30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सावन 2025: बैद्यनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 105 किमी कांवर पथ पर लाखों श्रद्धालु

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सावन 2025: बैद्यनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 105 किमी कांवर पथ पर लाखों श्रद्धालु

सारांश

सावन के पहले दिन बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का जनसैलाब — 105 किमी कांवर पथ पर लाखों श्रद्धालु, पहली बार AI कैमरे और ड्रोन से निगरानी, स्पर्श पूजा और वीआईपी दर्शन पर पूरी तरह रोक। यह सावन सिर्फ आस्था का नहीं, प्रशासनिक बदलाव का भी गवाह बन रहा है।

मुख्य बातें

30 जुलाई को सावन के पहले दिन बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में लाखों श्रद्धालु उमड़े।
सुल्तानगंज से देवघर तक 105 किलोमीटर लंबे कांवर पथ पर गेरुआवस्त्रधारी कांवड़ियों की अटूट कतार।
पूरे श्रावण मास स्पर्श पूजा प्रतिबंधित ; वीआईपी/वीवीआईपी दर्शन भी बंद।
पहली बार AI निगरानी, फेशियल रिकग्निशन कैमरे और ड्रोन से सुरक्षा व्यवस्था।
मेला क्षेत्र में 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवान तैनात।
QR कोड आधारित शिकायत प्रणाली और आधुनिक अरघा प्रणाली से जलार्पण की नई व्यवस्था लागू।

सावन माह के पहले दिन, 30 जुलाई को, झारखंड के देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिहार के सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से लेकर देवघर तक फैले 105 किलोमीटर लंबे कांवर पथ पर गेरुआ वस्त्रधारी कांवड़ियों की अटूट कतारें नज़र आईं और पूरा क्षेत्र 'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठा।

श्रावणी मेले का शुभारंभ

श्रावणी मेले का औपचारिक उद्घाटन बुधवार को बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित दुम्मा प्रवेश द्वार पर वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ। गुरुवार को तड़के सुबह चार बजे बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। गर्भगृह से पिछले दिन के पुष्प हटाकर पारंपरिक कांचा जल से शुद्धिकरण किया गया, और लगभग एक घंटे तक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक सरदारी पूजा संपन्न हुई। इसके बाद जलार्पण का मार्ग सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।

धार्मिक महत्व और कांवड़ यात्रा की परंपरा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह विश्व का एकमात्र ऐसा तीर्थ माना जाता है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में विद्यमान हैं। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल कांवड़ में भरकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद बाबा का जलाभिषेक करते हैं। इसके पश्चात दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के साथ उनकी कांवड़ यात्रा पूर्ण मानी जाती है।

प्रशासनिक बंदोबस्त और नई व्यवस्थाएँ

भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पूरे श्रावण मास के दौरान स्पर्श पूजा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। श्रद्धालु गर्भगृह के बाहर स्थापित आधुनिक अरघा प्रणाली के माध्यम से ही जल अर्पित कर सकेंगे। वीआईपी, वीवीआईपी और आउट ऑफ टर्न दर्शन की व्यवस्था भी इस सावन में बंद कर दी गई है, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर सुनिश्चित हो। रविवार और सोमवार को शीघ्रदर्शनम पास की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी, जबकि अन्य दिनों में इसकी शुल्क राशि बढ़ाई गई है।

AI निगरानी और सुरक्षाबल तैनाती

इस वर्ष पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी, फेशियल रिकग्निशन कैमरे और ड्रोन का उपयोग मेला क्षेत्र में किया जा रहा है। पूरे मेला परिसर में 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवान तैनात किए गए हैं। श्रद्धालुओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए QR कोड आधारित शिकायत प्रणाली भी लागू की गई है। मंदिर परिसर, शिवगंगा, दुम्मा प्रवेश द्वार और कांवर पथ — सभी स्थानों पर पहले ही दिन से श्रद्धालुओं की दीर्घ कतारें देखी जा रही हैं।

आगे क्या

पूरे श्रावण मास भर यह आस्था का प्रवाह जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भीड़ के अनुसार व्यवस्थाओं में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इस बार की तकनीक-सक्षम सुरक्षा व्यवस्था और समान दर्शन नीति को भविष्य के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह देखना होगा। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में भगदड़ और भीड़ प्रबंधन की विफलताएँ कई तीर्थस्थलों पर दर्ज हो चुकी हैं। इस बार की व्यवस्था यदि सफल रही, तो यह अन्य बड़े धार्मिक मेलों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबा बैद्यनाथ धाम कहाँ स्थित है और यह क्यों खास है?
बाबा बैद्यनाथ धाम झारखंड के देवघर जिले में स्थित है और यह देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह विश्व का एकमात्र ऐसा तीर्थ है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में स्थित हैं।
कांवड़ यात्रा में 105 किमी का रास्ता कहाँ से शुरू होता है?
कांवड़ यात्रा बिहार के सुल्तानगंज से शुरू होती है, जहाँ उत्तरवाहिनी गंगा से श्रद्धालु पवित्र जल कांवड़ में भरते हैं। इसके बाद वे 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर में बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं और दुमका के बासुकीनाथ धाम में पूजा के साथ यात्रा पूर्ण होती है।
सावन 2025 में बैद्यनाथ धाम में क्या नई व्यवस्थाएँ की गई हैं?
इस वर्ष पहली बार AI आधारित निगरानी, फेशियल रिकग्निशन कैमरे और ड्रोन तैनात किए गए हैं। इसके अलावा स्पर्श पूजा पूरी तरह प्रतिबंधित है, वीआईपी/वीवीआईपी दर्शन बंद है, और QR कोड आधारित शिकायत प्रणाली लागू की गई है।
बैद्यनाथ धाम में सावन के दौरान कितने सुरक्षाकर्मी तैनात हैं?
पूरे मेला क्षेत्र में 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवान तैनात किए गए हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती में से एक बताई जा रही है।
क्या सावन में बैद्यनाथ धाम में शीघ्रदर्शनम पास मिलेगा?
रविवार और सोमवार को शीघ्रदर्शनम पास की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी। अन्य दिनों में यह सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इसकी शुल्क राशि बढ़ा दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 12 महीने पहले
  3. 1 साल पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले