होर्मुज जलडमरूमध्य बंद: ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेत कूपर की चेतावनी, 4.5 करोड़ लोग खाद्य संकट की कगार पर
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेत कूपर ने 19 मई 2026 को ग्लोबल पार्टनरशिप्स कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से दुनिया एक गंभीर वैश्विक खाद्य संकट की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देश उर्वरक के प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता हैं और ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण समुद्री आवागमन बाधित होने से खाद्य सुरक्षा पर दूरगामी असर पड़ सकता है।
कूपर की चेतावनी: मुख्य बातें
कूपर ने विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की पहली तिमाही के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यदि ईरान संघर्ष 2026 के मध्य तक समाप्त नहीं हुआ, तो अतिरिक्त 4.5 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'दुनिया एक वैश्विक खाद्य संकट की तरफ बढ़ रही है। हम यह जोखिम नहीं उठा सकते कि एक देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को बाधित कर दे और इसकी वजह से करोड़ों लोग भूखे रहने को मजबूर हो जाएं।'
उन्होंने आरोप लगाया कि होर्मुज को बंद रखने से वैश्विक खाद्य और ईंधन आपूर्ति दोनों पर असर पड़ रहा है, जिससे जीवनयापन की लागत में भी वृद्धि हो रही है।
ब्रिटेन की माँग और बहुराष्ट्रीय मिशन
ब्रिटेन ने इस जलमार्ग को तुरंत और बिना किसी रोक-टोक के खोलने की माँग दोहराई है। साथ ही 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मल्टीनेशनल मिशन' को आगे बढ़ाने की बात कही है, ताकि समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कूपर ने स्पष्ट किया कि यह संकट केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं है — विकसित देश, और निजी व सार्वजनिक दोनों क्षेत्र इससे प्रभावित हो रहे हैं।
उर्वरक और खाद्य कीमतों पर असर
विश्व बैंक के आँकड़ों के अनुसार, फरवरी से मार्च 2026 के बीच उर्वरकों की कीमतों में तेज उछाल आया है। विशेष रूप से यूरिया की कीमतों में एक महीने में लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और पहले से ऊँचे उत्पादन खर्च बताए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा कीमतों में झटके और व्यापारिक मार्गों में बाधा से आगामी महीनों में खाद्य कीमतों में और तेज वृद्धि हो सकती है।
अफ्रीका सहित वैश्विक खाद्य असुरक्षा की स्थिति
मार्च 2026 की तिमाही खाद्य सुरक्षा रिपोर्ट में अंदेशा जताया गया था कि मध्य पूर्व संघर्ष जारी रहा तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में 8.7 करोड़ से अधिक लोग पहले से ही भूख का सामना कर रहे हैं, जबकि पश्चिमी और मध्य अफ्रीका में 2026 के मध्य तक लगभग 5.2 करोड़ लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझने की आशंका है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संघर्ष और जलवायु संकट अभी भी दुनिया के कई क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा के सबसे बड़े कारण बने हुए हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश में है। WFP के अनुमान और FAO की चेतावनियाँ मिलकर यह संकेत दे रही हैं कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर दीर्घकालिक दबाव और बढ़ेगा।