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डिजिटल अरेस्ट एक मिथक है — साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 डायल करें: CM फडणवीस

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डिजिटल अरेस्ट एक मिथक है — साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 डायल करें: CM फडणवीस

सारांश

CM फडणवीस ने साफ़ कहा — 'डिजिटल अरेस्ट' कानूनन होता ही नहीं। साइबर ठगी का शक होते ही 1930 डायल करें; देरी हुई तो पैसे वापस मिलना मुश्किल। 42 मिनट की फिल्म और साइबर एंथम के साथ महाराष्ट्र ने राज्यव्यापी जागरूकता अभियान छेड़ा।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 26 अगस्त को स्पष्ट किया कि 'डिजिटल अरेस्ट' कानूनी या व्यावहारिक रूप से अस्तित्व में नहीं है।
साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 डायल करने की अपील; गोल्डन आवर में रिपोर्टिंग से राशि वापसी की संभावना बढ़ती है।
रिपोर्ट करने में 3 से 15 दिन की देरी होने पर अपराधी पैसे कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे वसूली लगभग असंभव हो जाती है।
'डिजिटल अरेस्ट' नाम की 42 मिनट की शॉर्ट फिल्म और '1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम' जारी किया गया।
AI वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक और CBI/जज का वेश धारण कर ठगी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार, 26 अगस्त को स्पष्ट किया कि कानूनी या व्यावहारिक दृष्टि से 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई अवधारणा अस्तित्व में नहीं है। महाराष्ट्र साइबर द्वारा आयोजित एक राज्यस्तरीय जागरूकता कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे साइबर अपराधियों की मनोवैज्ञानिक चालों में न फँसें और ठगी का अंदेशा होते ही बिना एक पल की देरी किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

साइबर अपराधियों के हथकंडे

फडणवीस ने बताया कि धोखाधड़ी करने वाले गिरोह केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों, न्यायाधीशों या पुलिसकर्मियों का वेश धारण कर पीड़ितों को डराते हैं। ये अपराधी वीडियो कॉल पर नकली कोर्टरूम की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं और वर्दी पहने अभिनेताओं का उपयोग करते हैं, ताकि पीड़ित मनोवैज्ञानिक दबाव में आकर उनकी माँग मान लें।

आम हथकंडों में पार्सल में ड्रग्स मिलने का झूठा दावा, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी फोन कॉल और कानून प्रवर्तन अधिकारियों का रूप धारण करना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्दी या कोर्टरूम जैसा दृश्य देखकर नागरिक भयभीत हो जाते हैं — और यही इन अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत है।

गोल्डन आवर: रिपोर्टिंग में देरी क्यों घातक है

फडणवीस ने 'गोल्डन आवर' की अवधारणा को रेखांकित किया — साइबर धोखाधड़ी के ठीक बाद का वह समय जब पीड़ित की राशि को फ्रीज़ या वापस पाने की संभावना सबसे अधिक होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि रिपोर्ट करने में तीन से पंद्रह दिन की देरी होने पर अपराधी धनराशि को कई खातों में स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे वसूली लगभग असंभव हो जाती है। इसीलिए उन्होंने कहा कि ठगी का शक होते ही नागरिकों को 1930 डायल करना चाहिए।

मल्टीमीडिया जागरूकता अभियान

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक व्यापक जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। इसमें 'डिजिटल अरेस्ट' नामक 42 मिनट की शॉर्ट फिल्म और '1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम' जारी किया गया। इस अभियान में मशहूर हस्तियों के साथ बनाई गई सोशल मीडिया रील्स और छोटी क्लिप भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य राज्य के हर घर तक पहुँचना है।

बढ़ती डिजिटल निर्भरता और खतरे

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि जैसे-जैसे मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन पोर्टल रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे हैं, आम नागरिकों की साइबर खतरों के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि AI-संचालित वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक और छेड़छाड़ किए गए मीडिया से उत्पन्न खतरे भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

फडणवीस ने कहा कि पुलिस की तकनीक को आधुनिक बनाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता फैलाना ही सबसे सशक्त बचाव है। उन्होंने महाराष्ट्र साइबर के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना की। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए तरीकों से आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जागरूकता से परे राज्य की साइबर पुलिस की जाँच और वसूली दर क्या है — वह आँकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया। 'गोल्डन आवर' की अवधारणा सही है, मगर 1930 हेल्पलाइन की क्षमता और प्रतिक्रिया समय पर्याप्त है या नहीं, यह भी जाँचने योग्य है। मल्टीमीडिया अभियान शहरी और अर्ध-शहरी दर्शकों तक पहुँच सकता है, लेकिन ग्रामीण महाराष्ट्र में डिजिटल साक्षरता की खाई को भरने के लिए केवल सोशल मीडिया रील्स पर्याप्त नहीं होंगी।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट क्या होता है और क्या यह कानूनी है?
'डिजिटल अरेस्ट' कानूनी रूप से कोई मान्य प्रक्रिया नहीं है — यह साइबर अपराधियों द्वारा पीड़ितों को डराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक मनोवैज्ञानिक हथकंडा है। अपराधी CBI अधिकारी, जज या पुलिसकर्मी बनकर वीडियो कॉल पर नकली कोर्टरूम दिखाते हैं और पैसे ऐंठते हैं।
साइबर फ्रॉड होने पर 1930 पर कॉल करना क्यों ज़रूरी है?
1930 भारत सरकार की राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन है। ठगी के तुरंत बाद कॉल करने पर 'गोल्डन आवर' में धनराशि को फ्रीज़ या वापस दिलाने की संभावना काफी अधिक होती है। देरी होने पर अपराधी पैसे कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
रिपोर्टिंग में देरी होने पर क्या होता है?
CM फडणवीस के अनुसार, रिपोर्ट करने में 3 से 15 दिन की देरी होने पर अपराधी ठगी की रकम को कई बैंक खातों में स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे उसे वापस पाना लगभग असंभव हो जाता है। इसीलिए तत्काल रिपोर्टिंग को 'गोल्डन आवर' कहा जाता है।
महाराष्ट्र साइबर जागरूकता अभियान में क्या-क्या शामिल है?
इस अभियान में '42 मिनट' की शॉर्ट फिल्म 'डिजिटल अरेस्ट', '1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम', मशहूर हस्तियों के साथ सोशल मीडिया रील्स और छोटी जागरूकता क्लिप शामिल हैं। इसका उद्देश्य राज्य के हर घर तक साइबर सुरक्षा संदेश पहुँचाना है।
AI और डीपफेक से जुड़े साइबर खतरों से कैसे बचें?
CM फडणवीस ने सतर्क किया कि AI-संचालित वॉइस क्लोनिंग और डीपफेक से बने वीडियो तेज़ी से साइबर ठगी का हथियार बन रहे हैं। किसी भी अनजान कॉल या वीडियो पर व्यक्तिगत जानकारी या पैसे साझा न करें, और संदेह होने पर तुरंत 1930 डायल करें।
राष्ट्र प्रेस
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