राजस्थान पेपर लीक: ₹25 लाख में खरीदा JEN परीक्षा का प्रश्नपत्र, जल संसाधन विभाग का AEN अतुल मीणा गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने 3 अगस्त 2026 को जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता (AEN) अतुल मीणा (31) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने जूनियर इंजीनियर (JEN) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 की 12 सितंबर 2021 को हुई पुनर्परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र ₹25 लाख में खरीदा था। यह गिरफ्तारी SOG द्वारा 19 जनवरी 2026 को दर्ज किए गए अलग मामले की विस्तृत जांच के दौरान हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
मूल JEN संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 अनियमितताएं सामने आने के बाद रद्द कर दी गई थी। इसके बाद 12 सितंबर 2021 को पुनर्परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन जांच में पाया गया कि यह पुनर्परीक्षा का प्रश्नपत्र भी परीक्षा से पहले ही पेपर लीक गिरोह के सदस्यों तक पहुँच गया था। SOG ने इस नए खुलासे के आधार पर जनवरी 2026 में अलग मुकदमा दर्ज कर जांच तेज की।
SOG के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल के अनुसार, पहले गिरफ्तार आरोपी हर्षवर्धन कुमार मीणा उर्फ 'पटवार' ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने अतुल मीणा सहित कई अभ्यर्थियों को लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था।
सौदे की कड़ियाँ
जांच एजेंसियों के अनुसार, अतुल मीणा ने पेपर लीक गिरोह के मुख्य आरोपी के एक करीबी रिश्तेदार के माध्यम से यह सौदा तय किया था। ₹25 लाख देने की सहमति के बाद परीक्षा में शामिल होने से पहले ही उन्हें हल किया हुआ प्रश्नपत्र मिल गया था। गौरतलब है कि अतुल मीणा JEN भर्ती में सफल होने से पहले करीब एक दर्जन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो चुके थे।
विभाग में चयन पर जांच
अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या कोटा उपखंड इकाई में अतुल मीणा का सहायक अभियंता पद पर चयन लीक प्रश्नपत्र की सहायता से हुआ था। अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी संभावित भूमिका की भी जांच जारी है।
कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद अतुल मीणा को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 5 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। SOG उनसे पूछताछ कर अन्य लाभार्थियों की पहचान, धन लेनदेन की जांच और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी है।
आगे क्या होगा
ADG विशाल बंसल ने कहा कि जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सबूतों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।