फारूक अब्दुल्ला को जेकेसीए घोटाले में बड़ा झटका, अदालत ने पेशी अनिवार्य की
सारांश
Key Takeaways
- फारूक अब्दुल्ला पर गंभीर आरोप लगे हैं।
- अदालत ने उनकी पेशी को अनिवार्य कर दिया है।
- जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है।
- अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।
- यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
श्रीनगर, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ श्रीनगर जिला कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्लू) जारी किया है। अदालत ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) घोटाले से संबंधित उनके व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग वाली याचिका को अस्वीकृत कर दिया। इस मामले में आगे की सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की गई है।
यह आदेश सुनवाई के दौरान श्रीनगर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा दिया गया, जब मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया चालू थी। अदालत ने कहा कि आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य है, इसलिए छूट देने की याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) के कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान आरोप लगाया गया कि एसोसिएशन के फंड के इस्तेमाल में गड़बड़ी हुई और लाखों रुपए के वित्तीय लेन-देन में अनियमितताएं उजागर हुईं।
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की गई थी। एजेंसी ने पहले ही इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें फारूक अब्दुल्ला का नाम भी शामिल है।
सीबीआई की चार्जशीट में आरोपियों पर रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) की धारा 120-बी, 406 और 409 के तहत आरोप लगाए गए हैं। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, जांच में सामने आया कि जेकेसीए के संचालन के दौरान वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताएं हुईं, जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
अब अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के बाद इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी, जब अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेगी।
ज्ञात हो कि पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला जेकेसीए के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं और उनके कार्यकाल के दौरान उन पर अनियमितता के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में सीबीआई ने अब्दुल्ला समेत कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था।