सावन 2025: बैद्यनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 105 किमी कांवर पथ पर लाखों श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
सावन माह के पहले दिन, 30 जुलाई को, झारखंड के देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिहार के सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से लेकर देवघर तक फैले 105 किलोमीटर लंबे कांवर पथ पर गेरुआ वस्त्रधारी कांवड़ियों की अटूट कतारें नज़र आईं और पूरा क्षेत्र 'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठा।
श्रावणी मेले का शुभारंभ
श्रावणी मेले का औपचारिक उद्घाटन बुधवार को बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित दुम्मा प्रवेश द्वार पर वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ। गुरुवार को तड़के सुबह चार बजे बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। गर्भगृह से पिछले दिन के पुष्प हटाकर पारंपरिक कांचा जल से शुद्धिकरण किया गया, और लगभग एक घंटे तक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक सरदारी पूजा संपन्न हुई। इसके बाद जलार्पण का मार्ग सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।
धार्मिक महत्व और कांवड़ यात्रा की परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह विश्व का एकमात्र ऐसा तीर्थ माना जाता है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में विद्यमान हैं। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल कांवड़ में भरकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद बाबा का जलाभिषेक करते हैं। इसके पश्चात दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के साथ उनकी कांवड़ यात्रा पूर्ण मानी जाती है।
प्रशासनिक बंदोबस्त और नई व्यवस्थाएँ
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पूरे श्रावण मास के दौरान स्पर्श पूजा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। श्रद्धालु गर्भगृह के बाहर स्थापित आधुनिक अरघा प्रणाली के माध्यम से ही जल अर्पित कर सकेंगे। वीआईपी, वीवीआईपी और आउट ऑफ टर्न दर्शन की व्यवस्था भी इस सावन में बंद कर दी गई है, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर सुनिश्चित हो। रविवार और सोमवार को शीघ्रदर्शनम पास की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी, जबकि अन्य दिनों में इसकी शुल्क राशि बढ़ाई गई है।
AI निगरानी और सुरक्षाबल तैनाती
इस वर्ष पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी, फेशियल रिकग्निशन कैमरे और ड्रोन का उपयोग मेला क्षेत्र में किया जा रहा है। पूरे मेला परिसर में 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवान तैनात किए गए हैं। श्रद्धालुओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए QR कोड आधारित शिकायत प्रणाली भी लागू की गई है। मंदिर परिसर, शिवगंगा, दुम्मा प्रवेश द्वार और कांवर पथ — सभी स्थानों पर पहले ही दिन से श्रद्धालुओं की दीर्घ कतारें देखी जा रही हैं।
आगे क्या
पूरे श्रावण मास भर यह आस्था का प्रवाह जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भीड़ के अनुसार व्यवस्थाओं में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इस बार की तकनीक-सक्षम सुरक्षा व्यवस्था और समान दर्शन नीति को भविष्य के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।