भाजपा असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है, आजम खान को जल्द मिलेगा न्याय: सपा प्रवक्ता अमीक जामेई
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई ने 18 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उत्तर प्रदेश सरकार पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मौलाना जर्जीस अंसारी विवाद से लेकर आजम खान के मामले, यूसीसी और जौहर विश्वविद्यालय तक अनेक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा। जामेई का केंद्रीय आरोप यह रहा कि सत्तारूढ़ दल जनता को वास्तविक समस्याओं से भटकाने के लिए सांप्रदायिक और राजनीतिक विवाद खड़े कर रहा है।
मौलाना जर्जीस अंसारी विवाद पर सपा का रुख
लखनऊ में मौलाना जर्जीस अंसारी के विवादास्पद बयान को लेकर भाजपा नेता मनीष यादव द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर प्रतिक्रिया देते हुए जामेई ने कहा कि सपा पहले दिन से ही अंसारी की गिरफ्तारी की माँग करती रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी धर्म के देवी-देवताओं या आस्था के प्रतीकों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना किसी भी समाज को स्वीकार्य नहीं है। जामेई ने आरोप लगाया कि यदि उत्तर प्रदेश पुलिस इस मामले में कार्रवाई नहीं कर रही, तो इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आजम खान के मामले में न्यायपालिका पर भरोसा
सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान को एक डीएम पर अमर्यादित टिप्पणी के मामले में दो वर्ष की सजा मिलने पर जामेई ने कहा कि खान लगभग साढ़े पाँच से छह वर्षों से जेल में हैं। उन्होंने खान को समाजवादी आंदोलन का स्तंभ बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर सांप्रदायिक ताकतों के विरुद्ध संघर्ष किया है। जामेई ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की न्यायिक प्रक्रिया पर प्रशासनिक दबाव का माहौल है, और यदि यह दबाव समाप्त हो तो आजम खान को न्याय मिल सकता है। उन्होंने न्यायपालिका में पूरा भरोसा जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि खान को जल्द राहत मिलेगी।
ओपी राजभर के बयान और योगी की टिप्पणियों पर पलटवार
प्रदेश में अपराध की घटनाओं में यादव और मुस्लिम समुदाय की अधिक भागीदारी संबंधी ओपी राजभर के बयान पर जामेई ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि ऐसा लगता है जैसे उनके सोशल मीडिया अकाउंट किसी और के प्रभाव में संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा राजभर को अभी भी पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) की राजनीति का हिस्सा मानती है, और ऐसे बयान समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सपा और कांग्रेस पर जनसंख्या संतुलन बदलने तथा जिन्ना की विचारधारा से जुड़ाव के आरोपों पर जामेई ने कहा कि सरकार को पहले एसआईटी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रिपोर्ट अभी सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत होनी है, तो उसके कथित मुख्य बिंदु मीडिया में कैसे लीक हो रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए नए विवाद खड़े करती रहती है।
जौहर विश्वविद्यालय और यूसीसी पर सपा का पक्ष
जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण आदेश को जामेई ने असंवैधानिक और अवैध करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जिस समय विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ, उस समय संबंधित विकास प्राधिकरण अस्तित्व में ही नहीं था, इसलिए वर्तमान नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने घोषणा की कि यदि सपा की सरकार बनी तो पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में विश्वविद्यालय को पुनः विकसित किया जाएगा, चाहे इसके लिए ₹10,000 करोड़ तक खर्च करने पड़ें।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक विवाह और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़े बयान पर जामेई ने कहा कि सरकार को किसी एक समुदाय को निशाना बनाने के बजाय सभी नागरिकों के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे बयान केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से दिए जाते हैं।
स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय एकता पर जोर
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान का समर्थन करते हुए जामेई ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में विभिन्न वर्गों और समुदायों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने देवबंद के उलेमा, मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली, मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी और राजा महेंद्र प्रताप जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख किया। जामेई ने यह भी रेखांकित किया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने विभाजन के समय मोहम्मद अली जिन्ना का विरोध किया था और भारत के साथ रहने का निर्णय लिया था।
जामेई ने अंत में कहा कि पाकिस्तान के विरुद्ध संघर्ष के समय देश के मुसलमान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सेना के साथ मजबूती से खड़े थे। उन्होंने आगाह किया कि समाज में भय और विभाजन का माहौल बनाने की बजाय शांति, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि इन्हीं के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है।