क्या धीरेंद्र शास्त्री के तिरंगे वाले बयान को महंत लोकेश दास का समर्थन मिला?
सारांश
Key Takeaways
- जातिवाद में बंटने से हम कमजोर हो सकते हैं।
- महंत लोकेश दास ने शास्त्री का समर्थन किया है।
- धर्माचार्यों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
- बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार पर चिंता।
- हिंदुओं की पहचान जाति से नहीं, बल्कि धर्म से होनी चाहिए।
हरिद्वार, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बागेश्वर धाम के प्रमुख एवं कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के तिरंगा संबंधी बयान पर धार्मिक और राजनीतिक चर्चाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इस पर संतों ने मंगलवार को अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं।
उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित जगन्नाथ आश्रम के महंत लोकेश दास महाराज ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब हम बंटेंगे, तब हम कमजोर होंगे। राजनीतिक दलों ने हमें कई जातियों में विभाजित कर दिया है, लेकिन जब मैं मुसलमानों की ओर देखता हूँ तो उनकी कोई जाति नहीं होती।"
उन्होंने आगे कहा, "काशी में जब मस्जिद को तोड़ा जा रहा था, तब केवल तीन ईंटें गिरी थीं, जिसके बाद 10,000 मुसलमान वहां इकट्ठा हो गए थे, लेकिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ क्या हुआ, इस पर कोई आवाज नहीं उठाता। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम एकजुट नहीं हैं। हमें एक होना चाहिए। किसी भी धर्माचार्य के खिलाफ कोई आपत्ति आए, तो सभी को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। शंकराचार्य हमारे भारत और सनातन धर्म के लिए महत्वपूर्ण हैं।
लोकेश दास महाराज ने कहा, "जो ब्राह्मणों के नेता बनते हैं, वे कहाँ चले गए? शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए व्यवहार पर किसी ने भी आवाज नहीं उठाई, जिस पर मुझे आपत्ति है। कुछ लोग जातिवाद का सहारा लेकर वोट मांगते हैं, लेकिन जब आपत्ति आती है, तो कोई आवाज नहीं उठाता। अगर हम जातिवाद में बंटेंगे, तो इसका फायदा मुसलमानों को होगा। आज तिरंगे पर चाँद की चर्चा हो रही है, लेकिन अगर हम किसी दिन बंटेंगे, तो ऐसा हो भी सकता है।"
बड़ा अखाड़ा उदासी के महामंडलेश्वर हरि चेतानंद ने कहा, "बांग्लादेश में हो रही घटनाएं हमारे देश के लिए चिंताजनक हैं। जिस तरह से वहाँ हिंदुओं के साथ अत्याचार हो रहा है, वह दुखद है। इसी संदर्भ में धीरेंद्र शास्त्री का बयान महत्वपूर्ण है। चूंकि, वे एक अच्छे प्रवक्ता और कथावाचक हैं, इसलिए उन्होंने यह बयान सोच-समझकर दिया होगा।"
ज्ञात हो कि बांदा में एक कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि जिस दिन तिरंगे में चाँद आ जाएगा, उस दिन न शर्मा और न वर्मा बचेगा, इसलिए हिंदुओं की पहचान जाति से नहीं, बल्कि धर्म से होनी चाहिए।