डिजिटल अरेस्ट एक मिथक है — साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 डायल करें: CM फडणवीस
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार, 26 अगस्त को स्पष्ट किया कि कानूनी या व्यावहारिक दृष्टि से 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई अवधारणा अस्तित्व में नहीं है। महाराष्ट्र साइबर द्वारा आयोजित एक राज्यस्तरीय जागरूकता कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे साइबर अपराधियों की मनोवैज्ञानिक चालों में न फँसें और ठगी का अंदेशा होते ही बिना एक पल की देरी किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
साइबर अपराधियों के हथकंडे
फडणवीस ने बताया कि धोखाधड़ी करने वाले गिरोह केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों, न्यायाधीशों या पुलिसकर्मियों का वेश धारण कर पीड़ितों को डराते हैं। ये अपराधी वीडियो कॉल पर नकली कोर्टरूम की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं और वर्दी पहने अभिनेताओं का उपयोग करते हैं, ताकि पीड़ित मनोवैज्ञानिक दबाव में आकर उनकी माँग मान लें।
आम हथकंडों में पार्सल में ड्रग्स मिलने का झूठा दावा, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी फोन कॉल और कानून प्रवर्तन अधिकारियों का रूप धारण करना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्दी या कोर्टरूम जैसा दृश्य देखकर नागरिक भयभीत हो जाते हैं — और यही इन अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत है।
गोल्डन आवर: रिपोर्टिंग में देरी क्यों घातक है
फडणवीस ने 'गोल्डन आवर' की अवधारणा को रेखांकित किया — साइबर धोखाधड़ी के ठीक बाद का वह समय जब पीड़ित की राशि को फ्रीज़ या वापस पाने की संभावना सबसे अधिक होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि रिपोर्ट करने में तीन से पंद्रह दिन की देरी होने पर अपराधी धनराशि को कई खातों में स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे वसूली लगभग असंभव हो जाती है। इसीलिए उन्होंने कहा कि ठगी का शक होते ही नागरिकों को 1930 डायल करना चाहिए।
मल्टीमीडिया जागरूकता अभियान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक व्यापक जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। इसमें 'डिजिटल अरेस्ट' नामक 42 मिनट की शॉर्ट फिल्म और '1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम' जारी किया गया। इस अभियान में मशहूर हस्तियों के साथ बनाई गई सोशल मीडिया रील्स और छोटी क्लिप भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य राज्य के हर घर तक पहुँचना है।
बढ़ती डिजिटल निर्भरता और खतरे
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि जैसे-जैसे मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन पोर्टल रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे हैं, आम नागरिकों की साइबर खतरों के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि AI-संचालित वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक और छेड़छाड़ किए गए मीडिया से उत्पन्न खतरे भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
फडणवीस ने कहा कि पुलिस की तकनीक को आधुनिक बनाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता फैलाना ही सबसे सशक्त बचाव है। उन्होंने महाराष्ट्र साइबर के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना की। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए तरीकों से आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।