नीट 2026 पेपर लीक: बेटे के लिए ₹10 लाख में खरीदा पर्चा, फिर भी मिले सिर्फ 107 अंक — सीबीआई का बड़ा खुलासा

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नीट 2026 पेपर लीक: बेटे के लिए ₹10 लाख में खरीदा पर्चा, फिर भी मिले सिर्फ 107 अंक — सीबीआई का बड़ा खुलासा

सारांश

₹10 लाख चुकाकर लीक पर्चा खरीदा — और बेटे को मिले सिर्फ 107 अंक। नीट 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई का यह खुलासा बताता है कि घोटाला कितना संगठित और कितना खोखला दोनों था। सीकर से टेलीग्राम तक फैले इस नेटवर्क की परतें अब एक-एक कर उधड़ रही हैं।

मुख्य बातें

दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर बेटे ऋषि बिवाल के लिए ₹10 लाख में नीट 2026 का लीक पर्चा खरीदा।
लीक पर्चा मिलने के बावजूद ऋषि परीक्षा में केवल 107 अंक ही हासिल कर सके।
ऋषि की मार्कशीट में कथित तौर पर ग्रेस मार्क्स के ज़रिए उत्तीर्णता दर्शाई गई है।
दिनेश बिवाल ने 2025 में सोशल मीडिया पर दावा किया था कि परिवार के पाँच बच्चों ने नीट पास की; उस चक्र में भी अनियमितता की जांच जारी है।
लीक सामग्री टेलीग्राम और व्हाट्सएप के ज़रिए फैलाई गई; सीकर में एक फ्लैट समन्वय केंद्र के रूप में इस्तेमाल हुआ।
सीबीआई का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट 2026) के कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 15 मई 2026 को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि बिवाल के लिए लीक हुआ प्रश्नपत्र हासिल करने में कथित तौर पर ₹10 लाख चुकाए — बावजूद इसके ऋषि परीक्षा में केवल 107 अंक ही अर्जित कर सके।

मुख्य खुलासा: पैसे भी गए, नतीजा भी नहीं आया

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दिनेश बिवाल ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बेटे के लिए लीक हुआ परीक्षा पत्र प्राप्त किया था। जांचकर्ताओं का दावा है कि इस सौदे में लगभग ₹10 लाख का भुगतान हुआ, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला।

ऋषि बिवाल की शैक्षणिक मार्कशीट ऑनलाइन सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया, जिसमें कथित तौर पर दर्शाया गया है कि उन्होंने ग्रेस मार्क्स की सहायता से परीक्षा उत्तीर्ण की थी। यह खुलासा सीबीआई की देशव्यापी जांच में अब तक के सबसे बड़े खुलासों में से एक माना जा रहा है।

2025 का सोशल मीडिया पोस्ट और पुराने संदेह

दिनेश बिवाल ने 2025 में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए सुर्खियाँ बटोरी थीं, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके परिवार के पाँच बच्चों ने नीट सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है। जांच एजेंसियाँ अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या उस परीक्षा चक्र में भी अनियमितताएँ हुई थीं।

सीबीआई को संदेह है कि उस दौर में भी प्रवेश सुरक्षित करने के लिए लीक दस्तावेजों का उपयोग किया गया होगा।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क

जांचकर्ताओं के अनुसार, लीक हुए दस्तावेज और संबंधित पीडीएफ फाइलें कथित तौर पर टेलीग्राम और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से एजेंटों और बिचौलियों की एक श्रृंखला के ज़रिए प्रसारित की गईं। सीबीआई का मानना है कि यह ऑपरेशन कई राज्यों में फैले एक बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।

अधिकारियों ने सीकर में एक फ्लैट की पहचान की है, जिसका कथित तौर पर दस्तावेजों के वितरण और उम्मीदवारों के साथ संचार के प्रबंधन के लिए समन्वय केंद्र के रूप में उपयोग किया जा रहा था। नेटवर्क के कुछ सदस्य कूरियर की भूमिका में काम करते थे, जो लीक सामग्री को सीधे अभ्यर्थियों तक पहुँचाते थे।

दिनेश बिवाल और उनके परिवार के कुछ सदस्यों पर इस भूमिका में शामिल होने का संदेह है।

जांच का दायरा और आगे की कार्रवाई

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सीबीआई की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी रैकेट खुद इतना अक्षम था कि अपना वादा भी पूरा नहीं कर सका। असली सवाल यह है कि ग्रेस मार्क्स किसने, किस आधार पर और किसके निर्देश पर दिए — और क्या यह प्रक्रिया पारदर्शी थी। नीट 2024 के घोटाले के बाद सुधारों का दावा किया गया था, लेकिन 2026 में यही पैटर्न दोहराया गया। जब तक परीक्षा-प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव नहीं होते और दोषियों को कड़ी सज़ा नहीं मिलती, ऐसे रैकेट पनपते रहेंगे।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट 2026 पेपर लीक मामले में दिनेश बिवाल पर क्या आरोप हैं?
जांचकर्ताओं के अनुसार, दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि बिवाल के लिए कथित तौर पर ₹10 लाख में नीट 2026 का लीक प्रश्नपत्र हासिल किया। पूछताछ में उन्होंने यह बात स्वीकार की बताई जा रही है। उन पर और उनके परिवार के कुछ सदस्यों पर लीक सामग्री के वितरण नेटवर्क में शामिल होने का भी संदेह है।
ऋषि बिवाल को लीक पर्चे के बावजूद इतने कम अंक क्यों मिले?
यह स्पष्ट नहीं है कि ऋषि बिवाल केवल 107 अंक ही क्यों ला सके, जबकि उनके पास कथित तौर पर लीक पर्चा था। जांचकर्ताओं के अनुसार उनकी मार्कशीट में ग्रेस मार्क्स के ज़रिए उत्तीर्णता दर्शाई गई है, जो मामले को और संदिग्ध बनाता है।
नीट 2026 पेपर लीक नेटवर्क कैसे काम करता था?
सीबीआई के अनुसार, लीक दस्तावेज टेलीग्राम और व्हाट्सएप समूहों के ज़रिए एजेंटों और बिचौलियों की श्रृंखला द्वारा फैलाए गए। राजस्थान के सीकर में एक फ्लैट को समन्वय केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया गया। सीबीआई का मानना है यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला था।
क्या दिनेश बिवाल का परिवार 2025 की नीट में भी संदेह के दायरे में है?
हाँ। दिनेश बिवाल ने 2025 में सोशल मीडिया पर दावा किया था कि उनके परिवार के पाँच बच्चों ने नीट पास की है। जांच एजेंसियाँ अब उस परीक्षा चक्र में भी संभावित अनियमितताओं की जांच कर रही हैं और सीबीआई को संदेह है कि वहाँ भी लीक दस्तावेजों का उपयोग हुआ होगा।
नीट 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच कहाँ तक पहुँची है?
सीबीआई की जांच अभी जारी है। अब तक एक संदिग्ध समन्वय केंद्र की पहचान हो चुकी है, दिनेश बिवाल की पूछताछ हो चुकी है और डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। यह सीबीआई की देशव्यापी परीक्षा घोटाला जांच के शुरुआती बड़े खुलासों में से एक है।
राष्ट्र प्रेस
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