श्रावणी मेला 2025: देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में उमड़े लाखों कांवड़िये, 55 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रावणी मेले के तीसरे दिन, 1 अगस्त को, हजारों कांवड़ियों और भगवान शिव के भक्तों की विशाल भीड़ उमड़ पड़ी। 30 जुलाई से आधिकारिक रूप से शुरू हुई इस वार्षिक तीर्थयात्रा में इस बार 35 से 55 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। केसरिया वस्त्रधारी भक्त पवित्र सावन मास में जलाभिषेक के लिए कतारबद्ध नजर आए।
मेले का माहौल और व्यवस्थाएँ
देवघर इन दिनों भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा हुआ है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में केसरिया वस्त्र पहने श्रद्धालुओं का अनवरत प्रवाह जारी है। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं, जिनमें चिकित्सा सुविधाएँ, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता सेवाएँ और भीड़ नियंत्रण के विशेष उपाय शामिल हैं।
मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं पर संतोष जताया। एक भक्त ने कहा, "व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं। हर चीज के लिए बेहतरीन सुविधाएं हैं। हमें कोई परेशानी नहीं हुई।" श्रद्धालुओं ने यह भी बताया कि इस वर्ष प्रतीक्षा समय में उल्लेखनीय कमी आई है।
हरिद्वार में भी भक्ति का सैलाब
भक्ति का यही उत्साह उत्तराखंड के हरिद्वार में भी देखा जा रहा है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ पहुँच रहे हैं और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर रहे हैं, जहाँ वे भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में सावन के पर्व का धार्मिक उत्साह चरम पर है।
श्रावणी मेले का धार्मिक महत्व
भगवान शिव के उपासकों के लिए सावन का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है। गौरतलब है कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिससे इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इस अवधि में लाखों भक्त देशभर के शिव मंदिरों में जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
आगे का कार्यक्रम
श्रावणी मेला 28 अगस्त तक चलेगा। जैसे-जैसे तीर्थयात्रा का मौसम गति पकड़ रहा है, देवघर और हरिद्वार जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर भक्तों का आगमन निरंतर जारी रहने की संभावना है। प्रशासन सभी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए सतर्क बना हुआ है।