होर्मुज और लाल सागर में व्यवधान से भारतीय निर्यातकों-आयातकों की लाभप्रदता पर मंडरा रहा खतरा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर — दो सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्गों — पर संभावित व्यवधान भारतीय निर्यातकों और आयातकों की लाभप्रदता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। केयरएज रेटिंग्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो समुद्री बीमा प्रीमियम, मालभाड़ा और ट्रांजिट समय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सबसे कठिन स्थिति उन छोटे और मझोले उद्यमों (SMEs) की होगी, जिनके पास बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर स्थानांतरित करने की सीमित क्षमता है।
ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात के साथ-साथ एलएनजी और एलपीजी की बड़ी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर करती है। मई 2026 में होर्मुज में व्यवधान के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थी। यदि होर्मुज और लाल सागर, दोनों मार्गों पर एक साथ बाधा उत्पन्न होती है, तो ब्रेंट क्रूड 130 से 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकता है — जिससे महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति, दोनों पर एक साथ दबाव बनेगा।
मार्च 2026 से जारी संकट और भारत की प्रतिक्रिया
मार्च 2026 से जारी पश्चिम एशिया संघर्ष ने भारत के लिए अभूतपूर्व ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा की है। हालांकि रूस से कच्चे तेल की बढ़ती खरीद सहित विविध स्रोतों से आयात के कारण भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को अब तक सुरक्षित बनाए रखा है, लेकिन आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि यमन के हूती आंदोलन ने लाल सागर में समुद्री यातायात बाधित करने की चेतावनी दी है और सऊदी अरब के तेल जहाजों पर हमले भी किए हैं। कथित तौर पर ईरान ने हूतियों को निर्देश दिया है कि यदि अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण ढाँचे पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो वे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने की तैयारी करें।
बाब-अल-मंदेब: वैश्विक व्यापार की जीवन-रेखा दाँव पर
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य हिंद महासागर से लाल सागर में प्रवेश का एकमात्र समुद्री मार्ग है और यह स्वेज नहर से जुड़कर एशिया एवं यूरोप के बीच व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण गलियारा बनाता है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों एक साथ प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा आपूर्ति शृंखला और भारत की समग्र आर्थिक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है। यदि जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजना पड़ा, तो माल की डिलीवरी में 2 से 3 सप्ताह अतिरिक्त लग सकते हैं और परिवहन लागत में भी भारी वृद्धि होगी।
विशेषज्ञों की राय
केयरएज रेटिंग्स की सीनियर डायरेक्टर प्रीति अग्रवाल ने कहा, 'यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर दोनों कुछ सप्ताह के लिए भी बंद होते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। ऐसी स्थिति में ब्रेंट क्रूड 130 से 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकता है, जबकि एशिया और यूरोप में एलएनजी की आपूर्ति पर भी गंभीर दबाव पड़ेगा।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऊर्जा क्षेत्र के अलावा इन बाधाओं से समुद्री बीमा प्रीमियम, बंदरगाहों पर भीड़भाड़, जहाजों की यात्रा अवधि और वैश्विक सप्लाई चेन में मालभाड़ा लागत — सभी बढ़ेंगे।
केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर पुनीत कंसल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज व लाल सागर से जुड़े बढ़ते जोखिम भारतीय कंपनियों पर नया वित्तीय दबाव बना सकते हैं, जिससे कच्चे माल की लागत बढ़ेगी, सप्लाई चेन प्रभावित होगी और कंपनियों के परिचालन से होने वाले नकदी प्रवाह पर असर पड़ेगा।
SMEs पर सबसे भारी बोझ
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बड़ी कंपनियाँ अपनी मजबूत सौदेबाजी क्षमता और विविध आपूर्ति स्रोतों के कारण इस झटके को कुछ हद तक संभाल सकती हैं। लेकिन छोटे और मझोले उद्यम (SMEs), जिनके पास बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की सीमित क्षमता है, उन्हें मुनाफे में कमी, कार्यशील पूंजी की बढ़ती जरूरत और नकदी संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय SMEs पहले से ही घरेलू माँग में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। आने वाले हफ्तों में पश्चिम एशिया में कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रम यह तय करेगा कि यह जोखिम वास्तविक संकट में बदलता है या नहीं।