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होर्मुज बंदी से 4.5 करोड़ लोगों पर भुखमरी का खतरा, यूएन ने दी गंभीर चेतावनी

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होर्मुज बंदी से 4.5 करोड़ लोगों पर भुखमरी का खतरा, यूएन ने दी गंभीर चेतावनी

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक उर्वरक संकट गहराया। यूएनओपीएस ने चेताया कि 4.5 करोड़ लोग भुखमरी की कगार पर आ सकते हैं। यूरिया 65% और अमोनिया 40% महंगी हुई। यूएन ने इमरजेंसी टास्क फोर्स बनाई और दुनिया से तत्काल कूटनीतिक कदम उठाने की अपील की।

मुख्य बातें

यूएनओपीएस ने चेताया कि होर्मुज स्ट्रेट बंदी से 4.5 करोड़ लोग भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं।
यूरिया की कीमत 65% और अमोनिया की कीमत 40% बढ़ गई है, जिससे वैश्विक उर्वरक बाजार में भारी उथल-पुथल है।
सूडान, सोमालिया और मोजाम्बिक इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित देश हैं।
यूएनओपीएस कार्यकारी निदेशक जॉर्ज मोरेइरा दा सिल्वा ने तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज से उर्वरकों के आपातकालीन मार्ग के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया।
उर्वरक कच्चे माल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, जिसका असर खेती की लागत और खाद्य कीमतों पर पड़ेगा।

नई दिल्ली/कोपेनहेगन, 26 अप्रैल। संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज स्ट्रेट की बंदी को लेकर दुनिया को गंभीर चेतावनी दी है। यूएन प्रोजेक्ट सर्विसेज कार्यालय (यूएनओपीएस) के अनुसार यदि इस जलमार्ग से उर्वरक आपूर्ति शीघ्र बहाल नहीं हुई, तो 4.5 करोड़ (45 मिलियन) लोग भुखमरी और खाद्य असुरक्षा की चपेट में आ सकते हैं। यह संकट महज एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि इसके वैश्विक मानवीय दुष्परिणाम हो सकते हैं।

यूएनओपीएस की चेतावनी — आंकड़े क्या कहते हैं?

यूएनओपीएस ने अपने आधिकारिक एक्स (X) पोस्ट में आंकड़ों सहित यह चेतावनी जारी की। इसके साथ मीडिया संस्थान अल जजीरा को दिए गए एक वीडियो साक्षात्कार का क्लिप भी साझा किया गया।

संस्था के कार्यकारी निदेशक जॉर्ज मोरेइरा दा सिल्वा ने स्पष्ट कहा कि यदि किसानों को बुआई के इस महत्वपूर्ण मौसम में आवश्यक उर्वरक नहीं मिले, तो खाद्य उत्पादन में भारी गिरावट आएगी और लाखों परिवार भूख के संकट में फंस जाएंगे।

उर्वरक बाजार में भारी उथल-पुथल

होर्मुज स्ट्रेट की बंदी का सबसे तात्कालिक असर वैश्विक उर्वरक बाजार पर पड़ा है। यूरिया की कीमत 65 प्रतिशत और अमोनिया की कीमत 40 प्रतिशत तक उछल चुकी है।

जॉर्ज मोरेइरा दा सिल्वा के अनुसार समस्या केवल तैयार खाद की उपलब्धता तक सीमित नहीं है — उर्वरक निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इसका सीधा प्रभाव खेती की लागत, फसल उत्पादन और अंततः खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा।

गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल उर्वरक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। खाड़ी देश — विशेष रूप से ओमान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात — वैश्विक उर्वरक निर्यात के प्रमुख स्रोत हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित देश कौन से हैं?

सूडान, सोमालिया और मोजाम्बिक जैसे देश, जो खाड़ी से उर्वरक आयात पर निर्भर हैं, इस संकट की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं। ये देश पहले से ही खाद्य असुरक्षा और गरीबी से जूझ रहे हैं — ऐसे में उर्वरक आपूर्ति बाधित होना इनके लिए दोहरी मुसीबत बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान उत्पन्न हुए वैश्विक उर्वरक संकट जैसा ही विनाशकारी हो सकता है, जब यूरिया और पोटाश की कीमतें आसमान छू गई थीं और कई अफ्रीकी व एशियाई देशों में खाद्य संकट गहरा गया था।

यूएन का टास्क फोर्स और कूटनीतिक अपील

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से उर्वरकों के आपातकालीन मार्ग (Emergency Passage) को सुनिश्चित करना है।

जॉर्ज मोरेइरा दा सिल्वा ने विश्व बिरादरी से तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए अब देरी करने का वक्त नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि भूख और अकाल का प्रभाव दीर्घकालिक होता है — एक फसल चक्र बर्बाद होने का असर अगले कई वर्षों तक महसूस किया जाता है।

व्यापक संदर्भ और भारत पर संभावित असर

यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया पहले से ही जलवायु परिवर्तन, बढ़ती महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव से जूझ रही है। भारत भी उर्वरक आयात के लिए आंशिक रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर है। यदि यह संकट लंबा खिंचा, तो भारतीय किसानों को भी उर्वरक की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

आने वाले हफ्तों में यूएन टास्क फोर्स की गतिविधियों और संबंधित देशों की कूटनीतिक प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर रहेगी। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो 2025 की खरीफ फसल पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा की नींव पर प्रहार है। विडंबना यह है कि जब दुनिया के शक्तिशाली देश इस जलमार्ग पर नियंत्रण की कूटनीति खेल रहे हैं, तब अफ्रीका और एशिया के करोड़ों गरीब किसान खाद के लिए तरस रहे हैं। यूएन की चेतावनी इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं — यह मानवीय अस्तित्व का सवाल बन चुका है। मुख्यधारा की कवरेज कीमतों के आंकड़ों पर रुक जाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि अगर एक फसल चक्र बर्बाद हुआ तो अगले दो-तीन साल की भूख किसकी जिम्मेदारी होगी?
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भुखमरी का खतरा क्यों बढ़ा?
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का बड़ा हिस्सा उर्वरक आयात करता है। इस मार्ग के बंद होने से उर्वरक आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे किसान फसल नहीं उगा पाएंगे और 4.5 करोड़ लोग भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं।
यूएनओपीएस ने होर्मुज संकट पर क्या कहा?
यूएनओपीएस के कार्यकारी निदेशक जॉर्ज मोरेइरा दा सिल्वा ने कहा कि उर्वरक सप्लाई में रुकावट वैश्विक मानवीय संकट को जन्म दे सकती है। उन्होंने तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप और इमरजेंसी टास्क फोर्स की जरूरत पर जोर दिया।
होर्मुज संकट से उर्वरक की कीमतें कितनी बढ़ीं?
यूरिया की कीमत 65 प्रतिशत और अमोनिया की कीमत 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। उर्वरक बनाने के कच्चे माल की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
होर्मुज स्ट्रेट संकट से कौन से देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
सूडान, सोमालिया और मोजाम्बिक जैसे देश सबसे अधिक प्रभावित हैं, जो खाड़ी देशों से उर्वरक आयात पर निर्भर हैं। ये देश पहले से खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए?
यूएन ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है जो होर्मुज स्ट्रेट से उर्वरकों के आपातकालीन मार्ग को सुनिश्चित करेगी। साथ ही विश्व बिरादरी से तत्काल कूटनीतिक कार्रवाई की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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