकाश के कारण फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है और आयोग ने न्यायालय से विस्तृत, बिंदुवार जवाब दाखिल करने की अनुमति माँगी है। यह मामला चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल यह है कि क्या दोनों निर्वाचन आयुक्त निर्णय-निर्माण में वास्तविक रूप से भागीदार थे या केवल हस्ताक्षरकर्ता। 28 जुलाई का प्रकरण — जिसमें अतिरिक्त सचिव द्वारा जारी आदेश को आयुक्तों के हस्तक्षेप के बाद वापस लेना पड़ा — स्वयं बताता है कि संस्था के भीतर असंतुलन था। IIT-IISc समिति का गठन सकारात्मक है, लेकिन उसके जनादेश और स्वायत्तता की सीमा अभी अस्पष्ट है। मुख्यधारा की कवरेज हलफनामे के पक्ष-प्रतिपक्ष पर केंद्रित है; जो छूट रहा है वह है — SIR की वास्तविक ज़मीनी प्रभावशीलता का मूल्यांकन और यह प्रश्न कि क्या मतदाता सूची शुद्धि की प्रक्रिया में पात्र मतदाता भी बाहर हो रहे हैं।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ECI ने सुप्रीम कोर्ट में किस बारे में हलफनामा दाखिल किया?
भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 के तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत निर्णय थे। यह हलफनामा राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया जिनमें CEC पर एकतरफा फैसले का आरोप था।
CEC ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए गए थे?
विपक्षी याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार SIR से जुड़े निर्णय एकतरफा ले रहे हैं। ECI ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि याचिका मुख्यतः एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है और सभी निर्णय सामूहिक प्रक्रिया से लिए गए।
ऑनलाइन फॉर्म 6 में क्या बदलाव किया गया है?
आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है — इसे केवल सरकार बदल सकती है। 21 अक्टूबर 2026 से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म 6 और SIR घोषणापत्र को अलग-अलग प्रदर्शित किया जाने लगा है ताकि भ्रम दूर हो सके।
मैपिंग से छूटे मतदाताओं को क्या करना होगा?
आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है उन्हें सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है। BLO उनके घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और जहाँ संभव होगा सुनवाई ऑनलाइन आयोजित की जाएगी।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला क्या है?
आयोग ने बताया कि SIR प्रक्रिया में छूट गए 97 मतदाताओं में से 88 पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, 6 विदेश में निवास करते हैं और 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में एक प्रमुख बिंदु था।
राष्ट्र प्रेस
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