हिमंता सरमा बोले: 'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' अमेरिका-यूरोप की देन, भारतीय संस्कृति से नहीं है नाता
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 27 अगस्त को सोमनाथ में मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि 'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' जैसी पीढ़ी-आधारित अवधारणाएं पश्चिमी समाज की उपज हैं और भारत की सामाजिक व सांस्कृतिक जड़ों से इनका कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में पीढ़ियों को इस तरह के लेबल में बाँटने की परंपरा नहीं रही है।
मुख्य बयान: भारतीय संस्कृति में लेबल नहीं, रिश्ते हैं
सरमा ने कहा, 'हमारे देश में बेटे-बेटियाँ, माता-पिता और दादा-दादी व नाना-नानी होते हैं। अपने बच्चों को 'जेन जेड' या 'जेन अल्फा' जैसे लेबल में बाँटना सही नहीं है।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ये कॉन्सेप्ट अमेरिका और यूरोप से आए हैं और भारतीय संस्कृति में इनके लिए कोई जगह नहीं है। उनके अनुसार, परिवार की एकता और बच्चों की भलाई के लिए अथक परिश्रम करना ही भारतीय मूल्यों की पहचान है।
सोमनाथ दर्शन और तीर्थस्थल का महत्व
सोमनाथ मंदिर की यात्रा के संदर्भ में सरमा ने कहा कि सावन के पवित्र महीने में उन्हें इस प्रमुख तीर्थस्थल के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने यात्रा की व्यवस्था के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया। सरमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए कहा कि सोमनाथ आने वाले समय में दुनिया के प्रमुख तीर्थस्थलों में अपनी जगह बनाएगा।
नेपाल बाढ़ पर चिंता
नेपाल में आई बाढ़ को लेकर सरमा ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में असम भी बाढ़ की चपेट में आया था और ऐसी प्राकृतिक आपदाएं जन-जीवन के साथ-साथ संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुँचाती हैं। उन्होंने प्रभावित लोगों की शांति और कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
कांग्रेस पर हमला: समान नागरिक संहिता का मुद्दा
सरमा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी महिलाओं के हितों के विरुद्ध काम करती है। उनके अनुसार, कांग्रेस के विरोध के कारण देश में अब तक समान नागरिक संहिता (UCC) लागू नहीं हो पाई है। सरमा ने महिलाओं से कांग्रेस का बहिष्कार करने की अपील करते हुए कहा कि समान अधिकारों के लिए समान कानून अनिवार्य है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब UCC को लेकर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस जारी है।