2026 में टेक सेक्टर में 1.16 लाख नौकरियाँ गईं, मई में 28,889 छंटनी — मार्च रहा सबसे बुरा महीना
सारांश
मुख्य बातें
वर्ष 2026 के पहले पाँच महीनों में वैश्विक प्रौद्योगिकी (टेक) सेक्टर में 1,16,739 कर्मचारियों की नौकरियाँ जा चुकी हैं — और अकेले मई 2026 में 28,889 छंटनियाँ दर्ज की गईं। Layoffs.fyi की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह आँकड़ा मई 2025 की तुलना में दोगुने से भी अधिक है, जब केवल 10,577 कर्मचारियों की कटौती हुई थी। उबर, मेटा, पेपाल, सिस्को और क्लाउडफ्लेयर सहित दर्जनों बड़ी कंपनियाँ इस छंटनी की लहर में सबसे आगे रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 इस वर्ष अब तक का सबसे खराब महीना रहा, जब 46,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया। मई में यह संख्या कम ज़रूर हुई, लेकिन पिछले वर्ष के समान महीने की तुलना में यह वृद्धि चिंताजनक बनी हुई है। इस साल अब तक इंट्यूट, क्वोरा और कॉइनबेस जैसी कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की है।
प्रमुख कंपनियों की कार्रवाई
उबर ने अपनी 'पीपल एंड प्लेसेस' डिवीजन — जो मानव संसाधन, भर्ती, कार्यस्थल सुविधाओं और कंपनी संस्कृति का प्रबंधन करती है — में 23 प्रतिशत कर्मचारियों की कटौती की। हालाँकि, यह उबर के लगभग 34,000 कर्मचारियों वाले वैश्विक कार्यबल का 1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा है।
मेटा ने अपने वैश्विक कर्मचारियों में 10 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की और साथ ही करीब 7,000 कर्मचारियों को एआई-आधारित भूमिकाओं में स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। वहीं, पेपाल ने अगले दो से तीन वर्षों में अपने लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारियों यानी करीब 4,760 पदों को समाप्त करने का ऐलान किया — लक्ष्य है लागत में कटौती और एआई को तेज़ी से अपनाना।
अमेरिकी नेटवर्किंग कंपनी सिस्को ने मई की शुरुआत में अपने वैश्विक कार्यबल के लगभग 5 प्रतिशत यानी 4,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की। कंपनी यह निवेश एआई, साइबर सुरक्षा और अन्य उभरते क्षेत्रों में लगाना चाहती है। सॉफ्टवेयर कंपनी क्लिकअप ने परिचालन पुनर्गठन के तहत अपने कर्मचारियों में 22 प्रतिशत की कटौती की — कंपनी का लक्ष्य एआई-आधारित भूमिकाओं के ज़रिए उत्पादकता को '100 गुना' तक बढ़ाना है।
एआई की भूमिका और विशेषज्ञों की राय
तकनीकी उद्योग के कई विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर-आधारित अधिकांश श्वेतपोश (व्हाइट-कॉलर) नौकरियाँ अगले 12 से 18 महीनों में स्वचालित हो सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कृत्रिम मेधा (एआई) को अपनाने की गति तेज़ हो रही है और कंपनियाँ परिचालन लागत घटाने के लिए तकनीकी पुनर्गठन को प्राथमिकता दे रही हैं।
गौरतलब है कि एक हालिया अलग रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियाँ समाप्त नहीं कर रहा, बल्कि काम करने के तरीके को बदल रहा है। इससे उत्पादकता बढ़ रही है और ऐसे कर्मचारियों की माँग बढ़ रही है जिनके पास तकनीकी और व्यावसायिक — दोनों तरह के कौशल हों।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
वैश्विक टेक छंटनी की यह लहर भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए भी चिंता का विषय बन रही है, क्योंकि बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने वाले हज़ारों भारतीय कर्मचारी सीधे प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि एआई और डेटा साइंस में कौशल विकास अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य हो गया है।
क्या होगा आगे
उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, यदि एआई अपनाने की यही रफ़्तार जारी रही, तो वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में भी छंटनी की घटनाएँ थमने की संभावना कम है। कंपनियाँ अब परंपरागत भूमिकाओं की जगह एआई-संचालित पदों को प्राथमिकता दे रही हैं, जो टेक उद्योग के ढाँचे में एक बड़े बदलाव का संकेत है।