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क्या सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा वोटर डिलीशन के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है?

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क्या सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा वोटर डिलीशन के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि वोटर डिलीशन के आरोप बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं। क्या यह राजनीतिक स्वार्थों के लिए किया जा रहा है? जानिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर क्या है चुनाव आयोग का पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रिया।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग ने वोटर डिलीशन के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने का दावा किया है।
विशेष गहन पुनरीक्षण एक संवैधानिक प्रक्रिया है।
विपक्ष ने सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
मतदाता सूची में नए वोटरों के नाम जोड़े जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को मान्यता दी है।

नई दिल्ली, १ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले चुनाव आयोग (ईसीआई) ने हलफनामा दाखिल किया है।

हलफनामे में चुनाव आयोग ने कहा कि बड़े पैमाने पर वोटर डिलीशन का दावा बेहद बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है और इनका इस्तेमाल निहित राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है।

चुनाव आयोग ने कहा कि एसआईआर पूरी तरह संवैधानिक, नियमित और दशकों से चली आ रही प्रक्रिया का हिस्सा है। २४ जून और २७ अक्टूबर २०२५ के आदेश वैध हैं। साफ-सुथरी और सटीक मतदाता सूची तैयार करना संवैधानिक दायित्व है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने टीएन शेषन केस (१९९५) में भी मान्यता दी थी।

चुनाव आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद ३२४ और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, १९५० की धाराएं १५, २१ और २३ आयोग को विशेष गहन पुनरीक्षण का अधिकार देती हैं।

बिहार के बाद अब देश के १२ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराया जा रहा है। एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूची नए सिरे से अपडेट की जा रही है। इस क्रम में जहां नए वोटर के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जा रहे हैं, वहीं मृतक, दूसरी जगह जाकर बसने वाले वोटर और अवैध रूप से देश के विभिन्न राज्यों में आकर बसे बाहरी मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।

वहीं, सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्ष मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा की मांग पर अड़ा रहा। संसद के बाहर भी सरकार को घेरने की पूरी कोशिश की जा रही है। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाए कि सरकार पूरी संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करने में जुटी है।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि सरकार ने देश में नीति और गणतंत्र को खत्म कर दिया है। पहले जनता तय करती थी कि कौन सरकार बनाएगा, लेकिन आज के समय में चुनाव आयोग के जरिए सरकार तय कर रही है कि कौन-कौन मतदाता बनेगा।

बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने आईएनएस से बातचीत में कहा कि सरकार पूरी संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करने में जुटी है। देश में गणतंत्र के बचने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार डरे नहीं, विपक्ष का सामना करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष के आरोपों को गंभीरता से लेना भी आवश्यक है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पारदर्शिता और सही प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग का हलफनामा क्या है?
यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया है, जिसमें आयोग ने कहा है कि वोटर डिलीशन के आरोप बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का क्या महत्व है?
एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है, जिसमें नए वोटरों के नाम शामिल किए जाते हैं और मृतकों या स्थानांतरित वोटरों के नाम हटाए जाते हैं।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म कर रही है और चुनाव आयोग के माध्यम से सत्ताधारी पार्टी के हितों का समर्थन कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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