15 जुलाई 2026
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असम CM हिमंत सरमा का 'लेफ्ट-लिबरल' पर हमला: 'हर विकास परियोजना का विरोध करते हैं, प्रतिस्पर्धी संघवाद ज़रूरी'

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असम CM हिमंत सरमा का 'लेफ्ट-लिबरल' पर हमला: 'हर विकास परियोजना का विरोध करते हैं, प्रतिस्पर्धी संघवाद ज़रूरी'

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा में 'लेफ्ट-लिबरल' सोच पर सीधा हमला बोला — आरोप लगाया कि ये समूह हर विकास परियोजना रोकते हैं। साथ ही 'प्रतिस्पर्धी संघवाद' का मंत्र देते हुए चेताया कि जो राज्य सुधार नहीं करेंगे, वे केंद्रीय सहयोग और विकास की दौड़ दोनों में पिछड़ जाएँगे।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 15 जुलाई को असम विधानसभा में 'लेफ्ट-लिबरल' राजनीति पर तीखा हमला बोला।
सरमा ने आरोप लगाया कि ऐसे समूह हर विकास परियोजना — अस्पताल, सड़क, सिंचाई, कृषि — का विरोध करते हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रतिस्पर्धी संघवाद को अपनाने पर ज़ोर दिया, कहा — जो राज्य विकास की दौड़ में पीछे रहेंगे, उन्हें केंद्र का कम सहयोग मिलेगा।
सरमा ने 100 प्रतिशत साक्षरता , औद्योगीकरण, निर्यात वृद्धि और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को केंद्रीय सहयोग की कुंजी बताया।
उन्होंने चेताया कि पूर्वोत्तर के पड़ोसी राज्य भी तेज़ी से विकास कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं, असम को बढ़त बनाए रखनी होगी।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार, 15 जुलाई को असम विधानसभा में कथित 'लेफ्ट-लिबरल' राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी सोच रखने वाले समूह राज्य की हर विकास परियोजना के सामने अवरोध खड़े करते हैं। सरमा ने स्पष्ट किया कि असम को आगे बढ़ने के लिए 'प्रतिस्पर्धी संघवाद' की राह पर चलना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री के मुख्य आरोप

विधानसभा में सरकार के विकास एजेंडे पर चर्चा के दौरान सरमा ने कहा, 'लेफ्ट-लिबरल सोच वाले लोग हर विकास कार्य का विरोध करने की कोशिश करते हैं। हमें अस्पताल, सड़क, सिंचाई और कृषि विकास की ज़रूरत है, लेकिन जैसे ही कोई परियोजना आती है, उसका विरोध शुरू हो जाता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आम जनता बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, सड़कें, सिंचाई सुविधाएँ और कृषि विकास चाहती है, जबकि कुछ तबके इन्हीं परियोजनाओं के विरोध में खड़े हो जाते हैं।

प्रतिस्पर्धी संघवाद पर ज़ोर

सरमा ने कहा, 'यह प्रतिस्पर्धी संघवाद का दौर है। अगर हम विकास की दौड़ में हिस्सा नहीं लेंगे, तो असम पीछे रह जाएगा। हमें विकास की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ना होगा और धीरे-धीरे राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाना होगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जो राज्य सुधार करेंगे, औद्योगीकरण को बढ़ावा देंगे, निर्यात बढ़ाएँगे, 100 प्रतिशत साक्षरता हासिल करेंगे और बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनेंगे, उन्हें केंद्र सरकार से स्वाभाविक रूप से अधिक सहयोग मिलेगा।

पड़ोसी राज्यों से प्रतिस्पर्धा की चेतावनी

पूर्वोत्तर भारत की बदलती आर्थिक स्थिति का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के कारण असम लंबे समय से इस क्षेत्र का सबसे विकसित राज्य रहा है। उन्होंने चेताया कि पड़ोसी राज्य भी तेज़ी से बड़े विकास कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य केंद्रीय निधि और निवेश आकर्षित करने की होड़ में हैं।

बुनियादी ढाँचे पर प्राथमिकता

सरमा ने बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्यों के बीच संसाधन आवंटन और विकास नीति को लेकर राष्ट्रीय बहस जारी है। असम को बढ़त बनाए रखने के लिए सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विकास की रफ़्तार बनाए रखनी होगी, यह सरमा का स्पष्ट संदेश था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा यह है कि क्या असम में बुनियादी ढाँचे के लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुँच रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि विकास परियोजनाओं का विरोध अक्सर पर्यावरणीय या विस्थापन संबंधी वैध चिंताओं से उपजता है, न कि किसी वैचारिक एजेंडे से। इस बयान को केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित न मानकर, असम की विकास नीति की जवाबदेही के व्यापक सवाल से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंत बिस्वा सरमा ने 'लेफ्ट-लिबरल' राजनीति पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 15 जुलाई को असम विधानसभा में कहा कि 'लेफ्ट-लिबरल सोच वाले लोग हर विकास कार्य का विरोध करने की कोशिश करते हैं।' उन्होंने अस्पताल, सड़क, सिंचाई और कृषि परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता की ज़रूरतों के बावजूद इन परियोजनाओं का विरोध होता है।
प्रतिस्पर्धी संघवाद से सरमा का क्या आशय है?
सरमा के अनुसार, जो राज्य सुधार करेंगे, औद्योगीकरण बढ़ाएँगे, निर्यात में वृद्धि करेंगे, 100 प्रतिशत साक्षरता हासिल करेंगे और बिजली में आत्मनिर्भर बनेंगे, उन्हें केंद्र सरकार से अधिक सहयोग मिलेगा। यह अवधारणा राज्यों के बीच केंद्रीय संसाधनों के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती है।
असम को पूर्वोत्तर में किस प्रतिस्पर्धा का सामना है?
सरमा ने चेताया कि पूर्वोत्तर के पड़ोसी राज्य भी तेज़ी से बड़े विकास कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं। असम लंबे समय से इस क्षेत्र का सबसे विकसित राज्य रहा है, लेकिन बढ़त बनाए रखने के लिए सुधारों और बुनियादी ढाँचे की रफ़्तार बनाए रखनी होगी।
सरमा ने विधानसभा में यह बयान किस संदर्भ में दिया?
यह बयान असम विधानसभा में सरकार के विकास एजेंडे पर चर्चा के दौरान दिया गया। मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।
असम के विकास में 'लेफ्ट-लिबरल' विरोध का क्या असर बताया गया?
सरमा के अनुसार, इस विरोध से विकास परियोजनाएँ बाधित होती हैं और असम केंद्रीय सहयोग व निवेश की दौड़ में पिछड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जो राज्य देश के विकास की गति के साथ नहीं चलेंगे, वे धीरे-धीरे पीछे छूट जाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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