गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपनाए ईंधन बचत उपाय, हेलीकॉप्टर यात्रा छोड़ी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 12 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण अपील के अनुरूप कई ठोस उपायों की घोषणा की, जिनमें आधिकारिक हेलीकॉप्टर यात्रा पर रोक, काफिले में कटौती और राज्य विश्वविद्यालयों में साप्ताहिक 'ईंधन-मुक्त दिवस' शामिल हैं। गांधीनगर के लोक भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।
पहल की पृष्ठभूमि
यह पहल प्रधानमंत्री मोदी के हैदराबाद में दिए गए रविवार के संबोधन के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों से आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने, विदेशी मुद्रा के संरक्षण और जिम्मेदार उपभोग की आदतें अपनाने का आह्वान किया था। मोदी ने इस अपील को वैश्विक उथल-पुथल के दौर में राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे व्यापक प्रयासों का हिस्सा बताया।
राज्यपाल के प्रमुख निर्णय
राज्यपाल देवव्रत ने लोक भवन में अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक शर्मा, गृह निदेशक एके जोशी और एडीसी शुभम कुमार के साथ बैठक में घोषणा की कि जब तक देश में पेट्रोलियम की स्थिति स्थिर नहीं हो जाती, वे गुजरात के भीतर आधिकारिक कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर या हवाई यात्रा का उपयोग नहीं करेंगे। इसके स्थान पर वे ट्रेनों, राज्य परिवहन बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों पर निर्भर रहेंगे।
उन्होंने आधिकारिक काफिले में कमी का आदेश भी दिया और स्पष्ट किया कि जेड-प्लस सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद केवल न्यूनतम आवश्यक वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा।
विश्वविद्यालयों और विभागों को निर्देश
राज्यपाल ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों को सप्ताह में एक दिन 'ईंधन-मुक्त दिवस' के रूप में मनाने का निर्देश दिया। संस्थानों को कहा गया कि वे छात्रों और कर्मचारियों को उस दिन पेट्रोल और डीजल वाहनों की बजाय साइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें।
राज्य के प्रशासनिक विभागों को भी आधिकारिक कार्यों में अनावश्यक वाहन उपयोग सीमित करने और दैनिक कार्यों में ईंधन दक्षता को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
व्यापक संदेश
राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि ये उपाय प्रधानमंत्री की व्यापक अपीलों को प्रतिबिंबित करने के उद्देश्य से हैं, जिनमें ईंधन संरक्षण के साथ-साथ स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना, प्राकृतिक कृषि पद्धतियाँ और खाद्य तेल की खपत में कमी भी शामिल हैं। यह पहल राज्य स्तर पर केंद्र सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को अमल में लाने का एक ठोस उदाहरण बन सकती है।