जौहर विश्वविद्यालय विवाद: कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने तंजीन फातिमा से की मुलाकात, सियासत गरमाई
सारांश
मुख्य बातें
रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगे रहने के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति एक नए मोड़ पर आ गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम बुधवार, 29 जुलाई को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत रामपुर पहुँचे और विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया। इसके बाद उनकी समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खां की पत्नी एवं पूर्व सांसद तंजीन फातिमा से हुई मुलाकात ने प्रदेश के राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज़ कर दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
राजेंद्र पाल गौतम ने सबसे पहले जौहर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ध्वस्तीकरण के विरोध में धरने पर बैठे छात्रों और शिक्षकों से भेंट की। उन्होंने योगी सरकार की इस कार्रवाई को शिक्षा-विरोधी और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया। इसके बाद उन्होंने रामपुर के वरिष्ठ नेताओं तथा जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और अंत में तंजीन फातिमा से मिलकर पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत चर्चा की।
गौतम के आरोप और कांग्रेस का रुख
गौतम ने कहा कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय महान स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रवादी नेता, पत्रकार और शिक्षाविद मौलाना मोहम्मद अली जौहर की स्मृति में स्थापित है। उनके अनुसार, ऐसे संस्थान का संरक्षण केवल एक विश्वविद्यालय की रक्षा नहीं, बल्कि देश की शैक्षणिक विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन के सम्मान का भी विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार व्यक्तिगत राजनीतिक दुर्भावना के चलते यह कार्रवाई कर रही है। उनका कहना था, 'यदि किसी संस्थान के साथ केवल इस वजह से कार्रवाई की जाती है कि उसका निर्माण किसी राजनीतिक व्यक्ति ने कराया था, तो यह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।' कांग्रेस ने विश्वविद्यालय के संरक्षण के लिए हरसंभव संवैधानिक लड़ाई लड़ने का संकल्प व्यक्त किया।
ध्वस्तीकरण विवाद की पृष्ठभूमि
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जौहर विश्वविद्यालय परिसर के 38 भवनों को अवैध निर्माण घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। हालाँकि, इस आदेश के विरुद्ध दायर अपील पर सुनवाई करते हुए मुरादाबाद मंडल के आयुक्त ने फ़िलहाल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह मामला लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्रीय विषय बना हुआ है, क्योंकि आजम खां स्वयं कई कानूनी विवादों में घिरे रहे हैं।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों के बीच शुरू हो चुकी हैं और अल्पसंख्यक बहुल रामपुर क्षेत्र में हर राजनीतिक कदम बड़े निहितार्थ रखता है।
राजनीतिक असर और आगे की राह
कांग्रेस के शीर्ष प्रदेश नेतृत्व का विश्वविद्यालय पहुँचना और SP नेता के परिवार से मुलाकात करना इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ले आया है। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम विपक्षी एकजुटता का संकेत भी हो सकता है। ध्वस्तीकरण आदेश पर लगी रोक के बाद अब सभी की नज़रें मुरादाबाद मंडल आयुक्त के अगले निर्णय और न्यायालय में चल रही कार्यवाही पर टिकी हैं।