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भारत की विकास दर में वृद्धि के साथ एशिया-प्रशांत में चीन से आगे बढ़ने की संभावना: एडीबी रिपोर्ट

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भारत की विकास दर में वृद्धि के साथ एशिया-प्रशांत में चीन से आगे बढ़ने की संभावना: एडीबी रिपोर्ट

सारांश

भारत, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ग्रोथ की धीमी गति के बावजूद, अपनी मजबूत घरेलू खपत के चलते चीन से आगे निकलने के लिए तैयार है। एडीबी की रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर अगले कुछ वर्षों में बेहतर हो सकती है।

मुख्य बातें

भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भू-राजनीतिक तनाव से क्षेत्र की ग्रोथ प्रभावित हो रही है।
चीन की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में मजबूत बनी हुई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग में वृद्धि हो रही है।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक वृद्धि की गति में कमी आई है, फिर भी भारत इस क्षेत्र और चीन से आगे बढ़ने की दिशा में अग्रसर है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) द्वारा शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

एडीबी के विश्लेषण के अनुसार, विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के कारण पिछले वर्ष के 5.4 प्रतिशत से घटकर 2026 और 2027 में 5.1 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है।

इसके विपरीत, भारत की आर्थिक वृद्धि 2026 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो मजबूत घरेलू खपत के चलते 2027 में बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल और 2027 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ धीमी पड़ने की आशंका है, लेकिन भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।

एडीबी ने यह भी कहा कि यह क्षेत्र मजबूत घरेलू मांग, स्थिर श्रम बाजार और बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के चलते अभी भी बेहतर स्थिति में है, हालांकि जोखिम नीचे की ओर बने हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, "पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) में आर्थिक वृद्धि इस साल घटकर 4.6 प्रतिशत और अगले साल 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 5 प्रतिशत थी। इसके पीछे प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी और निर्यात में धीमापन मुख्य कारण हैं।"

एडीबी के प्रमुख अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने कहा कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष ऊर्जा और खाद्य कीमतों को बढ़ा सकता है और वित्तीय स्थितियों को और खराब कर सकता है, जो इस क्षेत्र के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक व्यापार नीतियों में लगातार उतार-चढ़ाव से भी क्षेत्र की ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि, मजबूत निजी खपत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को कुछ हद तक समर्थन मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, तेल की कीमतें फिलहाल ऊंची बनी रह सकती हैं, लेकिन अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले समय में इनमें स्थिरता आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेषकर जब अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाएं धीमी हो रही हैं। भारत की मजबूत घरेलू मांग और बढ़ती खपत इसे क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी बनाती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की आर्थिक वृद्धि दर कितनी है?
भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ग्रोथ की गति क्यों धीमी हो रही है?
यह भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के कारण हो रही है।
एडीबी की रिपोर्ट में भारत की स्थिति के बारे में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है जबकि अन्य अर्थव्यवस्थाएं धीमी पड़ रही हैं।
चीन की आर्थिक वृद्धि दर के बारे में जानकारी दें?
चीन में आर्थिक वृद्धि इस साल घटकर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्या असर होगा?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग से क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को समर्थन मिल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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