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जम्मू-कश्मीर: क्राइम ब्रांच ईओडब्ल्यू ने सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के ₹3.11 करोड़ गबन मामले में चार्जशीट दाखिल की

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जम्मू-कश्मीर: क्राइम ब्रांच ईओडब्ल्यू ने सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के ₹3.11 करोड़ गबन मामले में चार्जशीट दाखिल की

सारांश

जम्मू-कश्मीर की ईओडब्ल्यू ने बारामूला के सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में ₹3.11 करोड़ के गबन मामले में चार्जशीट दाखिल की। लंगेट शाखा के सेवानिवृत्त प्रबंधक समेत दो आरोपियों पर फर्जी ऋण और अवैध ओवरड्राफ्ट की साजिश का आरोप है।

मुख्य बातें

ईओडब्ल्यू कश्मीर ने 1 अगस्त 2026 को सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, बारामूला के ₹3.11 करोड़ गबन मामले में आरोप पत्र दाखिल किया।
आरोपी गुलाम मोहम्मद बेग (सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक, लंगेट) और अब्दुल हामिद गोजरी (कैशियर-कम-क्लर्क, राफियाबाद) पर धारा 420, 468, 471 और 120-बी आरपीसी के तहत मामला दर्ज।
आरोपियों ने फर्जी ऋण स्वीकृत करके और अधिकार-सीमा से परे ओवरड्राफ्ट देकर बैंक को ₹3.11 करोड़ का नुकसान पहुँचाया।
जाँच जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों की शिकायत पर शुरू हुई थी।
अपराध शाखा ने जनता से संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की सूचना एसएसपी, ईओडब्ल्यू कश्मीर को देने की अपील की।

जम्मू-कश्मीर अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 1 अगस्त 2026 को बारामूला स्थित सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में ₹3.11 करोड़ के गबन मामले में सक्षम न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया। जाँच में सामने आया कि बैंक की लंगेट शाखा के तत्कालीन प्रबंधक ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी ऋण स्वीकृत किए और अपने अधिकार से परे ओवरड्राफ्ट की अनुमति दी, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह जाँच जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के एक पत्र के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें बारामूला जिले में सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की विभिन्न शाखाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और गबन का आरोप लगाया गया था। गौरतलब है कि सहकारी बैंकों में इस प्रकार की धोखाधड़ी ग्रामीण और अर्ध-शहरी जमाकर्ताओं को सीधे प्रभावित करती है, जो इन संस्थाओं पर अपनी बचत के लिए निर्भर रहते हैं।

मुख्य आरोपी और धाराएँ

ईओडब्ल्यू कश्मीर ने धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित अपराधों के लिए धारा 420, 468, 471 और 120-बी आरपीसी के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। आरोपियों में गुलाम मोहम्मद बेग (सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक, लंगेट शाखा), निवासी केन्याल तारथपोरा, हंदवाड़ा; तथा अब्दुल हामिद गोजरी (कैशियर-कम-क्लर्क), निवासी गुंड करीम खान, राफियाबाद शामिल हैं।

धोखाधड़ी का तरीका

जाँच के अनुसार, आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी ऋण स्वीकृत करने और अधिकार-सीमा से परे ओवरड्राफ्ट देने का सिलसिला चलाया। इन धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देनों के कारण बैंक की कुल ₹3.11 करोड़ की धनराशि का गबन हुआ। अधिकारियों के अनुसार, आरोप पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर सिद्ध पाए गए हैं।

जनता के लिए सतर्कता की अपील

अपराध शाखा ने आम जनता से अनुरोध किया है कि वे आर्थिक धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना तत्काल एसएसपी, ईओडब्ल्यू कश्मीर को दें। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नियामकीय दबाव बढ़ रहा है।

आगे की कार्रवाई

आरोप पत्र सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है और अब मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। ईओडब्ल्यू ऐसे वित्तीय अपराधों की जाँच के लिए समर्पित तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करती है, जिससे अदालत में ठोस अभियोजन संभव हो सके। इस मामले का परिणाम जम्मू-कश्मीर के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में भविष्य की निगरानी व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में संस्थागत निगरानी को मजबूत किए बिना ऐसे मामले दोहराते रहेंगे। नियामकीय सुधार और रियल-टाइम ऑडिट तंत्र की माँग इस फैसले से कहीं अधिक ज़रूरी है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर के सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक गबन मामले में क्या हुआ?
बारामूला स्थित सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की लंगेट शाखा के तत्कालीन प्रबंधक और एक कैशियर ने मिलकर फर्जी ऋण स्वीकृत किए और अनधिकृत ओवरड्राफ्ट दिए, जिससे बैंक को ₹3.11 करोड़ का नुकसान हुआ। ईओडब्ल्यू कश्मीर ने 1 अगस्त 2026 को इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया।
इस मामले में किन आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की गई है?
आरोप पत्र में दो आरोपी हैं — गुलाम मोहम्मद बेग, सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक (निवासी केन्याल तारथपोरा, हंदवाड़ा) और अब्दुल हामिद गोजरी, कैशियर-कम-क्लर्क (निवासी गुंड करीम खान, राफियाबाद)। दोनों पर धारा 420, 468, 471 और 120-बी आरपीसी के तहत मामला दर्ज है।
ईओडब्ल्यू कश्मीर की जाँच कैसे शुरू हुई?
यह जाँच जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के एक पत्र के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें बारामूला की सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की विभिन्न शाखाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
आरोप पत्र सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है और मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में है। न्यायालय आरोपों पर सुनवाई करेगा और अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।
क्या जनता को इस तरह की बैंक धोखाधड़ी से बचने के लिए कोई सलाह दी गई है?
हाँ, अपराध शाखा ने जनता से अनुरोध किया है कि वे आर्थिक धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना एसएसपी, ईओडब्ल्यू कश्मीर को तुरंत दें।
राष्ट्र प्रेस
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