आईएमएफ प्रमुख जॉर्जीवा की चेतावनी: मध्य पूर्व संघर्ष 2027 तक जारी रहा तो तेल $125/बैरल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
सारांश
मुख्य बातें
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने 4 मई 2026 को अमेरिकी थिंक टैंक मिल्केन इंस्टीट्यूट के सम्मेलन में चेतावनी दी कि यदि मध्य पूर्व संघर्ष 2027 तक जारी रहता है और तेल की कीमतें $125 प्रति बैरल के करीब पहुँच जाती हैं, तो वैश्विक कीमतों और आर्थिक विकास पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और भी गंभीर हो जाएंगे। जॉर्जीवा के अनुसार, ऐसी स्थिति में मुद्रास्फीति अनियंत्रित हो सकती है और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
पुराने पूर्वानुमान अब तर्कसंगत नहीं
जॉर्जीवा ने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण आईएमएफ के पहले के अनुमान — इस वर्ष 3.1% वैश्विक आर्थिक विकास और 4.4% मुद्रास्फीति दर — अब उचित नहीं रह गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई केंद्रीय बैंक पहले से ही ब्याज दरों को लेकर नाज़ुक संतुलन बनाए हुए हैं।
गौरतलब है कि आईएमएफ नियमित रूप से अपने विश्व आर्थिक आउटलुक में पूर्वानुमानों को संशोधित करता है, लेकिन किसी एकल भू-राजनीतिक संघर्ष को आधार बनाकर इस प्रकार की सार्वजनिक चेतावनी असाधारण मानी जाती है।
तेल कीमतें और मुद्रास्फीति का खतरा
जॉर्जीवा ने रेखांकित किया कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें $125 प्रति बैरल तक पहुँचती हैं, तो मुद्रास्फीति की दीर्घकालिक उम्मीदें — जो अभी तक स्थिर बनी हुई हैं — अनिवार्य रूप से अनियंत्रित हो जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल वित्तीय स्थितियाँ सख्त नहीं हुई हैं, लेकिन संघर्ष जारी रहने पर यह तस्वीर बदल सकती है।
भारत जैसे तेल-आयातक देशों के लिए यह परिदृश्य विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊँची कीमतें चालू खाते के घाटे, रुपये की विनिमय दर और घरेलू महँगाई पर सीधा दबाव डालती हैं।
भू-राजनीतिक संदर्भ
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। आईएमएफ की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व और यूरोपीय केंद्रीय बैंक दोनों ही मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दरों पर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, तेल की कीमतों में तेज उछाल वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की दर-कटौती योजनाओं को पटरी से उतार सकता है।
आगे की राह
आईएमएफ ने संकेत दिया है कि वह स्थिति की निगरानी जारी रखेगा और आवश्यकतानुसार अपने पूर्वानुमानों को अद्यतन करेगा। जॉर्जीवा की यह टिप्पणी वैश्विक नीति-निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करना न केवल मानवीय, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अनिवार्य हो गया है।