PM मोदी की अपील के बाद गुजरात सरकार का बड़ा फैसला: विदेश यात्राएँ बंद, वर्चुअल प्रशासन अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील के बाद गुजरात सरकार ने 15 मई 2026 को राज्यव्यापी मितव्ययिता उपायों की घोषणा की, जिसमें सरकारी यात्राओं पर अंकुश, विदेश दौरों पर रोक और सभी विभागों में वर्चुअल प्रशासन को प्राथमिकता देना शामिल है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ये निर्णय लिए गए, जिनका उद्देश्य ईंधन की खपत, सरकारी व्यय और विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को कम करना है।
मुख्य निर्णय और दिशा-निर्देश
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरकारी अधिकारियों की यात्रा अब केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अनुमत होगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आधिकारिक कार्यों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, टेलीफोन और ईमेल का अधिकतम उपयोग करें और प्रत्यक्ष यात्रा से यथासंभव बचें। जमीनी स्तर के अधिकारियों को बैठकों के लिए तब तक नहीं बुलाया जाएगा जब तक कि उनकी भौतिक उपस्थिति अनिवार्य न हो।
केंद्र सरकार या अन्य राज्य सरकारों द्वारा आयोजित बैठकों में भाग लेने वाले अधिकारियों को भी जहाँ तक संभव हो, ऑनलाइन माध्यम से ही भाग लेने की सलाह दी गई है।
विदेश यात्राओं पर कड़ा प्रतिबंध
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर विदेश यात्राओं, विदेशी प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सेमिनारों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से बचा जाना चाहिए। यह निर्णय विदेशी मुद्रा के अनावश्यक बहिर्वाह को रोकने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
जहाँ गुजरात से बाहर यात्रा अनिवार्य हो, वहाँ वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अनावश्यक कर्मचारियों को अपने साथ न ले जाएँ। अंतर-जिला यात्रा के मामले में भी अधिकारियों को प्रस्थान से पहले अपने नियंत्रण अधिकारी को सूचित करना अनिवार्य होगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और औचित्य
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता और मंत्री जीतू वाघानी ने कहा कि राज्य ने मौजूदा वैश्विक स्थिति के मद्देनजर और संसाधनों के संरक्षण के हित में ये प्रशासनिक उपाय लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण और सरकारी खजाने दोनों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन संरक्षण का आह्वान किया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से नागरिकों और सरकारी तंत्र से ऊर्जा और विदेशी मुद्रा के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की थी।
आम जनता और प्रशासन पर असर
इन उपायों का सीधा असर राज्य के हजारों सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्हें अब अपने कार्यों के संचालन के तरीके में बदलाव लाना होगा। सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश से सरकारी वाहनों पर निर्भरता घटने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हो, तो राज्य के सरकारी व्यय में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। आने वाले हफ्तों में विभागीय अनुपालन की निगरानी यह तय करेगी कि ये घोषणाएँ कागज़ से ज़मीन तक कितनी उतरती हैं।