मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दो — बेनीवाल की लोकसभा में तीखी मांग, सरकार ने किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोमवार, 3 अगस्त को लोकसभा में राजस्थान स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की माँग जोरदार तरीके से उठाई। उन्होंने कहा कि यह स्थल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज के अतुलनीय बलिदान और संघर्ष का जीवंत प्रतीक है। केंद्र सरकार ने हालाँकि स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल मानगढ़ धाम को यह दर्जा देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व
मानगढ़ धाम राजस्थान के बाँसवाड़ा जिले की पहाड़ियों पर स्थित है और इसे आदिवासी इतिहास में एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। बेनीवाल ने सदन को याद दिलाया कि 17 नवंबर 1913 को इन्हीं पहाड़ियों पर एकत्र हुए हजारों भील आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों पर ब्रिटिश सेना ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें हजारों लोगों की जानें गई थीं। इस घटना को अक्सर 'आदिवासी जलियाँवाला बाग' की संज्ञा दी जाती है।
सांसद ने जोर देकर कहा कि मानगढ़ धाम केवल राजस्थान का नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों गुजरात और मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदायों की साझा पहचान, बलिदान और प्रतिरोध का प्रतीक है।
सरकार की प्रतिक्रिया
लोकसभा में बेनीवाल की माँग के जवाब में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत निर्धारित मानदंडों के आधार पर मानगढ़ धाम राष्ट्रीय महत्व के स्मारक की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब कई आदिवासी संगठन और विपक्षी दल लंबे समय से मानगढ़ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की माँग करते आ रहे हैं। गौरतलब है कि 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मानगढ़ धाम गए थे और वहाँ शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी, जिससे इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने की उम्मीदें बढ़ी थीं।
बेनीवाल की तीखी आपत्ति
सरकार के इस रुख पर गहरी निराशा जताते हुए बेनीवाल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के सबसे बड़े आदिवासी बलिदानों में से एक से जुड़े स्थल को अब तक राष्ट्रीय पहचान नहीं दी जा सकी। उन्होंने कहा, 'इतिहास केवल इमारतों और पुरातात्विक संरचनाओं से नहीं बनता, बल्कि उन बलिदानों से भी बनता है जिन्होंने देश की आजादी और सामाजिक चेतना को आकार दिया है।'
नागौर सांसद ने केंद्र से आग्रह किया कि मानगढ़ धाम का मूल्यांकन केवल पुरातात्विक मानकों पर न किया जाए, बल्कि इसे आदिवासी स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक जागरण और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष के व्यापक संदर्भ में देखा जाए।
बेनीवाल की माँगें
बेनीवाल ने केंद्र सरकार से तीन प्रमुख माँगें रखीं — पहली, मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए; दूसरी, इसके संरक्षण और विकास के लिए एक विशेष योजना बनाई जाए; और तीसरी, ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे आने वाली पीढ़ियाँ इसके ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी रहें। उन्होंने कहा कि मानगढ़ के शहीदों का सम्मान करना केवल आदिवासी समाज की नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है।
आगे क्या
बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि जब तक मानगढ़ धाम को उसका उचित राष्ट्रीय सम्मान नहीं मिल जाता, वे संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे। आलोचकों का कहना है कि सरकार का पुरातात्विक मानदंडों पर आधारित रुख उन ऐतिहासिक स्थलों के साथ न्याय नहीं करता जो सांस्कृतिक और सामाजिक स्मृति के केंद्र हैं, भले ही वे पुरातात्विक दृष्टि से परिभाषित 'प्राचीन स्मारक' न हों।