गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सूरत में एसटी बस से की यात्रा, यात्रियों से की सीधी बातचीत
सारांश
Key Takeaways
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शनिवार, 3 मई 2025 को सूरत के अडाजन बस स्टैंड से ओलपाड तालुका के जिनोद गाँव तक राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) की साधारण बस में यात्रा की। सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई इस यात्रा में राज्यपाल ने किसी विशेष प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया और एक आम यात्री की तरह सफर किया। उल्लेखनीय है कि उस दिन क्षेत्र में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर था।
यात्रा का विवरण
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बस में सवार होने के बाद अपना टिकट स्वयं खरीदा और डिजिटल भुगतान के माध्यम से किराया अदा किया। इस कदम का उद्देश्य नकदी रहित लेनदेन को जन-जन तक प्रेरणा देना था। पूरी यात्रा के दौरान उन्होंने सहयात्रियों से उनका हालचाल पूछा और सार्वजनिक परिवहन के बारे में उनके व्यक्तिगत अनुभवों पर खुलकर चर्चा की।
बस में मौजूद यात्री यह देखकर चकित रह गए कि राज्य के संवैधानिक प्रमुख उनके साथ बिना किसी विशेष व्यवस्था के सामान्य बस में बैठे हैं। यात्रियों ने राज्यपाल के इस सहज और जमीनी अंदाज की सराहना की।
यह पहली बार नहीं
राज्यपाल द्वारा एसटी बस में सफर करना कोई नई बात नहीं है। नागरिकों से सीधे जुड़ने के अपने व्यापक दृष्टिकोण के तहत वे इससे पहले भी कई अवसरों पर राज्य-संचालित बस सेवाओं का उपयोग कर चुके हैं। यह उनकी उस कार्यशैली का हिस्सा है जो औपचारिकताओं से परे आम जनता के साथ संवाद को प्राथमिकता देती है।
ग्राम कल्याण कार्यक्रम
राज्यपाल आचार्य देवव्रत गुजरात के विभिन्न तालुकों में साप्ताहिक 'ग्राम कल्याण' कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी जाने जाते हैं। इन दौरों में वे गाँवों का दौरा करते हैं, 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत एक एकड़ भूमि पर वृक्षारोपण में भाग लेते हैं और ग्रामीण स्वच्छता अभियानों में निवासियों के साथ मिलकर काम करते हैं।
इन दौरों के दौरान वे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के घरों में भोजन करते हैं। शाम को ग्रामीणों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, नशामुक्ति, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और प्राकृतिक खेती जैसे विषयों पर संवाद करते हैं। औपचारिक आवास के बजाय वे सरकारी स्कूल की कक्षाओं में रात बिताना पसंद करते हैं।
किसानों और बच्चों से जुड़ाव
इन ग्रामीण दौरों में राज्यपाल सुबह-सुबह स्कूली बच्चों के साथ योग सत्र आयोजित करते हैं। इसके बाद वे प्राकृतिक खेती करने वाले खेतों का दौरा करते हैं, किसानों से कृषि पद्धतियों पर मार्गदर्शन देते हैं और पशुओं का दूध दुहने जैसी गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। यह जमीनी जुड़ाव उनकी कार्यशैली की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।
राज्यपाल देवव्रत की यह पहल सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को आम जन-जीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक संदेश देती है — आने वाले समय में ऐसे और प्रयासों की उम्मीद की जा सकती है।