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श्रावणी मेला 2025: देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में उमड़े लाखों कांवड़िये, 55 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

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श्रावणी मेला 2025: देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में उमड़े लाखों कांवड़िये, 55 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

सारांश

झारखंड के देवघर में श्रावणी मेले के तीसरे दिन बाबा बैद्यनाथ मंदिर में हजारों कांवड़ियों की भीड़ उमड़ी। 30 जुलाई से शुरू यह मेला 28 अगस्त तक चलेगा और इस बार 35 से 55 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। व्यवस्थाओं पर भक्तों ने संतोष जताया।

मुख्य बातें

बाबा बैद्यनाथ मंदिर , देवघर में श्रावणी मेले के तीसरे दिन 1 अगस्त को हजारों कांवड़ियों और शिव भक्तों की विशाल भीड़ उमड़ी।
मेला 30 जुलाई को आधिकारिक रूप से शुरू हुआ और 28 अगस्त तक चलेगा।
इस सावन सीजन में 35 से 55 लाख श्रद्धालुओं के देवघर पहुँचने का अनुमान है।
प्रशासन ने चिकित्सा सुविधाएँ , पेयजल , स्वच्छता सेवाएँ और भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए हैं।
हरिद्वार में भी देशभर से श्रद्धालु गंगाजल लेने पहुँच रहे हैं।

झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रावणी मेले के तीसरे दिन, 1 अगस्त को, हजारों कांवड़ियों और भगवान शिव के भक्तों की विशाल भीड़ उमड़ पड़ी। 30 जुलाई से आधिकारिक रूप से शुरू हुई इस वार्षिक तीर्थयात्रा में इस बार 35 से 55 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। केसरिया वस्त्रधारी भक्त पवित्र सावन मास में जलाभिषेक के लिए कतारबद्ध नजर आए।

मेले का माहौल और व्यवस्थाएँ

देवघर इन दिनों भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा हुआ है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में केसरिया वस्त्र पहने श्रद्धालुओं का अनवरत प्रवाह जारी है। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं, जिनमें चिकित्सा सुविधाएँ, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता सेवाएँ और भीड़ नियंत्रण के विशेष उपाय शामिल हैं।

मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं पर संतोष जताया। एक भक्त ने कहा, "व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं। हर चीज के लिए बेहतरीन सुविधाएं हैं। हमें कोई परेशानी नहीं हुई।" श्रद्धालुओं ने यह भी बताया कि इस वर्ष प्रतीक्षा समय में उल्लेखनीय कमी आई है।

हरिद्वार में भी भक्ति का सैलाब

भक्ति का यही उत्साह उत्तराखंड के हरिद्वार में भी देखा जा रहा है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ पहुँच रहे हैं और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर रहे हैं, जहाँ वे भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में सावन के पर्व का धार्मिक उत्साह चरम पर है।

श्रावणी मेले का धार्मिक महत्व

भगवान शिव के उपासकों के लिए सावन का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है। गौरतलब है कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिससे इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इस अवधि में लाखों भक्त देशभर के शिव मंदिरों में जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।

आगे का कार्यक्रम

श्रावणी मेला 28 अगस्त तक चलेगा। जैसे-जैसे तीर्थयात्रा का मौसम गति पकड़ रहा है, देवघर और हरिद्वार जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर भक्तों का आगमन निरंतर जारी रहने की संभावना है। प्रशासन सभी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए सतर्क बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जैसे-जैसे मेला अपने चरम पर पहुँचेगा, क्या व्यवस्थाएँ उतनी ही मजबूत बनी रहेंगी। हरिद्वार और देवघर दोनों स्थलों पर एक साथ भारी भीड़ का प्रबंधन राज्य और स्थानीय प्रशासन की समन्वय क्षमता को जाँचता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवघर का श्रावणी मेला 2025 कब से कब तक चलेगा?
श्रावणी मेला 2025 देवघर में 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। यह पूरे सावन माह की अवधि को कवर करता है।
इस वर्ष बाबा बैद्यनाथ मंदिर में कितने श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है?
अनुमान है कि इस श्रावण माह में 35 से 55 लाख श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ मंदिर, देवघर पहुँचेंगे। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर देवघर का धार्मिक महत्व क्या है?
बाबा बैद्यनाथ धाम देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। सावन माह में यहाँ जलाभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, इसीलिए लाखों कांवड़िये हरिद्वार से गंगाजल लाकर यहाँ अर्पित करते हैं।
श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं के लिए क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं?
प्रशासन ने चिकित्सा सुविधाएँ, पेयजल, स्वच्छता सेवाएँ और भीड़ नियंत्रण के विशेष उपाय किए हैं। मंदिर आने वाले भक्तों ने व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया है और प्रतीक्षा समय में कमी बताई है।
हरिद्वार और देवघर में सावन के दौरान क्या संबंध है?
कांवड़िये हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर देवघर पहुँचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यह परंपरा सावन माह में लाखों भक्तों द्वारा निभाई जाती है, जिससे दोनों तीर्थस्थलों पर एक साथ भारी भीड़ देखी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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