भील प्रदेश की माँग: बांसवाड़ा के मंगर धाम में 4 राज्यों के हजारों आदिवासी एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
बांसवाड़ा के मंगर धाम में 17 जुलाई 2026 को आयोजित एक भव्य सम्मेलन में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेश के हजारों आदिवासी एकत्रित हुए और सर्वसम्मति से एक अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की माँग उठाई। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस सम्मेलन को सामाजिक और गैर-राजनीतिक बताया गया।
सम्मेलन का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के जिला उपाध्यक्ष विनोद कुमार खराड़ी ने बताया कि इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य आदिवासी अधिकारों के लिए आवाज उठाना और सरकार के समक्ष एक अलग 'भील प्रदेश' की माँग को मजबूती से प्रस्तुत करना था। उन्होंने कहा, 'आजादी के इतने वर्षों बाद भी आदिवासी क्षेत्रों में विकास नहीं हो पाया है।' गौरतलब है कि यह सम्मेलन प्रतिवर्ष 17 जुलाई को आयोजित किया जाता है।
सांसद राजकुमार रोत का आरोप
बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजकुमार रोत ने सम्मेलन में कहा कि चारों राज्यों की सरकारों ने इस क्षेत्र की उपेक्षा की है, जिसके कारण यह पिछड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सभी सरकारों ने आदिवासी समुदाय के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया है।
आदिवासी समुदाय की मुख्य माँग
खराड़ी ने जोर देकर कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समुदाय के अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष है। उनके अनुसार, वर्तमान में आदिवासी समुदाय राज्य सीमाओं के पार बिखरा हुआ है और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग हर स्तर पर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने माँग की कि बिखरे हुए आदिवासी क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग 'भील प्रदेश' बनाया जाए, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को वर्तमान कठिनाइयों से राहत मिल सके।
शांतिपूर्ण आयोजन
आयोजन समिति के सदस्य भंवरलाल परमार और आदिवासी समुदाय के सदस्यों की देखरेख में पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ। यह सम्मेलन इस बात का संकेत है कि भील समुदाय अपनी राजनीतिक और सामाजिक माँगों को लेकर एकजुट होता जा रहा है।
आगे की राह
अलग राज्य की यह माँग नई नहीं है — दशकों से भील और अन्य आदिवासी समूह इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई की वकालत करते आए हैं। हालाँकि केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सम्मेलन में उठाई गई माँगें आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन सकती हैं।