असम CM हिमंत सरमा का 'लेफ्ट-लिबरल' पर हमला: 'हर विकास परियोजना का विरोध करते हैं, प्रतिस्पर्धी संघवाद ज़रूरी'
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार, 15 जुलाई को असम विधानसभा में कथित 'लेफ्ट-लिबरल' राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी सोच रखने वाले समूह राज्य की हर विकास परियोजना के सामने अवरोध खड़े करते हैं। सरमा ने स्पष्ट किया कि असम को आगे बढ़ने के लिए 'प्रतिस्पर्धी संघवाद' की राह पर चलना अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री के मुख्य आरोप
विधानसभा में सरकार के विकास एजेंडे पर चर्चा के दौरान सरमा ने कहा, 'लेफ्ट-लिबरल सोच वाले लोग हर विकास कार्य का विरोध करने की कोशिश करते हैं। हमें अस्पताल, सड़क, सिंचाई और कृषि विकास की ज़रूरत है, लेकिन जैसे ही कोई परियोजना आती है, उसका विरोध शुरू हो जाता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आम जनता बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, सड़कें, सिंचाई सुविधाएँ और कृषि विकास चाहती है, जबकि कुछ तबके इन्हीं परियोजनाओं के विरोध में खड़े हो जाते हैं।
प्रतिस्पर्धी संघवाद पर ज़ोर
सरमा ने कहा, 'यह प्रतिस्पर्धी संघवाद का दौर है। अगर हम विकास की दौड़ में हिस्सा नहीं लेंगे, तो असम पीछे रह जाएगा। हमें विकास की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ना होगा और धीरे-धीरे राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाना होगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जो राज्य सुधार करेंगे, औद्योगीकरण को बढ़ावा देंगे, निर्यात बढ़ाएँगे, 100 प्रतिशत साक्षरता हासिल करेंगे और बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनेंगे, उन्हें केंद्र सरकार से स्वाभाविक रूप से अधिक सहयोग मिलेगा।
पड़ोसी राज्यों से प्रतिस्पर्धा की चेतावनी
पूर्वोत्तर भारत की बदलती आर्थिक स्थिति का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के कारण असम लंबे समय से इस क्षेत्र का सबसे विकसित राज्य रहा है। उन्होंने चेताया कि पड़ोसी राज्य भी तेज़ी से बड़े विकास कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य केंद्रीय निधि और निवेश आकर्षित करने की होड़ में हैं।
बुनियादी ढाँचे पर प्राथमिकता
सरमा ने बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्यों के बीच संसाधन आवंटन और विकास नीति को लेकर राष्ट्रीय बहस जारी है। असम को बढ़त बनाए रखने के लिए सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विकास की रफ़्तार बनाए रखनी होगी, यह सरमा का स्पष्ट संदेश था।