11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बेनीवाल ने लोकसभा में उठाया बाड़मेर में धार्मिक स्थल तोड़े जाने का मुद्दा, अमित शाह से की केंद्रीय टीम की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बेनीवाल ने लोकसभा में उठाया बाड़मेर में धार्मिक स्थल तोड़े जाने का मुद्दा, अमित शाह से की केंद्रीय टीम की मांग

सारांश

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में बाड़मेर के छह धार्मिक स्थलों को कथित तौर पर बिना कानूनी प्रक्रिया के गिराए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से केंद्रीय टीम भेजने और पारदर्शी जाँच की माँग की — राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन का सवाल उठाते हुए।

मुख्य बातें

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने 11 अगस्त को लोकसभा में नियम 377 के तहत बाड़मेर में धार्मिक स्थल तोड़े जाने का मुद्दा उठाया।
कथित तौर पर ध्वस्त किए गए स्थलों में जामा मस्जिद सियाई , जामा मस्जिद मेकन का पार , जामा मस्जिद केरकोरी , जामा मस्जिद रामपुरा (दाहेवा) , दरगाह सैयद गुल मोहम्मद शाह और भलगांव बखासर शामिल हैं।
बेनीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ध्यान आकर्षित करते हुए प्रभावित स्थलों पर केंद्रीय जाँच टीम भेजने की माँग की।
उनका तर्क है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और स्थानीय परामर्श के की गई कार्रवाई से इलाके में आक्रोश पैदा हुआ है।
बेनीवाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च मानते हुए भी पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की माँग की।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मंगलवार, 11 अगस्त को लोकसभा में राजस्थान के सीमावर्ती जिलों, विशेषकर बाड़मेर संसदीय क्षेत्र, में मुस्लिम समुदाय से जुड़े धार्मिक स्थलों और आवासीय परिसरों को कथित तौर पर बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के गिराए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए प्रभावित स्थलों पर केंद्रीय जाँच टीम भेजने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

बेनीवाल ने नियम 377 के तहत यह मामला सदन में रखा। उनके अनुसार, बाड़मेर जिले के विभिन्न हिस्सों में कई मस्जिदों और दरगाहों को कथित तौर पर ध्वस्त किया गया है। उन्होंने जिन स्थलों का विशेष रूप से उल्लेख किया, उनमें जामा मस्जिद सियाई, जामा मस्जिद मेकन का पार, जामा मस्जिद केरकोरी, जामा मस्जिद रामपुरा (दाहेवा), दरगाह सैयद गुल मोहम्मद शाह और भलगांव बखासर शामिल हैं।

बेनीवाल का पक्ष

बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हैं, परंतु साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संविधान नागरिकों को धर्म का अधिकार देता है और धार्मिक स्थलों की गरिमा की रक्षा करता है। उनका तर्क था कि सुरक्षा या प्रशासनिक कारणों से की गई किसी भी कार्रवाई को पारदर्शी और कानूनसम्मत प्रक्रिया के अंतर्गत ही अंजाम दिया जाना चाहिए।

स्थानीय आबादी पर असर

बेनीवाल के अनुसार, उचित कानूनी प्रक्रिया और स्थानीय निवासियों से पूर्व परामर्श के बिना की गई इन कार्रवाइयों से इलाके की आबादी के कुछ वर्गों में गहरा आक्रोश पैदा हुआ है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से प्रभावित निवासियों की चिंताओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनने और निपटाने का आग्रह किया।

सरकार से मांग

सांसद ने केंद्र से माँग की कि कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई जगहों पर एक केंद्रीय टीम भेजी जाए, ताकि स्थिति का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन हो सके और धार्मिक स्थलों की पवित्रता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने भविष्य में ऐसे मामलों में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया के पालन की भी माँग रखी। बेनीवाल ने यह भी कहा कि वे सभी धर्मों और समुदायों को प्रभावित करने वाले अन्याय के मुद्दे उठाना जारी रखेंगे।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बुनियादी ढाँचे के विस्तार को लेकर बहस तेज है। गौरतलब है कि राजस्थान के सीमावर्ती जिले — विशेषकर बाड़मेर और जैसलमेर — सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं और यहाँ किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का स्थानीय सामाजिक ताने-बाने पर सीधा असर पड़ता है। आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा आवश्यकताओं और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जो अपनी पहचान हिंदुत्व-समर्थक छवि से बनाते हैं। यह मुद्दा उठाना इस बात का संकेत है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा के नाम पर की जा रही प्रशासनिक कार्रवाइयाँ अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिए भी राजनीतिक रूप से अनदेखा करना संभव नहीं रहा। मुख्यधारा की कवरेज इस विरोधाभास को अक्सर चूक जाती है — कि राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच टकराव को केवल 'सांप्रदायिक' लेंस से नहीं देखा जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इन कार्रवाइयों की कानूनी वैधता और प्रक्रियागत पारदर्शिता पर सार्वजनिक जवाब देगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में क्या मुद्दा उठाया?
बेनीवाल ने 11 अगस्त को नियम 377 के तहत राजस्थान के बाड़मेर जिले में कथित तौर पर बिना कानूनी प्रक्रिया के मुस्लिम धार्मिक स्थलों और आवासीय परिसरों को गिराए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से केंद्रीय जाँच टीम भेजने की माँग की।
बाड़मेर में कौन-से धार्मिक स्थल तोड़े जाने का आरोप है?
बेनीवाल ने जामा मस्जिद सियाई, जामा मस्जिद मेकन का पार, जामा मस्जिद केरकोरी, जामा मस्जिद रामपुरा (दाहेवा), दरगाह सैयद गुल मोहम्मद शाह और भलगांव बखासर का विशेष रूप से उल्लेख किया। ये सभी स्थल बाड़मेर जिले के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं।
बेनीवाल की केंद्र सरकार से क्या माँग है?
उन्होंने केंद्र से माँग की है कि कथित तोड़फोड़ वाले स्थलों पर एक केंद्रीय टीम भेजी जाए। साथ ही उन्होंने भविष्य में ऐसे मामलों में पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया और स्थानीय निवासियों से पूर्व परामर्श सुनिश्चित करने की माँग की।
बेनीवाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या कहा?
बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालाँकि, उनका कहना है कि सुरक्षा कारणों से की गई किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को संविधान के दायरे में और पारदर्शी तरीके से ही अंजाम दिया जाना चाहिए।
नियम 377 क्या है जिसके तहत यह मुद्दा उठाया गया?
नियम 377 लोकसभा की प्रक्रिया का वह प्रावधान है जिसके तहत सांसद किसी भी सार्वजनिक महत्व के मामले को सदन में उठा सकते हैं, भले ही वह प्रश्नकाल या किसी अन्य निर्धारित कार्यसूची का हिस्सा न हो। यह सांसदों को स्थानीय या क्षेत्रीय मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर लाने का अवसर देता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले