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सावन में बैजनाथ मंदिर के दर्शन करें: सीएम धामी की अपील, जानें कत्यूरी धाम का इतिहास

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सावन में बैजनाथ मंदिर के दर्शन करें: सीएम धामी की अपील, जानें कत्यूरी धाम का इतिहास

सारांश

सावन के दूसरे सोमवार पर सीएम धामी ने बैजनाथ धाम के दर्शन की अपील की। लगभग 1150 ईस्वी में कत्यूरी राजाओं द्वारा निर्मित यह मंदिर नागर शैली की वास्तुकला, 18 पत्थर-मंदिरों के समूह और शिव-पार्वती की एकसाथ पूजा के लिए अनूठा माना जाता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के दूसरे सोमवार पर एक्स पोस्ट के ज़रिए श्रद्धालुओं से बैजनाथ मंदिर के दर्शन की अपील की।
बैजनाथ मंदिर का निर्माण लगभग 1150 ईस्वी में कत्यूरी राजाओं ने करवाया था; तत्कालीन नाम कार्तिकेयपुर था।
यह 18 पत्थर-निर्मित मंदिरों का समूह है जिसमें शिव, पार्वती, गणेश, ब्रह्मा, सूर्य, कुबेर और गरुड़ के मंदिर शामिल हैं।
यहाँ शिव और पार्वती की एकसाथ पूजा होती है — यह विशेषता इसे देश के चुनिंदा मंदिरों में रखती है।
महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति (उत्तरायणी) पर यहाँ विशाल मेला लगता है।

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गोमती नदी के तट पर विराजमान बैजनाथ मंदिर सावन के पवित्र महीने में एक बार फिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर श्रद्धालुओं से इस प्राचीन शिव धाम के दर्शन करने की अपील की है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कत्यूरी राजवंश की अनुपम स्थापत्य कला का जीवंत साक्ष्य भी है।

सीएम धामी की अपील और एक्स पोस्ट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैजनाथ मंदिर का वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'बागेश्वर जनपद की पावन धरती पर स्थित श्री बैजनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित दिव्यता, आस्था और आध्यात्मिक विरासत का अद्भुत संगम है। कत्यूरी शासकों की अद्वितीय स्थापत्य कला से निर्मित यह प्राचीन धाम अपनी भव्य शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखता है।' उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे 'सावन के इस पवित्र महीने में बैजनाथ धाम के दर्शन कर देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करें।'

मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

बैजनाथ मंदिर का निर्माण लगभग 1150 ईस्वी में कत्यूरी राजाओं ने करवाया था। उस काल में यह स्थान कार्तिकेयपुर के नाम से जाना जाता था, जो कत्यूरी वंश की राजधानी थी। यहाँ भगवान शिव वैद्यनाथ स्वरूप में पूजे जाते हैं। नागर शैली की वास्तुकला में निर्मित यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक मूर्तिकला के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोमती और गरुड़ गंगा के संगम के समीप ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। यही कारण है कि यह धाम विशेष रूप से पवित्र माना जाता है।

मंदिर परिसर की विशेषताएँ

यह मंदिर वास्तव में 18 पत्थर-निर्मित मंदिरों का एक विशाल समूह है। मुख्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसमें माता पार्वती की काले पत्थर पर उकेरी गई अत्यंत सुंदर और दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। यह उन विरले मंदिरों में से एक है जहाँ शिव और पार्वती की एक साथ आराधना की जाती है। परिसर में मुख्य शिव मंदिर के अतिरिक्त गणेश, कार्तिकेय, ब्रह्मा, सूर्य, कुबेर और गरुड़ को समर्पित छोटे मंदिर भी हैं।

प्रमुख उत्सव और श्रद्धालुओं की आवाजाही

महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति (उत्तरायणी) के पर्व पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश के कोने-कोने से हज़ारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। सावन माह में भी इस धाम में श्रद्धालुओं की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है। देवभूमि उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन में बैजनाथ धाम की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।

पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर

यह मंदिर उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। गोमती नदी के शांत तट पर स्थित यह धाम प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है। सीएम धामी की अपील के बाद उम्मीद है कि इस सावन में श्रद्धालुओं की आवाजाही और बढ़ेगी, जो स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बुनियादी ढाँचे और स्थानीय प्रबंधन की तैयारी का सवाल भी उतना ही ज़रूरी है — सोशल मीडिया अपील से श्रद्धालु तो पहुँचेंगे, पर सुविधाएँ उनके स्वागत के लिए तैयार हैं या नहीं, यह जवाबदेही का असली पैमाना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैजनाथ मंदिर कहाँ स्थित है और इसका निर्माण कब हुआ?
बैजनाथ मंदिर उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गोमती नदी के तट पर स्थित है। इसका निर्माण लगभग 1150 ईस्वी में कत्यूरी राजाओं ने करवाया था, तब इस स्थान को कार्तिकेयपुर कहा जाता था।
बैजनाथ मंदिर में किन देवताओं की पूजा होती है?
मुख्य मंदिर में भगवान शिव वैद्यनाथ स्वरूप में पूजे जाते हैं और माता पार्वती की काले पत्थर की दुर्लभ प्रतिमा भी स्थापित है। परिसर में गणेश, कार्तिकेय, ब्रह्मा, सूर्य, कुबेर और गरुड़ के मंदिर भी हैं।
सीएम धामी ने बैजनाथ मंदिर के दर्शन की अपील क्यों की?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर एक्स पर वीडियो साझा करते हुए श्रद्धालुओं को इस प्राचीन शिव धाम के दर्शन के लिए प्रेरित किया। यह अपील धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और मंदिर की आध्यात्मिक विरासत से लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से की गई।
बैजनाथ मंदिर में प्रमुख पर्व कौन-से हैं?
महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति (उत्तरायणी) पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है। सावन माह में भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या यहाँ दर्शन के लिए आती है।
बैजनाथ मंदिर की वास्तुकला क्यों खास है?
यह मंदिर नागर शैली की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है और 18 पत्थर-निर्मित मंदिरों का समूह है। यह उन दुर्लभ मंदिरों में से एक है जहाँ शिव और पार्वती की एकसाथ पूजा की जाती है, जो इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशिष्ट बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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