देवघर में सावन के दूसरे सोमवार पर 4 लाख कांवरियों का जलाभिषेक, 20 किमी लंबी कतार
सारांश
मुख्य बातें
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में 10 अगस्त 2026 को सावन की दूसरी सोमवारी पर श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन के अनुमान के अनुसार, इस दिन करीब साढ़े तीन से चार लाख कांवरियों के जलाभिषेक करने की संभावना जताई गई। तड़के 3 बजे से ही पूरा शहर 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष से गूंजने लगा।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार की देर रात से ही वैद्यनाथ धाम के बाहर कांवरियों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सुबह 3 बजकर 5 मिनट पर मंदिर का पट खोला गया, जिसके बाद पुरोहित समाज ने पारंपरिक कच्चा जल पूजा संपन्न की। करीब 15 मिनट तक चली इस पूजा में विश्व कल्याण की कामना की गई। इसके बाद मंदिर के महंत सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा ने विधि-विधान से बाबा की विशेष पूजा की, जिसमें दूध, दही, घी और मधु सहित विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई। सुबह 4 बजकर 10 मिनट पर आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण का क्रम आरंभ हुआ।
कतार की स्थिति
मुख्य अरघा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक जा पहुँची। बाह्य अरघा से जलार्पण करने वाले भक्तों की पंक्ति सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही। प्रशासन के अनुसार, इस कतार में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु एक साथ शामिल रहे।
कांवरिया यात्रा का महत्व
बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पहुँचे कांवरियों की केसरिया वेशभूषा से देवघर की सड़कें रंग गईं। गौरतलब है कि यह यात्रा सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जिसमें श्रद्धालु नंगे पाँव या पदयात्रा कर बाबा को गंगाजल अर्पित करते हैं। लंबी कतार में खड़े श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान के बावजूद आस्था का उत्साह स्पष्ट दिख रहा था — कोई कांवर कंधे पर लिए था, तो कोई हाथ में गंगाजल का पात्र थामे अपनी बारी का इंतजार कर रहा था।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूरे कांवरिया पथ और मंदिर परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। करीब 14 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। क्विक रिस्पांस टीम सक्रिय है और सीसीटीवी तथा ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की निरंतर निगरानी की जा रही है।
आगे की स्थिति
सावन माह में प्रत्येक सोमवार को देवघर में इसी प्रकार की भीड़ उमड़ती है और आने वाले सोमवारों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। देवघर की पहचान आज एक ही स्वर से बनी हुई है — 'बोल बम'।