10 अगस्त 2026
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देवघर में सावन के दूसरे सोमवार पर 4 लाख कांवरियों का जलाभिषेक, 20 किमी लंबी कतार

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देवघर में सावन के दूसरे सोमवार पर 4 लाख कांवरियों का जलाभिषेक, 20 किमी लंबी कतार

सारांश

सावन के दूसरे सोमवार पर देवघर में आस्था का सैलाब — बाबा बैद्यनाथ धाम की 20 किलोमीटर लंबी कतार, साढ़े तीन से चार लाख श्रद्धालुओं का जलाभिषेक और 14,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती। सुल्तानगंज से 108 किमी पैदल चलकर आए कांवरियों की आस्था ने थकान को मात दी।

मुख्य बातें

10 अगस्त 2026 को सावन के दूसरे सोमवार पर देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में 3.5 से 4 लाख श्रद्धालुओं के जलाभिषेक का प्रशासनिक अनुमान।
मुख्य अरघा की कतार मंदिर से 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक पहुँची; एक साथ 70 से 80 हजार श्रद्धालु कतार में।
मंदिर का पट सुबह 3 बजकर 5 मिनट पर खोला गया; आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण 4 बजकर 10 मिनट से शुरू।
महंत श्रीश्री गुलाब नंद ओझा ने विशेष पूजा संपन्न की; 15 मिनट की कच्चा जल पूजा में विश्व कल्याण की कामना।
बिहार के सुल्तानगंज से 108 किलोमीटर पैदल यात्रा कर आए कांवरियों से देवघर की सड़कें केसरिया रंग में रंगीं।
सुरक्षा के लिए 14,000 सुरक्षाकर्मी तैनात; CCTV और ड्रोन से निरंतर निगरानी।

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में 10 अगस्त 2026 को सावन की दूसरी सोमवारी पर श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन के अनुमान के अनुसार, इस दिन करीब साढ़े तीन से चार लाख कांवरियों के जलाभिषेक करने की संभावना जताई गई। तड़के 3 बजे से ही पूरा शहर 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष से गूंजने लगा।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार की देर रात से ही वैद्यनाथ धाम के बाहर कांवरियों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सुबह 3 बजकर 5 मिनट पर मंदिर का पट खोला गया, जिसके बाद पुरोहित समाज ने पारंपरिक कच्चा जल पूजा संपन्न की। करीब 15 मिनट तक चली इस पूजा में विश्व कल्याण की कामना की गई। इसके बाद मंदिर के महंत सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा ने विधि-विधान से बाबा की विशेष पूजा की, जिसमें दूध, दही, घी और मधु सहित विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई। सुबह 4 बजकर 10 मिनट पर आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण का क्रम आरंभ हुआ।

कतार की स्थिति

मुख्य अरघा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक जा पहुँची। बाह्य अरघा से जलार्पण करने वाले भक्तों की पंक्ति सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही। प्रशासन के अनुसार, इस कतार में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु एक साथ शामिल रहे।

कांवरिया यात्रा का महत्व

बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पहुँचे कांवरियों की केसरिया वेशभूषा से देवघर की सड़कें रंग गईं। गौरतलब है कि यह यात्रा सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जिसमें श्रद्धालु नंगे पाँव या पदयात्रा कर बाबा को गंगाजल अर्पित करते हैं। लंबी कतार में खड़े श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान के बावजूद आस्था का उत्साह स्पष्ट दिख रहा था — कोई कांवर कंधे पर लिए था, तो कोई हाथ में गंगाजल का पात्र थामे अपनी बारी का इंतजार कर रहा था।

सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूरे कांवरिया पथ और मंदिर परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। करीब 14 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। क्विक रिस्पांस टीम सक्रिय है और सीसीटीवी तथा ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की निरंतर निगरानी की जा रही है।

आगे की स्थिति

सावन माह में प्रत्येक सोमवार को देवघर में इसी प्रकार की भीड़ उमड़ती है और आने वाले सोमवारों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। देवघर की पहचान आज एक ही स्वर से बनी हुई है — 'बोल बम'

संपादकीय दृष्टिकोण

किलोमीटर लंबी कतारें और भारी सुरक्षा तैनाती। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासनिक तैयारी इस आस्था के पैमाने के अनुरूप है? 14,000 सुरक्षाकर्मी और ड्रोन निगरानी प्रभावशाली लगते हैं, पर 20 किलोमीटर लंबी कतार यह भी बताती है कि अरघा क्षमता और भीड़ प्रबंधन में अभी भी संरचनात्मक सुधार की गुंजाइश है। 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर आए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ — यही असली कसौटी है जिस पर प्रशासन को परखा जाना चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवघर में सावन के दूसरे सोमवार पर कितने श्रद्धालु आए?
प्रशासन के अनुमान के अनुसार, 10 अगस्त 2026 को सावन के दूसरे सोमवार पर करीब साढ़े तीन से चार लाख श्रद्धालुओं के बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने की संभावना जताई गई। कतार में एक साथ 70 से 80 हजार श्रद्धालु शामिल रहे।
बाबा बैद्यनाथ धाम में मंदिर का पट कितने बजे खुला?
10 अगस्त 2026 को सुबह 3 बजकर 5 मिनट पर मंदिर का पट खोला गया। इसके बाद पुरोहित समाज ने 15 मिनट की पारंपरिक कच्चा जल पूजा की और सुबह 4 बजकर 10 मिनट पर आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण शुरू हुआ।
कांवरिया सुल्तानगंज से देवघर तक कितनी दूरी पैदल तय करते हैं?
कांवरिया बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर पहुँचते हैं। यह सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा है जिसमें श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ को गंगाजल अर्पित करते हैं।
देवघर में सावन के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं?
पूरे कांवरिया पथ और मंदिर परिसर में करीब 14,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा क्विक रिस्पांस टीम सक्रिय है और CCTV तथा ड्रोन कैमरों से निरंतर निगरानी की जा रही है।
बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण की कतार कहाँ तक फैली थी?
मुख्य अरघा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक पहुँच गई। बाह्य अरघा की कतार सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही।
राष्ट्र प्रेस
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