नीट पेपर लीक: सीबीआई जांच केरल तक पहुंची, 10 राज्यों में फैले रैकेट का पर्दाफाश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट प्रश्न पत्र लीक मामले में अपनी जांच का दायरा अब केरल तक बढ़ा दिया है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि एक कथित 'मॉडल प्रश्न पत्र', जो असली लीक हुए नीट पेपर के आधार पर तैयार किया गया था, परीक्षा से कुछ दिन पहले ही केरल के कई छात्रों तक पहुँच गया था। यह मामला देश के सबसे बड़े अंतरराज्यीय प्रवेश परीक्षा घोटालों में से एक के रूप में उभर रहा है, जिसमें 10 राज्य जांच के दायरे में आ चुके हैं।
केरल कनेक्शन कैसे सामने आया
केरल से जुड़ा यह मामला तब उजागर हुआ जब राजस्थान पुलिस ने लगभग 200 ऐसे छात्रों का विवरण सीबीआई को सौंपा, जिनके पास कथित तौर पर लीक हुआ पेपर पहुँचा था। इनमें से कुछ छात्र केरल से संबंधित पाए गए। इसके अलावा, जांचकर्ता राजस्थान के चुरू के एक मेडिकल छात्र की भूमिका की भी जाँच कर रहे हैं, जो फिलहाल केरल में पढ़ाई कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस छात्र ने केरल में परीक्षा देने वाले छात्रों के बीच पेपर पहुँचाने में एक अहम कड़ी का काम किया।
लीक की शुरुआत: नासिक की प्रिंटिंग प्रेस
शुरुआती जांच के नतीजों से पता चला है कि पेपर लीक की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक स्थित उस प्रिंटिंग प्रेस से हुई, जहाँ इस वर्ष का नीट पेपर छापा गया था। यह पिछले घोटालों से अलग है, जिनमें पेपर परिवहन के दौरान लीक होते थे। जांचकर्ताओं का आरोप है कि शुभम करनियार नाम के एक मेडिकल छात्र ने प्रिंटिंग प्रेस से असली पेपर हासिल किया और हरियाणा में मौजूद बिचौलियों के ज़रिए उसे आगे पहुँचाया।
वहाँ से, यह पेपर कथित तौर पर सीकर से अपना रैकेट चला रहे सरगनाओं तक पहुँचा। शक से बचने के लिए, लीक हुए असली पेपर को कथित तौर पर एक 'मॉडल प्रश्न पत्र' का रूप दे दिया गया। जांचकर्ताओं ने पाया कि इस मॉडल पेपर में जीव विज्ञान के 90 प्रश्न और रसायन विज्ञान के 45 में से 35 प्रश्न असली परीक्षा के पेपर से हूबहू मेल खाते थे।
10 राज्यों तक फैला नेटवर्क
सीबीआई ने इस मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जिसमें चार अलग-अलग टीमें शामिल हैं। ये टीमें उस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं जो केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में सक्रिय था। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
कीमत और माध्यम
अधिकारियों के अनुसार, इन पेपरों को टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म के ज़रिए ₹25,000 से लेकर ₹2 लाख तक की कीमतों पर बेचा गया। इस घटनाक्रम ने एक बेहद संगठित अंतरराज्यीय परीक्षा रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो कई राज्यों में एक साथ सक्रिय था।
आगे की जांच की दिशा
गौरतलब है कि यह नीट पेपर लीक विवाद पहले से ही राजनीतिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर गंभीर बहस का विषय बन चुका है। सीबीआई की विस्तारित जांच से उम्मीद की जा रही है कि रैकेट के और सदस्यों की पहचान होगी और आने वाले हफ्तों में गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।