7 अक्टूबर 2026
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आईएमएफ की चेतावनी: तेल $100/बैरल, ऊर्जा कीमतें 2027 तक ऊंची रह सकती हैं

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आईएमएफ की चेतावनी: तेल $100/बैरल, ऊर्जा कीमतें 2027 तक ऊंची रह सकती हैं

सारांश

IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने सिंगापुर में चेतावनी दी कि खाड़ी संघर्ष थमने पर भी तेल $100/बैरल के करीब और ऊर्जा कीमतें 2027 तक ऊंची बनी रह सकती हैं। रिफाइनिंग क्षमता की कमी, होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा और सर्दियों की बढ़ती मांग — तीनों मिलकर एशिया और यूरोप के लिए एक कठिन सर्दी का संकेत दे रहे हैं।

मुख्य बातें

IMF ने 7 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें 2027 तक बनी रह सकती हैं।
तेल की कीमत अभी करीब $100 प्रति बैरल है; क्रैक स्प्रेड भी लगभग $100/बैरल तक पहुंचा।
होर्मुज स्ट्रेट पर खतरे के कारण LNG परिवहन सीमित; एशिया और यूरोप सबसे अधिक प्रभावित।
अमेरिका, जर्मनी और जापान की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड क्रमशः 2007 , 2009 और 1996 के बाद के उच्चतम स्तर पर।
IMF ने ऊर्जा संकट, AI विस्तार और रिकॉर्ड सरकारी कर्ज को वैश्विक अर्थव्यवस्था की तीन बड़ी चुनौतियाँ बताया।
अगले सप्ताह थाईलैंड में IMF-विश्व बैंक की वार्षिक बैठक; 191 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर शामिल होंगे।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 7 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष जल्द समाप्त होने पर भी ऊर्जा की ऊंची कीमतें 2027 तक बनी रह सकती हैं। सिंगापुर में दिए एक बयान में IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि तेल की कीमत अभी करीब $100 प्रति बैरल बनी हुई है और आपूर्ति-पक्ष के संरचनात्मक दबाव वैश्विक महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों को प्रभावित कर रहे हैं।

मौजूदा स्थिति और मूल कारण

जॉर्जीवा ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति बहाल होने की अनिश्चितता, परिवहन की ऊंची लागत और अन्य कारक मिलकर तेल की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि दबाव केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है — वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमता की संरचनात्मक कमी के कारण क्रैक स्प्रेड (कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों के मूल्य का अंतर) लगभग $100 प्रति बैरल तक पहुंच गया है।

इसका सीधा परिणाम डीजल और अन्य रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की रिकॉर्ड खुदरा कीमतों के रूप में दिख रहा है, जो उर्वरकों, खाद्य पदार्थों और प्रमुख औद्योगिक कच्चे माल की लागत को भी ऊपर खींच रही हैं।

होर्मुज स्ट्रेट और गैस आपूर्ति का संकट

खाड़ी क्षेत्र से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी गंभीर रूप से प्रभावित है। जब तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर खतरा बना हुआ है, LNG परिवहन के विकल्प सीमित रहेंगे। जॉर्जीवा के अनुसार इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग है, लेकिन एशिया और यूरोप विशेष रूप से प्रभावित हैं।

गौरतलब है कि आने वाले महीनों में उत्तरी गोलार्ध में ठंड बढ़ने से ऊर्जा की मांग और बढ़ेगी तथा देश अपने रणनीतिक भंडार फिर से भरने का प्रयास करेंगे, जिससे दबाव और तीव्र हो सकता है।

बॉन्ड यील्ड और वित्तीय बाजारों पर असर

ऊर्जा की ऊंची कीमतों से महंगाई, ब्याज दरों और प्रमुख सरकारी बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ रहा है। जॉर्जीवा ने बताया कि अमेरिका, जर्मनी और जापान की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड इस साल काफी बढ़ी हैं और क्रमशः 2007, 2009 और 1996 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई के दबाव और कमजोर आर्थिक वृद्धि का सामना कर रही है।

IMF की तीन बड़ी वैश्विक चुनौतियाँ

IMF के अनुसार, ऊर्जा संकट उन तीन प्रमुख ताकतों में से एक है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। बाकी दो हैं — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से विस्तार और सरकारी कर्ज का रिकॉर्ड स्तर। जॉर्जीवा ने यह भी जोड़ा कि अल नीनो खाद्य सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।

यह चेतावनी थाईलैंड में अगले सप्ताह होने वाली IMF-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों से पहले आई है, जिनमें IMF के 191 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर शामिल होंगे। वैश्विक नीति-निर्माताओं की यह बैठक ऊर्जा संकट के संदर्भ में असाधारण महत्व रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और रूस से रियायती तेल के सौदे इस झटके को पर्याप्त रूप से अवशोषित कर सकते हैं — और कब तक।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएमएफ ने 2027 तक ऊंची ऊर्जा कीमतों की चेतावनी क्यों दी?
IMF के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति की अनिश्चितता, वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता की संरचनात्मक कमी और होर्मुज स्ट्रेट पर LNG परिवहन के जोखिम मिलकर ऊर्जा कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख रहे हैं। यही कारण है कि केवल युद्धविराम से स्थिति तुरंत नहीं बदलेगी।
तेल की मौजूदा कीमत क्या है और इसका असर क्या है?
IMF के अनुसार तेल की कीमत अभी करीब $100 प्रति बैरल है। इसका असर डीजल और रिफाइंड उत्पादों की रिकॉर्ड खुदरा कीमतों, उर्वरकों, खाद्य पदार्थों और औद्योगिक कच्चे माल की महंगाई के रूप में दिख रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट का ऊर्जा संकट से क्या संबंध है?
होर्मुज स्ट्रेट वह जलमार्ग है जिससे खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा तेल और LNG निर्यात करता है। जब तक इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही का खतरा बना है, तब तक LNG परिवहन के विकल्प सीमित रहेंगे और एशिया तथा यूरोप को गैस की ऊंची कीमतें चुकानी पड़ेंगी।
इस ऊर्जा संकट का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए $100/बैरल की कीमत सीधे पेट्रोल-डीजल, उर्वरक और खाद्य महंगाई को प्रभावित करती है। IMF के अनुसार एशिया विशेष रूप से प्रभावित है, जिससे भारत के चालू खाता घाटे और खुदरा मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ सकता है।
IMF-विश्व बैंक की अगली बैठक कब और कहाँ होगी?
IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक अगले सप्ताह थाईलैंड में होनी है, जिसमें IMF के 191 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर शामिल होंगे। इस बैठक में ऊर्जा संकट प्रमुख एजेंडे पर रहने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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