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राजौरी बाढ़: सीएम उमर अब्दुल्ला ने जताया दुख, खुद जम्मू पहुँचकर लेंगे हालात का जायजा

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राजौरी बाढ़: सीएम उमर अब्दुल्ला ने जताया दुख, खुद जम्मू पहुँचकर लेंगे हालात का जायजा

सारांश

राजौरी में रात भर की मूसलाधार बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने शहर को जलमग्न कर दिया। सीएम उमर अब्दुल्ला ने सुबह से ही हालात पर नजर रखी और खुद जम्मू पहुँचने का फैसला किया। IMD ने 23 जुलाई तक भारी बारिश की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

राजौरी में 19 जुलाई की रात भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ आई, बस स्टैंड समेत सार्वजनिक व निजी संपत्ति को भारी नुकसान।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया।
सीएम ने 19 जुलाई दोपहर दिल्ली से जम्मू रवाना होकर स्वयं जमीनी हालात का जायजा लेने की घोषणा की।
एहतियात के तौर पर सैकड़ों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया; बचाव दल सक्रिय।
IMD ने 19 से 23 जुलाई तक पूरे जम्मू-कश्मीर में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की।
डल झील, निगीन झील पर शिकारा गतिविधियाँ रोकने और झेलम नदी के किनारे रेत खनन न करने की सख्त हिदायत।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 19 जुलाई को राजौरी में रात भर हुई मूसलाधार बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ पर गहरी चिंता और दुख जताया है। इस बाढ़ से राजौरी बस स्टैंड समेत शहर की सार्वजनिक और निजी संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुँचा है और आसपास के इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर संभव सरकारी सहायता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और निगरानी

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'सुबह से ही मैं जम्मू के कुछ हिस्सों, खासकर राजौरी शहर और आसपास के इलाकों में बहुत भारी बारिश से बने हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए हूँ। मैं इस क्षेत्र के स्थानीय विधायकों के संपर्क में हूँ। हालात को देखते हुए प्रशासन की पहली प्राथमिकता कीमती जानें बचाना है। सरकार बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण संपत्ति का नुकसान झेलने वाले प्रभावित लोगों की मदद के लिए हर संभव प्रयास करेगी।'

उन्होंने यह भी बताया कि उनका कार्यालय स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला अधिकारियों के निरंतर संपर्क में है ताकि राहत और बचाव कार्य समय पर सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री का जम्मू दौरा

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनी और जम्मू डिवीजन में बिगड़ते हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वे 19 जुलाई की दोपहर दिल्ली से जम्मू के लिए रवाना होंगे और स्वयं जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करेंगे। यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही का स्पष्ट संकेत है।

बाढ़ से नुकसान और राहत कार्य

रात भर की भारी बारिश के कारण राजौरी के कई रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए और बुनियादी ढाँचे को गंभीर क्षति पहुँची। एहतियात के तौर पर सैकड़ों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। बचाव दल नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर राहत अभियान चला रहे हैं और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुँचाने का काम जारी है।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत, पुनर्वास और हर आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जाए।

IMD की चेतावनी और सावधानी की अपील

IMD श्रीनगर स्टेशन ने 19 जुलाई से 23 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके मद्देनजर निवासियों को पहाड़ी ढलानों, भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों और जलाशयों के निकट न जाने की सलाह दी गई है।

फकीर गुजरी, उसके आसपास के इलाकों और खोनमोह में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है। पर्यटकों और डल झील तथा निगीन झील पर शिकारा चलाने वालों को मौसम की चेतावनी की अवधि में जलक्रीड़ा गतिविधियाँ पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, झेलम नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे रेत निकालने का काम करने वालों को जल स्तर की जाँच किए बिना नदी पार न करने की सख्त हिदायत दी गई है।

आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की बारिश ने पूरे उत्तर भारत में कहर बरपाया हुआ है और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी जिले विशेष रूप से संवेदनशील हैं। आने वाले दिनों में मौसम के और बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है और राहत कार्यों की निगरानी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार की बहाली के बाद यह पहले बड़े आपदा प्रबंधन की परीक्षा है। गौरतलब है कि राजौरी और आसपास के पहाड़ी जिले हर मानसून में बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आते हैं, फिर भी दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचा सुधार की गति धीमी रही है। IMD की पाँच दिन की चेतावनी के बावजूद यदि राहत तंत्र समय पर नहीं पहुँचा, तो यह नई सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े करेगा। असली कसौटी यह है कि राहत और पुनर्वास के वादे कागज़ों से ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतरते हैं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजौरी में बाढ़ कब और क्यों आई?
19 जुलाई की रात राजौरी में मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ आई, जिसने रिहायशी इलाकों को जलमग्न कर दिया और बस स्टैंड समेत सार्वजनिक व निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया। मानसून की तीव्र बारिश इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष ऐसी आपदाओं का कारण बनती है।
सीएम उमर अब्दुल्ला ने राजौरी बाढ़ पर क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुबह से ही हालात पर नजर रखी, स्थानीय विधायकों और जिला अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा और 19 जुलाई की दोपहर दिल्ली से जम्मू रवाना होकर स्वयं जमीनी स्थिति का आकलन करने की घोषणा की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हर संभव राहत और पुनर्वास का भरोसा दिलाया।
राजौरी बाढ़ में कितने लोगों को सुरक्षित निकाला गया?
एहतियात के तौर पर सैकड़ों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। बचाव दल नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर राहत अभियान चला रहे हैं और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुँचाने का काम जारी है।
IMD ने जम्मू-कश्मीर के लिए क्या चेतावनी जारी की है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के श्रीनगर स्टेशन ने 19 जुलाई से 23 जुलाई तक पूरे जम्मू-कश्मीर में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान निवासियों को पहाड़ी ढलानों, भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों और नदी-जलाशयों के निकट न जाने की सलाह दी गई है।
डल झील और झेलम नदी के लिए क्या निर्देश जारी किए गए हैं?
पर्यटकों और शिकारा चलाने वालों को मौसम की चेतावनी के दौरान डल झील और निगीन झील पर सभी गतिविधियाँ रोकने के निर्देश दिए गए हैं। झेलम नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे रेत खनन करने वालों को जल स्तर की जाँच किए बिना नदी पार करने या काम करने से सख्ती से मना किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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