क्या अखिलेश यादव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं? : मंत्री संजय निषाद
सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव और संजय निषाद के बीच चल रही विवादित बयानबाजी।
- धर्म और राजनीति का मिश्रण विवादों को जन्म देता है।
- संविधान का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।
लखनऊ, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के संबंध में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव बिना किसी कारण के अविमुक्तेश्वरानंद के मामले को तूल दे रहे हैं।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में संजय निषाद ने कहा, "देश संविधान के अनुसार चलता है। हर नागरिक को संविधान में अधिकार मिला है। यह संविधान ही निर्धारित करता है कि कोई वीआईपी है या वीवीआईपी। इस संवैधानिक व्यवस्था के तहत सभी को सुविधाएं मिलती हैं। धर्म का प्रचार धर्मगुरुओं का कार्य है, जबकि राजनीति करना राजनेताओं का। जब नेता धर्म में हस्तक्षेप करते हैं तो समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।"
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रशासन के नोटिस पर उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस का भी बयान आ चुका है और आगे कोई विवाद नहीं होना चाहिए। संजय निषाद ने कहा, "मेरा यही कहना है कि साधु-संतों को किसी चीज से मोह नहीं होना चाहिए। मोह-मुक्त व्यक्ति को ही बैरागी कहा जाता है।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बयान पर संजय निषाद ने कहा, "उनका दोष नहीं है, वह किसी और की दी हुई स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं।"
1984 के सिख दंगों से जुड़े विकासपुरी हिंसा मामले में सज्जन कुमार को बरी किए जाने पर संजय निषाद ने कहा कि न्यायालय के हर फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, कई बार फैसलों से असंतोष होने पर उन्हें ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
इसी बीच, मंत्री संजय निषाद ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के "अगर मुस्लिम साथ छोड़ दें, तो सपा प्रधानी का चुनाव तक नहीं जीत पाएगी" बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "तुष्टिकरण के कारण कांग्रेस समाप्त हो चुकी है। भविष्य में समाजवादी पार्टी भी समाप्त हो जाएगी। तुष्टिकरण को पूर्ण रूप से खत्म होना चाहिए।"