पश्चिम बंगाल के BLO ने CEO नीलम मीणा से माँगी सुरक्षा, 8 जिले संवेदनशील घोषित
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के एक संगठन ने राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नीलम मीणा को पत्र लिखकर आगामी 'घर-घर मतदाता अभियान' के दौरान सुरक्षा मुहैया कराने की माँग की है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देश पर शुरू होने वाले इस अभियान में नए मतदाताओं का पंजीकरण और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सूची से हटाए गए योग्य मतदाताओं के नाम दोबारा दर्ज किए जाने हैं।
अभियान की पृष्ठभूमि
राज्य में इस वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव से पूर्व SIR की प्रक्रिया संपन्न हुई थी, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे। अब ECI के आदेश के तहत BLO को घर-घर जाकर उन योग्य मतदाताओं के नाम फिर से दर्ज करने हैं जिनके नाम पहले हटाए गए थे, साथ ही नए पात्र मतदाताओं का भी पंजीकरण करना है। यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य में पहले से ही तनाव बना हुआ है।
संवेदनशील जिलों की पहचान
BLO संगठन ने आठ जिलों को विशेष रूप से संवेदनशील चिह्नित किया है — उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और कोलकाता। संगठन के अनुसार, कोलकाता और हुगली के केवल चुनिंदा इलाकों को संवेदनशील माना गया है, जबकि शेष छह जिलों को पूरी तरह संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
BLO की आशंका और माँग
BLO अधिकारियों को डर है कि SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे, वे उन्हें निशाना बना सकते हैं — भले ही नाम हटाने की प्रक्रिया में BLO की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। संगठन के सचिव स्वपन मंडल ने कहा, 'हमें घर-घर जाने के दौरान सुरक्षा को लेकर खतरे की आशंका है। हमने माँग की है कि प्रत्येक BLO के साथ सुरक्षाकर्मी या आवश्यक सुरक्षा बल उपलब्ध कराया जाए।'
मालदा घटना ने बढ़ाई चिंता
BLO की यह आशंका निराधार नहीं है। अप्रैल 2026 में मालदा जिले के मोथाबाड़ी में SIR से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों पर कथित तौर पर हमला किया गया था और उन्हें कई घंटों तक बंधक बनाए रखने का आरोप है। गौरतलब है कि यह घटना SIR प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर पहले से उठ रहे सवालों को और गहरा करती है।
आगे क्या होगा
नाम न बताने की शर्त पर एक BLO ने सवाल उठाया, 'अगर न्यायिक अधिकारियों को इस तरह परेशान किया जा सकता है, तो इस बात की क्या गारंटी है कि नए मतदाता पंजीकरण अभियान के दौरान हमारी सुरक्षा से समझौता नहीं होगा?' अब सबकी निगाहें CEO नीलम मीणा के कार्यालय पर हैं कि वे इस माँग पर क्या कदम उठाती हैं और क्या अभियान से पहले सुरक्षा का ठोस इंतज़ाम सुनिश्चित किया जाएगा।