भारत सरकार ईरान में फंसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए सक्रिय, एस जयशंकर की अराघची से वार्ता
सारांश
Key Takeaways
- भारत सरकार ईरान में फंसे नागरिकों की मदद कर रही है।
- विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरानी विदेश मंत्री से तीन बार वार्ता हुई।
- लगभग ९,००० भारतीय नागरिक ईरान में मौजूद हैं।
- निकासी प्रक्रिया में अजरबैजान और आर्मेनिया का उपयोग किया जा रहा है।
- भारतीय दूतावास ने सुरक्षा सलाह जारी की है।
नई दिल्ली, १२ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य पूर्व में उत्पन्न संकट के बीच, भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इस संदर्भ में, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ तीन बार बातचीत की। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में साझा की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच तीन बार संवाद हुआ है। अंतिम वार्ता में समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई।
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी के प्रति मंत्रालय चिंतित है और उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद कर रही है। जो भारतीय नागरिक अजरबैजान और आर्मेनिया के माध्यम से लौटना चाहते हैं, उन्हें वीजा दिलाने और भूमि मार्ग से सीमा पार कराने में भी सहायता दी जा रही है।
उन्होंने जानकारी दी, "ईरान में लगभग ९,००० भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें छात्र, नाविक, व्यापारी, पेशेवर और कुछ तीर्थयात्री शामिल हैं।"
जायसवाल ने उल्लेख किया कि कई भारतीय नागरिक, विशेषकर छात्र, अब देश वापस लौट चुके हैं। वहीं, तेहरान में रहने वाले कई भारतीयों (इसमें छात्र और धार्मिक यात्रा पर गए लोग भी शामिल हैं) को एहतियात के तौर पर दूसरे सुरक्षित शहरों में भेजा गया है।
उन्होंने दोहराया कि जो भारतीय नागरिक अजरबैजान और आर्मेनिया के माध्यम से लौटना चाहते हैं, उन्हें वीजा और भूमि मार्ग से सीमा पार करने में मदद दी जा रही है। कई भारतीयों को इस प्रक्रिया में सहायता प्रदान की गई है, जहां से वे वाणिज्यिक उड़ानों द्वारा भारत लौट रहे हैं।
रणधीर जायसवाल ने यह भी सलाह दी कि जो भारतीय नागरिक भूमि मार्ग से ईरान छोड़ना चाहते हैं, वे भारतीय दूतावास द्वारा जारी की गई सलाह का पालन करें।