धीरेंद्र शास्त्री के 'दोस्ती जिहाद' बयान पर संत समाज में दो फाड़, अयोध्या-हरिद्वार के धर्मगुरुओं की तीखी प्रतिक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा हाल ही में दिए गए कथित 'दोस्ती जिहाद' संबंधी बयान ने संत समाज को दो खेमों में बाँट दिया है। अयोध्या और हरिद्वार के प्रमुख धर्मगुरुओं ने 7 जून को इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी — कुछ ने इसे समाज को सचेत करने वाला कदम बताया, तो कुछ ने इसे विवाद और सामाजिक तनाव को हवा देने वाला बयान करार दिया।
आलोचना: 'धार्मिक नेता को ऐसे बयान शोभा नहीं देते'
अयोध्या के महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने शास्त्री के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बागेश्वर बाबा एक धार्मिक उपदेशक हैं। एक धार्मिक उपदेशक को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। धार्मिक नेता की भूमिका समाज में शांति स्थापित करना होती है, लेकिन ऐसा लगता है कि बागेश्वर बाबा सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए विवादित बयान दे रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि धीरेंद्र शास्त्री राजनीतिक बयानबाजी करना चाहते हैं तो उन्हें राजनीति के मैदान में उतरना चाहिए।
देवेशाचार्य महाराज ने आरोप लगाया, 'ऐसे ही लोगों की वजह से ऐसा होता है। वे दूसरों को उकसाते हैं और जब कोई घटना होती है तो उसे 'दोस्ती जिहाद' या 'लव जिहाद' जैसा नाम दे देते हैं। यह देश के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे धार्मिक नेताओं पर रोक लगाने की सख्त जरूरत है।'
समर्थन: 'युवाओं को सतर्क रहना जरूरी'
अयोध्या के सीताराम दास महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान का खुलकर समर्थन किया। उनके अनुसार शास्त्री ने जो कहा वह उनकी दृष्टि में पूरी तरह सही है। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी विचारधाराएं विभिन्न तरीकों से समाज को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं और युवाओं को किसी भी प्रकार के प्रलोभन या वैचारिक प्रभाव से बचना चाहिए।
अयोध्या के आर्य संत वरुण दास महाराज ने भी शास्त्री को सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को इस घटना को लेकर सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि वे दुबई और अन्य स्थानों पर भी जा रहे हैं।
हरिद्वार से आवाज़: संयुक्त बैठक की माँग
हरिद्वार में महानिर्वाणी अखाड़े के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने कहा, 'यह तारीफ की बात है कि धीरेंद्र शास्त्री ने बार-बार ऐसे मुद्दों पर बात की है। समाज को सही रास्ता दिखाना धार्मिक नेताओं की भी जिम्मेदारी है।' उन्होंने सरकार और राजनीतिक नेताओं से अपील की कि दोनों धर्मों के वरिष्ठ धार्मिक नेताओं की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाए। रविंद्र पुरी ने कहा कि 'लैंड जिहाद', 'लव जिहाद' और 'फूड जिहाद' जैसे शब्दों के बाद अब 'फ्रेंड जिहाद' का अवधारणा भी सामने आई है।
महामंडलेश्वर की प्रतिक्रिया
महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने भी शास्त्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'हम इसका समर्थन करते हैं, और निश्चित रूप से, जिस तरह 'लैंड जिहाद', 'लव जिहाद' और 'फूड जिहाद' जैसी घटनाओं की खबरें आई हैं, अब 'फ्रेंड जिहाद' का कॉन्सेप्ट भी सामने आया है।' उन्होंने गाजियाबाद में ईद के दिन हुई हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने हिंदू समाज को चिंता में डाल दिया है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक और सामाजिक विमर्श में 'जिहाद' शब्द के विभिन्न रूपों को लेकर देशभर में बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि धीरेंद्र शास्त्री पहले भी अपने विवादास्पद बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। संत समाज में इस मुद्दे पर उभरी स्पष्ट दरार यह दर्शाती है कि धार्मिक नेतृत्व के भीतर भी इस तरह की भाषा और उसके सामाजिक प्रभाव को लेकर गहरे मतभेद हैं।